हम क्रिकेट के जेट युग में हैं. धूम-धड़ाका क्रिकेट. 31 गेंद पर सेंचुरी बनती है,12 पर हाफ सेंचुरी. मैदान पर चौके-छक्कों की भयंकर आंधी चलती है. अपर कट,हैलीकॉप्टर शॉट, दिल स्कूप, रिवर्स स्वीप जैसे न जाने कितने किस्म के नए शॉट इजादहो गए हैं इस T20 क्रिकेट के दौर में. वनडे में 400 प्लस के स्कोर बनते हैं, और फिरचेज़ भी हो जाते हैं.इस बीच कोई बताए कि एक ऐसा वनडे मैच हुआ, जिसमें जो बल्लेबाज़ ओपनिंग पर उतरा, वोआखिर तक नॉट आउट खेलता रहा. रन बनाए फिर भी 36. विश्वास नहीं होगा. लेकिन यहकारनामा हुआ था आज ही के दिन, 7 जून 1975 को इंग्लैंड में. 174 बॉल खेलने के बाद भीबैट्समैन के नाम के आगे सिर्फ 36 रन टंगे थे. प्लेयर भी ऐसा, जिसने आगे जाकर टेस्टमें सबसे ज्यादा शतकों का रिकॉर्ड बनाया. लेकिन 1975 की उस 'यादगार' इनिंग को वोकभी याद नहीं रखना चाहेगा.वो पहले विश्व कप का सबसे पहला मैच था. शनिवार का दिन. आमने सामने टीमें थीं भारतऔर इंग्लैंड की. मैदान क्रिकेट का मक्का− लार्ड्स. उन दिनों विश्व कप क्या पूरेवनडे क्रिकेट का आइडिया ही क्रिकेटरों के लिए नई चीज़ थी. चार ही साल तो हुए थे, जबएक प्रयोग के तौर पर खेला गया इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया वनडे मैच दर्शकों में गज़बलोकप्रिय हुआ था. वहीं से विश्व कप का आइडिया निकला. उन दिनों वनडे 60 ओवर के हुआकरते थे. तो 7 जून के इस मैच में इंग्लैंड पहले खेलने उतरा और 60 ओवर में 334 कास्कोर बनाया.इंग्लैंड की तरफ से डेनिस एमिस ने 147 बॉल खेलकर 137 रन बनाए. स्ट्राइक रेट था93.19. उस ज़माने के हिसाब यह बहुत अच्छी स्ट्राइक रेट थी. जवाब में भारत के लिएसुनील गावस्कर ओपनिंग पर उतरे. गावस्कर पूरे 60 ओवर तक मैदान पर रहे और 174 बॉल कासामना किया. लेकिन एक चौके की मदद से रन बनाए केवल 36.ये क्या हुआ, कैसे हुआ. पूरा क्रिकेट वर्ल्ड हक्का-बक्का था. उस मैच में अंशुमनगायकवाड़ भी खेल रहे थे. मैच में टीम के माहौल को याद करते हुए वे कहते हैं कि पूरीटीम के खिलाड़ियों को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था. सभी हैरानी में थे कि गावस्कर जैसादिग्गज बल्लेबाज ऐसी बल्लेबाजी कैसे कर सकता है. खुद सुनील गावस्कर ने अपनी आत्मकथा'सनी डेज' में कबूला है कि वह पारी उनके क्रिकेट करियर की सबसे घटिया पारी थी. भारतकी टीम वो मैच 202 रन से हारी थी.174 गेंदों में 36 रन मारे थे सुनील गावस्कर ने.आश्चर्य ये था कि गावस्कर इस दौरान आउट भी नहीं हुए. वैसे मैच में उनकी इस धीमीपारी के पीछे बतानेवालों ने कई अलग-अलग वजहें बताईं −1. वनडे क्रिकेट में उस समय 300 का स्कोर जीत की गारंटी माना जाता था. ऐसे में हारतो भारत अपनी पारी शुरु होने के पहले ही मान चुका था. लेकिन उस विश्वकप का ढांचाकुछ ऐसा था कि दो टीमों के बराबर रहने पर बेहतर नेट रन रेट वाली टीम आगे जाएगी. ऑलआउट होने से भारत को नेट रन रेट का नुकसान हो सकता था, इसलिए गावस्कर रन ना बनने केबाद भी मैदान पर डटे रहे.2. दूसरी उड़ती हुई अफवाह ये थी कि गावस्कर टीम के चयन से नाखुश थे. वर्ल्ड कप केलिए सेलेक्शन टीम ने फ़ास्ट बोलर्स की जगह स्पिनरों को मौका दिया था. यही गावस्कर कीनाराजगी की वजह थी. क्योंकि पिछले इंग्लैंड दौरे में स्पिनर्स बुरी तरह फ्लॉप रहेथे, और वैसे भी इंग्लैंड में सीजन के पहले हिस्से में स्पिनर्स कम ही चलते हैं.3. अफ़वाह तो ये भी थी कि गावस्कर विश्व कप के लिए वेंकटराघवन के कप्तान चुने जानेसे गुस्सा थे.4.गावस्कर को खास 'टेस्ट क्रिकेट' के लिए बना आदर्श ओपनर गिना जा सकता है. उनकीविकेट पर टिकने की क्षमता और तेज़ गेंदबाज़ी को खेलने की काबिलियत इसकी गवाही देतीथी. ऐसे में कई टेस्ट क्रिकेट को चाहनेवाले तो ये भी मानते हैं कि गावस्कर यह पारीअपने प्यारे टेस्ट क्रिकेट की ओर से, और नए फॉर्मेट वनडे क्रिकेट के विरोध में खेलरहे थे.1975 में गावस्कर का यह पहला वनडे मैच था.लेकिन ऐसा कुछ था नहीं. खुद गावस्कर ने बाद में कहा था,मैंने कई बार स्टंप इस तरह छोड़े कि मैं बोल्ड हो जाऊँ. यही एक तरीका था, जिससे मैंउस समय के मेंटल प्रेशर से बच सकता था, लेकिन मैं रन नहीं बना पा रहा था और न हीआउट हो पा रहा था. मेरी स्थिति एक मशीन जैसी थी जो सिर्फ चल रही थी.वैसे इसे दिलचस्प संयोग ही कहा जाएगा कि अपने पहले वर्ल्डकप में नाबाद 36 रन कीधीमी इनिंग खेलने वाले गावस्कर ने अपने आखिरी वर्ल्डकप में नाबाद 103 रन कीविस्फोटक पारी खेली. 1987 का यह वर्ल्डकप भारत में हुआ था और गावस्कर का आखिरीवर्ल्डकप था. गावस्कर ने अपने 108 मैच लम्बे वनडे करियर का अंतिम वनडे 5 नवंबर 1987को मुंबई में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था.--------------------------------------------------------------------------------इस स्टोरी के लिए रिसर्च 'दी लल्लनटॉप' के साथ इंटर्नशिप कर रहे रमन जायसवाल ने कीहै--------------------------------------------------------------------------------ALSO READजिस ज़माने में ऑस्ट्रेलिया दबंग थी, इस फास्ट बॉलर ने उसके नाक में नकेल डाल रखीथीरोहित शर्मा ने बताया - क्यों वो एक बार जडेजा को मुक्का मारते-मारते रह गए थेजब 140 साल के क्रिकेट इतिहास का ये सबसे खराब रिकॉर्ड इंडिया के नाम हुआवीडियो भी देखें: