86 साल के O की वजह से केरल में खुला BJP का खाता
ये शख्स कभी कोई नहीं चुनाव नहीं जीता और जब जीता तो ऐसा जीता कि बीजेपी वाले चौड़ में आ गए. क्योंकि बार-बार हारकर जीतने वाले को राजगोपाल कहते हैं.
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फोटो - thelallantop
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केरल में बीजेपी वालों का पहली बार खाता खुला गया है. केरल की हिस्ट्री में ऐसा पहली बार हुआ है कि बीजेपी विधानसभा चुनाव में एक भी सीट जीतने में सफल रही. और बीजेपी को इस एक सीट का तोहफा दिया है 86 साल के ओ राजागोपाल ने. राजगोपाल नेमोम विधानसभा सीट से जीते हैं. पहले से लेफ्ट वालों के जो विधायक नेमोम सीट पे बैठे थे, उन्हें 8 हजार से ज्यादा वोटों से चुनावी मैदान में पेल दिया है.
हम आपको बताते हैं केरल में बीजेपी के 'सीट ओपनर' राजगोपाल के बारे में कुछ खास बातें:
1. केरल के पालक्काड़ में 1929 में पैदा हुए. वहीं रहकर शुरुआती पढ़ाई की. वकील बने. दीनदयाल उपाध्याय से प्रभावित थे, इसलिए 1960 में जनसंघ जॉइन से जुड़ गए. राजनीति की दुनिया में राजगोपाल का ये पहला कदम था. जल्द ही केरल के प्रदेश अध्यक्ष बना दिए गए.
2. राजगोपाल ने अपनी राजनीतिक किस्मत 1980 लोकसभा चुनावों में आजमाई. चुनाव में राजगोपाल की हार हुई. और ये हार का सिलसिला वहीं नहीं थमा. राजगोपाल अब तक केरल से 6 बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं. लेकिन कभी लोकसभा चुनाव नहीं जीते.
3. राजगोपाल जीत के मामले में अब से पहले भले ही फिसड्डी रहे हों. लेकिन इसका असर उनके राजनीतिक जीवन पर पड़ता नहीं दिखा. कहा जाता है कि राजगोपाल और पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के बीच काफी करीबियां थीं. इमरजेंसी के दिनों में जेल भी गए. एनडीए सरकार के दौरान कैबिनेट राज्यमंत्री भी बनाए गए.
4. चुनाव न जीतने के बाद भी राजगोपाल संसद गए, वाया राज्यसभा. राजगोपाल मध्यप्रदेश से कई बार राज्यसभा भेजे गए. 1992 से 2004 तक राजगोपाल राज्यसभा के सांसद रहे.
5. ओ राजगोपाल ने 2011 में भी विधानसभा चुनाव लड़ा था. लेकिन जीते नहीं. 6400 वोट से हार गए. इस हार को भी बीजेपी ने पॉजिटिवली लिया. क्योंकि केरल में बीजेपी का वोट पर्सेंटेज पहले से ज्यादा था. राजगोपाल की केरल के लोगों के बीच अच्छी पकड़ है. राजगोपाल राजेट्टन के नाम से पुकारे जाते हैं.
1. केरल के पालक्काड़ में 1929 में पैदा हुए. वहीं रहकर शुरुआती पढ़ाई की. वकील बने. दीनदयाल उपाध्याय से प्रभावित थे, इसलिए 1960 में जनसंघ जॉइन से जुड़ गए. राजनीति की दुनिया में राजगोपाल का ये पहला कदम था. जल्द ही केरल के प्रदेश अध्यक्ष बना दिए गए.
2. राजगोपाल ने अपनी राजनीतिक किस्मत 1980 लोकसभा चुनावों में आजमाई. चुनाव में राजगोपाल की हार हुई. और ये हार का सिलसिला वहीं नहीं थमा. राजगोपाल अब तक केरल से 6 बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं. लेकिन कभी लोकसभा चुनाव नहीं जीते.
3. राजगोपाल जीत के मामले में अब से पहले भले ही फिसड्डी रहे हों. लेकिन इसका असर उनके राजनीतिक जीवन पर पड़ता नहीं दिखा. कहा जाता है कि राजगोपाल और पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के बीच काफी करीबियां थीं. इमरजेंसी के दिनों में जेल भी गए. एनडीए सरकार के दौरान कैबिनेट राज्यमंत्री भी बनाए गए.
4. चुनाव न जीतने के बाद भी राजगोपाल संसद गए, वाया राज्यसभा. राजगोपाल मध्यप्रदेश से कई बार राज्यसभा भेजे गए. 1992 से 2004 तक राजगोपाल राज्यसभा के सांसद रहे.
5. ओ राजगोपाल ने 2011 में भी विधानसभा चुनाव लड़ा था. लेकिन जीते नहीं. 6400 वोट से हार गए. इस हार को भी बीजेपी ने पॉजिटिवली लिया. क्योंकि केरल में बीजेपी का वोट पर्सेंटेज पहले से ज्यादा था. राजगोपाल की केरल के लोगों के बीच अच्छी पकड़ है. राजगोपाल राजेट्टन के नाम से पुकारे जाते हैं.

