'कॉफी विद करन' ने कैसे बदली हार्दिक पंड्या की लाइफ?
हार्दिक पंड्या की ज़िन्दगी बदलने वाली कहानी, जिसने बनाया उन्हें IPL का सफल कप्तान.

'कोच अब तुम फिर कभी भी मेरे बारे में नेगेटिव नहीं सुनोगे.'
कॉफी विद करन शो में हुए विवाद के बाद ये शब्द थे भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार और गुजरात टाइटंस टीम के कप्तान हार्दिक पंड्या के. हार्दिक ने ये बात अपने बचपन के कोच जितेन्द्र सिंह से कही थी.
IPL 2022 में हार्दिक की कमाल की परफॉर्मेंस के बाद कोच ने कहा,
'वो अपने शब्दों पर खरा उतरा, आज उसके पिता को उस पर गर्व होगा.'
हार्दिक पंड्या. भारतीय क्रिकेट का वो नाम जिन्हें कभी भारतीय क्रिकेट टीम के बिगड़ैल लड़कों में गिना जाता था. एक वक्त पर कॉफी विद करन का उनका विवादित एपिसोड, टीम इंडिया से बाहर होना. इन सब चीज़ों को देख उन्हें भारतीय क्रिकेट से खत्म मान लिया गया था. लेकिन हार्दिक पंड्या ने बेहतरीन वापसी करते हुए अपने सभी आलोचकों को जवाब दिया है. लेकिन ये कमाल वापसी कैसे हुई, कैसे हार की कगार पर खड़े हार्दिक ने क्रिकेट मैदान पर इतनी शानदार वापसी कर दिखाई. इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में उनके कोच के हवाले से बहुत सारी घटनाएं बताई गई हैं. आइये जानते हैं, कैसे हार्दिक इतने सुलझे हुए इंसान बने.
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए हार्दिक के कोच जितेंद्र सिंह ने पंड्या की वापसी का किस्सा सुनाया.
जब पंड्या ने कप्तानी से किया था इनकार
जीतूभाई ने बताया कि कैसे IPL के दूसरे सीज़न के बाद हार्दिक को कप्तानी अनुभव दिलाया गया. उन्होंने बताया,
'मैंने उसे रिलायंस की साइड का कप्तान बनाया. मैंने उससे कहा कि अब वक्त आ गया है जब वो इस क्षेत्र में भी काम करे. हार्दिक तब बहुत उत्सुक नहीं था. उसने मुझसे कहा 'मैं अभी ये सब नहीं चाहता. मैं सिर्फ अपनी बैटिंग और बॉलिंग पर ही फोकस करना चाहता हूं.' मैंने तब इसे जाने दिया, लेकिन मैं चाहता था कि ये विचार कहीं ना कहीं उसके ज़हन में रहे.'
कोच ने आगे बताया,
'जब वो काफी युवा थे तो वो सोचते थे कि ये सब बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है. इसका मतलब बॉस बनना है. लेकिन एक वक्त के बाद उन्हें ये एहसास हो गया कि ये नैचुरली उसके पास आ रहा है. क्योंकि ये फैसले लेने की क्षमता, क्रिकेट की सोच, स्ट्रेटेजी और अपने साथी खिलाड़ियों को सिर्फ नैचुरल रहने देने के लिए है.'
जीतूभाई ने IPL 2022 में उनकी कप्तानी के संदर्भ में कहा,
'मैं इससे बिल्कुल भी हैरान नहीं हूं जिस तरह से उसने डेविड मिलर को बैक किया. क्योंकि वो जिन चीज़ों से गुज़रा, और बाकी लोग उसे जिस तरह से देख रहे थे, उसका मज़ाक बनाते थे. इसलिए वो अच्छे से जानता है कि उसे अपने जैसे खिलाड़ियों के साथ क्या करना है. और ये सबसे ताकतवर चीज़ है कि वो ये अच्छे से जानता है कि उन्हें अपने तरीके से कैसे बैक करना है.'
वो तीन घटनाएं जिन्होंने बदली पंड्या की लाइफ. उन्होंने ये भी बताया कि हार्दिक की ज़िन्दगी में घटी कौन सी तीन घटनाओं ने उन्हें अचानक से मैच्योर बना दिया. उन्होंने कहा,
हार्दिक की कप्तानी में क्या है खास?'करन जौहर एपिसोड, शादी के बाद पिता बनना और उसके बाद पिछले साल हुई उनके पिता की मौत. इन सभी घटनाओं का उन पर अलग तरीके से असर हुआ. लेकिन मुझे लगता है कि इन तीनों घटनाओं ने उन्हें परिपक्व बनाया. वह उस टेलीविजन शो के बाद फिर से नकारात्मक महसूस नहीं करना चाहता था. वो अपनी शादी और पिता की मौत के बाद सिर्फ एक स्थिर खुशी वाला परिवार चाहता था. पिता की मौत ने हार्दिक एक मैच्योर इंसान बना दिया.'
जीतूभाई ने ये भी बताया कि कैसे वो एक अच्छे कप्तान हैं. उन्होंने कहा,
चोट के बाद कैसे मिला पंड्या को कॉन्फिडेंस?'किसी बात सुनने वाले सेंस में उनमें किसी भी तरह का ईगो नहीं है. वो हमेशा से चीज़ों को अच्छे से सुनने वाला है. वो हमेशा अच्छी एडवाइज़ मानता है. भले ही वो आखिर में अपने मन की करे लेकिन जिन लोगों पर विश्वास करता है उनकी बात ज़रूर सुनता है.
वो नेहरा पर बहुत ज़्यादा विश्वास करता है. वो बेवकूफ नहीं है कि कहे 'मैं सबकुछ जानता हूं, मैं इसे अपने तरीके से कर लूंगा या लोग क्या सोचेंगे?' बल्कि वो समझता है और अच्छे सुझावों को मानता भी है.'
हार्दिक के इंजरी के बाद भारतीय टीम में ना आने का एक कारण ये भी बताया जाता है कि वो बहुत ज़्यादा गेंदबाज़ी नहीं कर पा रहे थे. कोच जीतूभाई ने उनके साथ इस साल की शुरुआत के एक सेशन के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा,
ऑस्ट्रेलिया दौरे से लौटने पर क्या हुआ?'एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि मुझे ये कहना ही पड़ा, बस बहुत हुआ, मैं तुम्हारी बॉलिंग के खिलाफ बैटिंग करूंगा. वो तैयार हो गया लेकिन उसने बाउंसर्स फेंकने से इन्कार कर दिया. मुझे लगा कि उसे लगा होगा कि वो मुझे आसानी से आउट कर लेगा. मैंने भी तय कर लिया मैं इसे मारूंगा. इत्तेफाक से उस दिन मुझ से गेंद कनेक्ट भी हो गई. जैसे-जैसे वक्त बीत रहा था वो गुस्सा होता चला गया. अचानक से उसने मुझे बाउंसर मारकर हैरान कर दिया. मैंने उसे फिर मारा, उसने एक और बाउंसर मारी.
फिर मैंने उससे कहा, 'अरे तूने तो कहा था कि तू बाउंसर नहीं मारेगा लेकिन तू मार खा रहा है इसलिए तू उस चीज़ को ले नहीं पा रहा. मैं सिर्फ तुझे इतना ही दिखाना चाहता हूं कि तुझे अपनी गेंदबाज़ी पर कड़ी मेहनत करने की ज़रूरत है. तेरा काम अभी पूरा नहीं हुआ है.' वो समझ गया. हाल में ही उसने मुझे वो नेट सेशन का वीडियो फिर से दिखाया और हम दोनों खूब हंसे.'
जब कॉफी विद करन वाले प्रकरण के बाद हार्दिक पंड्या को ऑस्ट्रेलिया दौरे से वापस घर भेज दिया गया, तब सुबह के 7:30 बजे कोच जितेंद्र उनके घर पहुंचे. उन्होंने देखा कि पंड्या सोफे पर सन-ग्लास लगाए बैठे हैं. कोच ने घर में पूछा कि क्या ये पूरी रात सोया नहीं है?
फिर उन्होंने पंड्या से कहा,
'टेंशन नहीं लेना है. तू बहुत जल्द फिर से इंडिया के लिए खेलेगा. जो हो गया वो हो गया. अब उस बारे में सोचने का कोई मतलब नहीं है. कल रिलायंस स्टेडियम आ जा.'
इसके बाद अगले ही दिन कोच जितेंद्र ने एक बैडमिंटन कोर्ट बुक किया. उन्होंने कहा,
'मैंने बेडमिंटन कोर्ट सिर्फ इसलिए बुक किया. जिससे कि उसमें मुकाबले की भावना फिर से पैदा हो और खेल का वो मज़ा वो फिर से महसूस कर सके. मैं चाहता था वो पसीना बहाए. और ऐसा ही हुआ, उसको एहसास हो गया कि वो एक स्पोर्ट्समैन है और इसीलिए उसका जन्म हुआ है. किसी चैट शो के लिए नहीं.'
जितेंद्र उर्फ़ जीतूभाई की बातों से ये साफ है कि हार्दिक ने वापसी के लिए कड़ा संघर्ष किया है. खुद हार्दिक ने भी गुजरात टाइटंस के एक वीडियो में कहा था,
'मेरी पूरी ज़िन्दगी में बहुत सारे लोगों ने मुझ पर सवालिया निशान खड़े किए हैं. बिल्कुल ऐसा ही ऑक्शन, मेरे रिटेंशन और यहां तक की मेरी कप्तानी को लेकर भी है. इन सब चीज़ों को सबसे सही जवाब देने का तरीका यही है कि कोई जवाब ना दिया जाए. जिन भी लोगों ने मेरे बारे में जो कुछ भी कहा. मुझे उन्हें इसे वापस लेने के लिए कहने की ज़रूरत नहीं है. मुझे लगता है कि वो खुद ही इसे वापस ले लेंगे.'
गुजरात को पहले साल में ही खिताब जिताकर हार्दिक पंड्या की बात बिल्कुल सही साबित होती दिख रही है.
हार्दिक पंड्या ने बताया मिलर से क्या कहा था?

