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'टीम इंडिया पर शर्म आती है', वर्ल्ड कप ट्रॉफी मंदिर में देख बुरी तरह भड़का पूर्व भारतीय क्रिकेटर

टीम के सेलिब्रेशन की एक और वीडियो सामने आई है उसमें सूर्यकुमार यादव, गौतम गंभीर और जय शाह ट्रॉफी के साथ नजर आए हैं. सभी ट्रॉफी लेकर अहमदाबाद के हनुमान मंदिर गए

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9 मार्च 2026 (अपडेटेड: 10 मार्च 2026, 08:03 AM IST)
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कीर्ति आजाद टीएमसी के सांसद हैं. (Photo-Screengrab/pti)
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अहमदाबाद में T-20 विश्वकप जीतने के बाद भारतीय टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) आईसीसी के चेयरमैन जय शाह के साथ ट्रॉफी लेकर मंदिर चले गए. इस दौरान टीम के हेड कोच गौतम गंभीर और बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया भी वहां मौजूद थे. अब इसे लेकर विवाद हो गया है. तमाम लोगों ने इस पर आपत्ति जताई है, जिसमें 1983 के विश्वकप विजेता टीम का हिस्सा रहे कीर्ति आजाद (Kirti Azaad) भी शामिल हैं.

ट्रॉफी लेकर मंदिर पहुंची टीम इंडिया

इस घटना का जो वीडियो सामने आया है, उसमें सूर्यकुमार यादव, गौतम गंभीर और जय शाह ट्रॉफी के साथ नजर आ रहे हैं. सभी लोग ट्रॉफी लेकर अहमदाबाद के हनुमान मंदिर गए. इस दौरान फूलों की बारिश करके सूर्यकुमार यादव का स्वागत किया गया. सभी ने मंदिर में दर्शन भी किए और इसके बाद वापस लौट गए. इसी वीडियो को लेकर कीर्ति आजाद ने नाराजगी जाहिर की है. 

आजाद ने जाहिर की नाराजगी

पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस सांसद कीर्ति आजाद ने ‘एक्स’ पर इस वीडियो को लेकर एक लंबा पोस्ट लिखा है. इसमें उन्होंने कहा,

''टीम इंडिया पर शर्म आती है! जब हमने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में विश्वकप जीता था, तब हमारी टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई खिलाड़ी थे. हम ट्रॉफी को अपनी धार्मिक जन्मभूमि, अपनी मातृभूमि भारत (हिंदुस्तान) में लाए थे.''

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कीर्ति आजाद का पोस्ट. 

आजाद ने आगे लिखा कि यह ट्रॉफी सूर्यकुमार यादव या जय शाह की नहीं बल्कि पूरे देश की है. आखिर भारतीय क्रिकेट टीम की ट्रॉफी को इन सबमें क्यों घसीटा जा रहा है? कीर्ति आजाद ने आगे लिखा,

“मस्जिद क्यों नहीं? चर्च क्यों नहीं? गुरुद्वारा क्यों नहीं? यह टीम भारत का प्रतिनिधित्व करती है. सूर्यकुमार यादव या जय शाह के परिवार का नहीं! सिराज कभी इसे मस्जिद में नहीं ले गए. संजू कभी इसे चर्च में नहीं ले गए, जिन्होंने इसे जीतने में अहम भूमिका निभाई और टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहे. यह ट्रॉफी हर धर्म के 140 करोड़ भारतीयों की है. किसी एक धर्म की जीत का जश्न मनाने की नहीं!”

सोशल मीडिया पर अब यह चर्चा का विषय बन गया है कि क्या ट्रॉफी को किसी धार्मिक जगह ले जाना सही है या नहीं है. इस पोस्ट पर कई लोगों ने रिएक्शन दिए. कुछ ने कीर्ति आजाद की बात का समर्थन किया. वहीं कुछ ने उनके करियर पर सवाल उठाए. एक यूजर ने लिखा,

''टीम इंडिया 1.4 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करती है, जो हर धर्म, भाषा और पृष्ठभूमि से आते हैं. विश्वकप की जीत पूरे देश की है. जश्न में इस एकता की झलक दिखनी चाहिए न कि खेल की जीत को धार्मिक बहस में बदलना चाहिए.''

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कीर्ति आजाद के पोस्ट पर आए कॉमेंट.

बता दें कि कीर्ति आजाद 1983 वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा रहे हैं. हालांकि, इस टूर्नामेंट में वह कुछ खास नहीं कर पाए थे. फाइनल में तो वह खाता भी नहीं खोल सके थे. सौरव दास नाम के यूजर ने वही प्रदर्शन याद दिलाते हुए लिखा,

''आप राजनेता ही हैं जो छोटी-छोटी बातों पर बेवजह विवाद खड़ा करते हैं. 1983 के विश्वकप में आपका क्या योगदान था? जवाब है, कुछ भी नहीं.''

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कीर्ति आजाद के पोस्ट पर आए कॉमेंट.

भारतीय टीम ने 8 मार्च को न्यूजीलैंड के खिलाफ एकतरफा जीत हासिल करके लगातार दूसरी बार टी20 वर्ल्ड चैंपियन का खिताब अपने नाम किया था. कुल मिलाकर यह तीसरा मौका है जब भारत ने बीस ओवरों का यह वर्ल्ड कप जीता है. इसके साथ ही भारत ने लगातार तीसरे साल आईसीसी ट्रॉफी अपने नाम की है.

वीडियो: T20 वर्ल्ड कप जीतने पर भारतियों ने ऐसे मनाया जश्न, नज़ारा देख दिल खुश हो जाएगा!

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