वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का मारक हथियार है ये लड़की
तेज गेंदों को बाउंड्री पार पहुंचाने में महारथ हासिल है इन्हें.
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फोटो - thelallantop
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क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है. सिर्फ खेल ही नहीं, उसमें करियर भी उतना ही अनिश्चित होता है. कई खिलाड़ी अपने टैलेंट और किस्मत की बदौलत टीम में तो आ जाते हैं लेकिन ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाते. मेंस टीम से तो इस केटेगरी में ढेरों नाम याद होंगे, लेकिन महिला टीम से कोई विरला ही नाम याद आएगा. लेकिन यहां बात गुमनाम हो जाने वाले खिलाड़ियों की नहीं बल्कि अपनी असफलताओं से सीख लेकर वापस उसी फील्ड में कदम ज़माने वालों की हो रही है. ऐसा ही एक नाम है वर्ल्ड कप खेलने गई भारतीय महिला क्रिकेट टीम की बल्लेबाज पूनम राउत का.
क्रिकेट की शुरुआत
क्रिकेट से उसके लगाव को देखकर घरवालों को लगने लगा था कि अगर इसे कुछ करना होगा तो ये क्रिकेट में ही करेगी. इसी अरमान के लिए पापा ने बोरिवली के एक स्पोर्ट्स क्लब में एडमिशन करवा दिया. वहां कोच संजय गायतोंडे की ट्रेनिंग में पूनम क्रिकेट के गुर सीखने लगी. लड़कों के साथ क्रिकेट खेलती इस लड़की को क्रिकेट के दांव-पेंच सीखने में ज्यादा वक़्त नहीं लगा. लेकिन पैसे के अलावा भी एक समस्या थी. वो ये कि उसे लड़कों के साथ खेलने के चलते तेज़ गेंद खेलने की आदत पड़ चुकी थी लेकिन लड़कियां धीमी गेंद फेंक रही थी और पूनम को इन्हें खेलने में दिक्क्त हो रही थी. इससे निजात पाने के लिए पूनम को अपना बैटिंग स्टाइल चेंज करना पड़ा.

मुंबई के बोरिवली में क्रिकेट के गुर सीखे हैं पूनम ने
पहला मौका
पूनम को अपना टैलेंट दिखाने का पहला मौका मिला उसके क्लब के ही मैच में जो कि लड़कों की टीम के खिलाफ था. इस मैच में पूनम ने 68 रनों की मैच जिताऊ पारी खेलकर सबका ध्यान खींचा. ये सिर्फ एक पारी नहीं थी बल्कि खुद को एक बल्लेबाज के रूप में स्थापित करने की ओर पहला कदम भी था. मतलब लेवल 1 क्लियर हो चुका था. अगले स्टेप में पूनम मुंबई की स्टेट टीम में आ गई. यहां भी उनके बल्ले ने रन बरसाना ज़ारी रखा.

इंटरनेशनल डेब्यू
अब जद्दोजहद थी इंडियन टीम में जगह बनाने की. इसके लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी. पूनम लगातार अपने खेल पर काम करती रही और उनके बल्ले की गूंज इंडियन सेलेक्टर्स तक भी पहुंची. साल 2009 में उन्हें इंडियन टीम के वर्ल्ड कप स्क्वैड में शामिल कर लिया गया. हालांकि वो वर्ल्ड कप उनके लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा था. पूरे वर्ल्ड कप में उन्हें 6 मैचों में खेलने का मौका मिला जिसमें उनका बेस्ट स्कोर 22 रन था. उनके इस प्रदर्शन के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया.

टीम इंडिया ने 2017 वर्ल्ड कप में अब तक अच्छा परफॉर्म किया है
मिशन कमबैक
पूनम ने हार मानना तो कभी सीखा ही नहीं था. सो वापस लग गईं. उनके जानने वाले बताते हैं कि टीम से निकलने के बाद शायद ही कोई ऐसा दिन था जब पूनम बोरिवली के उस मैदान में नज़र नहीं आई हों जहां से उन्होंने शुरुआत की थी. सुबह से शाम तक वो उसी मैदान में पसीना बहाते दिखती थीं. उनकी इस जीतोड़ मेहनत को रंग तो लाना ही था. अब मौका था उनकी वापसी का जो उन्होंने बड़ी बेहतर तरीके से किया. इंग्लैंड दौरे से लेकर 2013 वर्ल्ड कप में उनका प्रदर्शन ठीक-ठाक रहा था. लेकिन बुरी किस्मत भी उनका पीछा छोड़ने को तैयार नहीं थी और 2016 में उन्हें एक बार फिर टीम से बाहर कर दिया गया जिसके कारण वो 2016 का T-20 वर्ल्ड कप भी नहीं खेल सकीं.

अपनी कप्तान के साथ पूनम
उन्होंने अपनी तैयारी ज़ारी रखी और घरेलू सीजन में रेलवे की ओर से खेलते हुए 7 मैचों में 68.50 की औसत से 273 रन बनाए. इसके बावजूद उन्हें श्रीलंका में होने वाले वर्ल्ड कप क्वालीफ़ायर के लिए टीम में जगह नहीं मिली. लेकिन पूनम भी कहां हार मानने वाली थीं. जोनल टूर्नामेंट में खेलते हुए उन्होंने 2 शतक सहित 4 मैचों में 86 की औसत से 346 रन ठोंक दिए. अब उनके प्रदर्शन को इग्नोर करना मुश्किल था. और उन्हें टीम में वापस चुन लिया गया. अपने चुनाव को सही साबित करते हुए उन्होंने दीप्ति शर्मा के साथ आयरलैंड के खिलाफ रिकॉर्डतोड़ 320 रनों की ओपनिंग साझेदारी कर बता दिया कि उनके टैलेंट में कोई कमी नहीं है. उनके इस प्रदर्शन के बाद उन्हें कमबैक क्वीन मानने में किसी को कोई गुरेज नहीं होना चाहिए.

320 रन की पार्टनरशिप के दौरान दीप्ति शर्मा के साथ पूनम
वर्ल्ड कप में अब तक प्रदर्शन
इंग्लैंड में हो रहे वर्ल्ड कप में भी उनका प्रदर्शन अब तक अच्छा रहा है जहां उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 86 रनों की पारी खेली, वहीं वेस्ट इंडीज के खिलाफ 47 रन बनाए हैं. उन्होंने अबतक वर्ल्ड कप के 4 मैचों में 149 रन बनाए हैं.
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क्रिकेट की शुरुआत
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मुंबई के बोरिवली में क्रिकेट के गुर सीखे हैं पूनम ने
पहला मौका
पूनम को अपना टैलेंट दिखाने का पहला मौका मिला उसके क्लब के ही मैच में जो कि लड़कों की टीम के खिलाफ था. इस मैच में पूनम ने 68 रनों की मैच जिताऊ पारी खेलकर सबका ध्यान खींचा. ये सिर्फ एक पारी नहीं थी बल्कि खुद को एक बल्लेबाज के रूप में स्थापित करने की ओर पहला कदम भी था. मतलब लेवल 1 क्लियर हो चुका था. अगले स्टेप में पूनम मुंबई की स्टेट टीम में आ गई. यहां भी उनके बल्ले ने रन बरसाना ज़ारी रखा.

इंटरनेशनल डेब्यू
अब जद्दोजहद थी इंडियन टीम में जगह बनाने की. इसके लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी. पूनम लगातार अपने खेल पर काम करती रही और उनके बल्ले की गूंज इंडियन सेलेक्टर्स तक भी पहुंची. साल 2009 में उन्हें इंडियन टीम के वर्ल्ड कप स्क्वैड में शामिल कर लिया गया. हालांकि वो वर्ल्ड कप उनके लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा था. पूरे वर्ल्ड कप में उन्हें 6 मैचों में खेलने का मौका मिला जिसमें उनका बेस्ट स्कोर 22 रन था. उनके इस प्रदर्शन के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया.

टीम इंडिया ने 2017 वर्ल्ड कप में अब तक अच्छा परफॉर्म किया है
मिशन कमबैक
पूनम ने हार मानना तो कभी सीखा ही नहीं था. सो वापस लग गईं. उनके जानने वाले बताते हैं कि टीम से निकलने के बाद शायद ही कोई ऐसा दिन था जब पूनम बोरिवली के उस मैदान में नज़र नहीं आई हों जहां से उन्होंने शुरुआत की थी. सुबह से शाम तक वो उसी मैदान में पसीना बहाते दिखती थीं. उनकी इस जीतोड़ मेहनत को रंग तो लाना ही था. अब मौका था उनकी वापसी का जो उन्होंने बड़ी बेहतर तरीके से किया. इंग्लैंड दौरे से लेकर 2013 वर्ल्ड कप में उनका प्रदर्शन ठीक-ठाक रहा था. लेकिन बुरी किस्मत भी उनका पीछा छोड़ने को तैयार नहीं थी और 2016 में उन्हें एक बार फिर टीम से बाहर कर दिया गया जिसके कारण वो 2016 का T-20 वर्ल्ड कप भी नहीं खेल सकीं.

अपनी कप्तान के साथ पूनम
उन्होंने अपनी तैयारी ज़ारी रखी और घरेलू सीजन में रेलवे की ओर से खेलते हुए 7 मैचों में 68.50 की औसत से 273 रन बनाए. इसके बावजूद उन्हें श्रीलंका में होने वाले वर्ल्ड कप क्वालीफ़ायर के लिए टीम में जगह नहीं मिली. लेकिन पूनम भी कहां हार मानने वाली थीं. जोनल टूर्नामेंट में खेलते हुए उन्होंने 2 शतक सहित 4 मैचों में 86 की औसत से 346 रन ठोंक दिए. अब उनके प्रदर्शन को इग्नोर करना मुश्किल था. और उन्हें टीम में वापस चुन लिया गया. अपने चुनाव को सही साबित करते हुए उन्होंने दीप्ति शर्मा के साथ आयरलैंड के खिलाफ रिकॉर्डतोड़ 320 रनों की ओपनिंग साझेदारी कर बता दिया कि उनके टैलेंट में कोई कमी नहीं है. उनके इस प्रदर्शन के बाद उन्हें कमबैक क्वीन मानने में किसी को कोई गुरेज नहीं होना चाहिए.

320 रन की पार्टनरशिप के दौरान दीप्ति शर्मा के साथ पूनम
वर्ल्ड कप में अब तक प्रदर्शन
इंग्लैंड में हो रहे वर्ल्ड कप में भी उनका प्रदर्शन अब तक अच्छा रहा है जहां उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 86 रनों की पारी खेली, वहीं वेस्ट इंडीज के खिलाफ 47 रन बनाए हैं. उन्होंने अबतक वर्ल्ड कप के 4 मैचों में 149 रन बनाए हैं.
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