पब्जी में स्नाइपर चलाने वाला वो स्मैशर, जिसने इंडियन बैडमिंटन का इतिहास बदल दिया
कहानी श्रीकांत किदांबी की, जिन्हें गोपी सर ने रिजेक्ट कर दिया था.
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Kidambi Srikanth ना सिर्फ Badminton बल्कि PUBG के भी जाबड़ प्लेयर हैं (एपी फोटो)
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आप टेंशन में होते हैं तो क्या करते हैं? सो जाते हैं, वॉक पर निकल जाते हैं या फिर यूं ही चुपचाप बैठे रहते हैं? हो सकता है कि आपका तरीका हमारे द्वारा बताए गए तरीके से अलग हो. लेकिन एक चीज क्लियर सी है, इस दुनिया में कम ही लोग ऐसे हैं जो टेंशन में होने पर गेम खेलने लगते हैं. लेकिन बीते संडे को हमारी चेतना ने हमें झकझोरते हुए कहा- टेंशन बढ़ने पर गेम खेलने वाले लोग अक्सर बड़े काम करते हैं.
और इस वाक्य के पीछे था एक गेमर. वो गेमर, जो यूं तो स्मैश और ड्रॉप के लिए फेमस है, लेकिन टेंशन बढ़ते ही वह स्नाइपर लेकर ड्रॉप लूटने निकल पड़ता है. पब्जी प्रेमियों को बताने की जरूरत नहीं है, उनकी M416 तैयार है. बाकी लोग समझ लें कि टेंशन बढ़ने पर यह बंदा पब्जी या बीजीएमआई नाम का बैटल रॉयल गेम खेलने लगता है. और ये बंदा वही है जिसका मैच शुरू होते ही संडे, 19 दिसंबर को मोबाइल पर लाइव बैडमिंटन देखने वालों की संख्या चार गुनी बढ़ गई थी.
जो अब भी नहीं समझे, उन्हें बता दें कि हम श्रीकांत किदांबी की बात कर रहे हैं. वही श्रीकांत जिन्होंने इसी संडे BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता. और इसके साथ ही वह इस बड़े इवेंट में सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बन गए. लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था. श्रीकांत को अक्सर बैडमिंटन सर्किट में सेकेंड क्लास प्लेयर्स को पीटने वाला फर्स्ट क्लास शटलर कहा जाता है. और इसके पीछे का क़िस्सा ये है कि टॉप रैंक प्लेयर्स के खिलाफ श्रीकांत का रिकॉर्ड कुछ खास नहीं है.
साल 2017 के बाद से इंडियन बैडमिंटन देख रहे लोग थोड़ा अलग कहेंगे. वो मुझे याद दिलाना चाहेंगे कि श्रीकांत का रिकॉर्ड सारे ही प्लेयर्स के खिलाफ खराब है. और ये बात कुछ हद तक सही भी है. साल 2017 से 2021 के बीच श्रीकांत का खेल दोयम दर्जे का ही था. उन्हें देखकर लगता ही नहीं था कि ये वही श्रीकांत हैं जो 2018 में वर्ल्ड नंबर वन थे. और उससे पहले साल 2017 में लगातार बड़े खिताब जीत तहलका मचा दिया था. लेकिन साल 2017 और साल 2021 के श्रीकांत को जानने वाले लोग भी उनकी शुरुआत के बारे में शायद ही जानते होंगे. तो चलिए हम आपको सुनाते हैं श्रीकांत से जुड़े कुछ सुने-अनसुने क़िस्से. # कैसे हुई शुरुआत? श्रीकांत के बैडमिंटन करियर की शुरुआत मजेदार तरीके से हुई थी. श्रीकांत और उनके बड़े भाई नंदगोपाल किदांबी बचपन से ही बैडमिंटन खेलते थे. शुरुआत में दोनों भाइयों ने कोच सुधाकर रेड्डी की अकैडमी में ट्रेनिंग की. लेकिन कुछ दिन बाद ही उनके पिताजी अगला स्टेप लेते हुए दोनों को लेकर पुलेला गोपीचंद की अकैडमी पहुंच गए. कोच गोपी ने नंदगोपाल को तो अपने यहां ले लिया, लेकिन श्रीकांत की चंचलता के चलते उन्हें लेकर श्योर नहीं थे. उन्हें नंदगोपाल के आगे इस बच्चे में बहुत पोटेंशियल नहीं दिख रहा था. लेकिन श्रीकांत के पिताजी अड़े रहे और अंत में हारकर गोपीचंद ने छोटे किदांबी को भी अपनी अकैडमी में ले लिया. इस बारे में गोपी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा था,#BWFWorldChampionships2021 Final में Silver के साथ खत्म हुआ Kidambi Srikanth का सफ़र, Loh kean yew बने नए Champion. 21-15, 22-20 से जीता मैच. #BWFWorldChampionships #Huelva2021 #KidambiSrikanth pic.twitter.com/13CO3W9ggK
— Lallantop Sports (@LallantopSports) December 19, 2021
'उनके पिता ने मुझसे अपने छोटे बेटे को भी अकैडमी में लेने की गुजारिश की, क्योंकि वह बहुत शरारती था. श्रीकांत इसी तरह मेरी अकैडमी में आए.'गोपी सर बताते हैं कि श्रीकांत को शुरुआत में किसी चीज का लोड नहीं था. वह डबल्स में जितना मिलता उसी में खुश रहने वाले बालक थे. गोपी ने आगे कहा,
'वह डबल्स में मिलने वाले रिजल्ट्स से ही खुश हो जाता था. फिर मैंने उसे कुछ टारगेट्स दिए और रास्ते पर लाया. फिर वह जल्दी ही एक कठिन मेहनत करने वाला प्लेयर बन गया.'बता दें कि श्रीकांत शुरू में डबल्स ही खेलते थे. डबल्स और मिक्सड डबल्स में उन्होंने कई खिताब भी जीते. इनमें 2011 कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स में जीते हुए सिल्वर और ब्रॉन्ज़ मेडल्स भी शामिल हैं. और फिर यहीं से गोपी सर ने श्रीकांत को सिंगल्स में स्विच करने के लिए मना लिया. और फिर वही हुआ जिसे हम और आप इतिहास कहते हैं. श्रीकांत ने पूरी तरह से सिंगल्स में आने के कुछ ही महीने बाद थाईलैंड ओपन ग्रैंड प्रिक्स गोल्ड टूर्नामेंट जीत लिया. और फिर साल 2014 में लिविंग लेजेंड लिन डैन को हराकर चाइना ओपन सुपर सीरीज भी ले आए. और इस जीत के बाद गोपी ने श्रीकांत पर और मेहनत शुरू कर दी. लक्ष्य था 2016 रियो ओलंपिक्स. हालांकि यहां श्रीकांत के हाथ खाली रहे. लिन डैन ने चाइना ओपन का बदला लेते हुए उन्हें क्वॉर्टरफाइनल में मात दे दी. फिर साल 2017 आया. जिसके बारे में हम आपको बता चुके हैं. अब बात 2021 की. # No Visa से Silver Medal तक कौन यकीन करेगा कि श्रीकांत का साल 2021 BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में खेलना ही पक्का नहीं था. शायद सिर्फ वही लोग जो इंडियन स्पोर्ट्स को फॉलो करते हैं. जिन्हें क्रिकेट से इतर खेल देखना भी पसंद है. हां तो उन लोगों से अलग की जो जनता है उसे बताते हुए आगे चलते हैं. इस वर्ल्ड चैंपियनशिप के शुरू होने से तीन दिन पहले ही श्रीकांत को स्पेन का वीजा मिला. और फिर वह खेलने पहुंचे. यहां श्रीकांत को भाग्य का साथ भी मिला. उन्हें अपेक्षाकृत आसान ड्रॉ मिल गया. और इसका फायदा उठाते हुए श्रीकांत सेमीफाइनल तक पहुंच गए. और इसी के साथ उनका ब्रॉन्ज़ मेडल पक्का हो गया. बता दें कि सेमी तक के रास्ते में उन्हें सिर्फ ली शिफेंग से ही टक्कर मिली. और फिर सेमी में साथी भारतीय लक्ष्य सेन ने श्रीकांत को तीन सेट तक खेलने पर मजबूर किया. हालांकि इस पूरे सफर का अंत थोड़ी निराशा में हुआ. और फाइनल में श्रीकांत को सिंगापुर के लो कीन येव ने मात दी. हालांकि इस हार के बाद भी वह इस बड़े इवेंट में सिल्वर जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष बन गए. हालांकि हमें पूरी उम्मीद है कि श्रीकांत इतने पर नहीं रुकेंगे, क्योंकि PUBG या BGMI में सेकंड आने पर कुछ नहीं मिलता. और श्रीकांत ये बात हमसे बेहतर जानते हैं. क्योंकि उनके पास एक लॉयल स्क्वॉड है. जो कभी भी उनके साथ गेम खेलने के लिए तैयार रहती है. जानने लायक है कि श्रीकांत की इस पब्जी स्क्वॉड के दो सदस्य हैदराबाद तो तीसरा अमेरिका के ओहायो में रहता है. इस बारे में ESPN की सुजैन ने श्रीकांत की स्क्वॉड के तीन मेंबर्स में से एक, हैदराबाद के चार्टर्ड अकाउंटेंट विन्यास से बात की थी. विन्यास ने उन्हें बताया था,
'हम चारों ही ऐसे लोग हैं जो अपनी भावनाएं जाहिर नहीं करते. PUGB अपना अड्डा है. जब वह टूर्नामेंट खेल रहा होता है और हमें पता चलता है कि वो किसी टफ मैच से निकला है, उसे टेंशन से निकालना है, हम तुरंत एक मैच सेट कर लेते हैं. इस बात से फ़र्क नहीं पड़ता कि वो दुनिया के किस कोने में है. भले ही हमारे टाइमज़ोन एकदम अलग हों, हम अलार्म लगाकर सोते हैं और टाइम से उठकर गेम खेलते हैं. वह अक्सर मैच के बाद अकेला होता है. शायद उसके दिमाग में कई चीजें आती हैं ऐसे में इस गेम के जरिए उसका तनाव थोड़ा दूर हो सकता है. हमने प्री-क्वॉर्टरफाइनल के बाद गेम नहीं खेला था क्योंकि हमें पता था कि मैच टफ हो सकते हैं और उसे रिकवरी के लिए ज्यादा वक्त चाहिए होगा. आमतौर पर हम बैडमिंटन की बात नहीं करते, लेकिन पब्जी खेलते वक्त हम उसके मज़े लेते हैं, कोर्ट की किसी गलती को लेकर उसकी टांग खींचते हैं. वह भी इसपर हंसी-मजाक करता है और फिर वो बात आई-गई हो जाती है.'तमाम आई-गई बातों के साथ उम्मीद है कि अब श्रीकांत पर सवाल उठाने वाले भी उनके पिछले प्रदर्शन को आया-गया मान लेंगे. और अब उनकी सोशल मीडिया फीड में फ़ैन्स के गुस्से की जगह उनका प्यार दिखेगा.

