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IPL वालो सावधान! यूपी में 'JPL' शुरू हो गया... जेल प्रीमियर लीग!

यह नज़ारा सामने आया मथुरा के जिला कारागार से. सजायाफ्ता कैदियों में छिपे क्रिकेट टैलेंट को बाहर लाया गया. कैदियों की संख्या को देखते हुए 8 टीमें बनाई गईं. नाम भी IPL की टीमों की तरह ही दिए गए. एक महीने में 12 से ज़्यादा मैच खेले गए. 14 मई को इस जेल प्रीमियर लीग का फाइनल खेला गया.

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15 मई 2025 (पब्लिश्ड: 03:58 PM IST)
Jail Premier League JPL Organized In Mathura Prison Among Prisoners
ऑरेंज कैप और पर्पल कैप भी दिया गया. (फोटो- ANI)
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IPL खतरे में है! मतलब उसकी लोकप्रियता को चुनौती मिल सकती है. खबर है कि यूपी में 'JPL' शुरू हुई है. बोले तो? बोले तो जेल प्रीमियर लीग. मथुरा स्थित जेल के अधिकारियों ने कैदियों के बीच ये क्रिकेट टूर्नामेंट शुरू करवाया है. मकसद है उनकी फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाना और मेंटल स्ट्रेस दूर करना.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह नज़ारा सामने आया मथुरा के जिला कारागार से. सजायाफ्ता कैदियों में छिपे क्रिकेट टैलेंट को बाहर लाया गया. कैदियों की संख्या को देखते हुए 8 टीमें बनाई गईं. नाम भी IPL की टीमों की तरह ही दिए गए. एक महीने में 12 से ज़्यादा मैच खेले गए. 14 मई को इस जेल प्रीमियर लीग का फाइनल खेला गया. सोशल मीडिया पर इस पहल को काफी सराहा जा रहा है.

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क्रिकेट खेलते कैदी. (वीडियो ग्रैब)

जेल अधीक्षक अंशुमान गर्ग के मुताबिक, कैदियों को 4-4 टीमों के 2 ग्रुप में बांटा गया था. कुल 8 टीमों के बीच 12 लीग मैच खेले गए. टीमों को टाइटंस, रॉयल्स, कैपिटल, नाइट राइडर्स जैसे नाम दिए गए. पहला मैच टाइटंस और रॉयल्स के बीच खेला गया था. इसमें टाइटंस की टीम जीती थी. IPL की तरह ही चार ही टीमें प्लेऑफ में क्वालिफाई कर सकीं. बाकी बाहर हो गईं.

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जीतने के बाद जश्न मनाते कैदी. (वीडियो ग्रैब)

नाइट राइडर्स और कैपिटल के बीच फाइनल मैच खेला गया. इसमें नाइट राइडर्स की टीम ने कैपिटल को हराकर ट्रॉफी पर अपना कब्ज़ा जमा लिया. नाइट राइडर्स टीम के कौशल को मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज चुना गया. मैच में पर्पल कैप पंकज को और ऑरेंज कैप भूरा नाम के कैदी को मिली.

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मैच के बाद डांस करते कैदी. (वीडियो ग्रैब)

कैदियों की मानसिक सेहत के मद्देनजर शुरू किए गए इस टूर्नामेंट को लेकर जेल अधीक्षक अंशुमान गर्ग ने कहा,

ज़मानत में देरी या अन्य कारणों से कैदी काफी तनाव में रहते हैं. उन्हें तनाव मुक्त रखने के लिए खेल एक अच्छा ज़रिया है. जहां वे सभी हिस्सा लेते हैं और तनाव पर काबू पाते हैं. इससे भाईचारा और एकता की भावना को भी बढ़ावा मिलता है. लीग में कुल 130 कैदियों ने हिस्सा लिया. बाकी कैदियों ने दर्शक बनकर इसका लुत्फ उठाया.

दैनिक भास्कर ने बताया कि फाइनल मुकाबले के लिए स्पॉन्सरशिप भी मिली. स्पॉन्सर ने दोनों टीम के खिलाड़यों को ड्रेस, कैप, ट्रॉफी और मेडल भी बांटे.

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