इंडिया-ऑस्ट्रेलिया के मैच में ट्रैकिंग सिस्टम बॉल को कहीं का कहीं दिखाने लगा
जानिये इससे कितना बड़ा हेर-फेर हो सकता था.
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फोटो - thelallantop
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एक प्रेस कांफ्रेंस हुई थी जिसमें लगभग खीजे हुए महेंद्र सिंह धोनी ने समझाया था कि वो DRS को क्यूं 100% फूल प्रूफ नहीं मानते हैं. उन्होंने कहा था कि अगर किसी तकनीक से डिसीज़न 100% सही नहीं मिल रहा है तो फिर उससे इंसानी गलतियों को किस मुंह से ठीक करवाया जाएगा? यही वजह थी कि धोनी ने अपनी कप्तानी में DRS के इस्तेमाल के लिए कभी भी रज़ामंदी नहीं दी.
इंडिया और ऑस्ट्रेलिया के बीच रांची में खेले जा रहे तीसरे वन-डे इंटरनेशनल मैच में एक बार फिर से DRS की बहुत बड़ी खामी सामने आई. इस मैच में एरॉन फ़िंच शानदार बैटिंग कर रहे थे. इनिंग्स के 32वें ओवर में कुलदीप यादव बॉलिंग करने के लिए आये. ओवर की पांचवीं गेंद पर एक ज़ोरदार अपील हुई और अम्पायर ने फ़िंच को एलबीडब्लू आउट दे दिया. फ़िंच ने कुछ बातचीत के बाद अम्पायर के फ़ैसले को रिव्यू करने का फ़ैसला लिया. मामला जब टीवी अम्पायर के पास पहुंचा तो रीप्ले में पहले तो असली गेंद गिरती हुई दिखाई गई. मालूम पड़ा कि गेंद मिडल स्टंप की लाइन में पड़ी थी.
लेकिन इसी के बाद सारी गड़बड़ी शुरू हुई. जैसे ही बॉल ट्रैकिंग चलाया गया. गेंद का टप्पा खिसक कर थोड़ा सा दाहिने चला गया और वो लेग स्टंप की लाइन में गिरती हुई दिखाई दे रही थी. गनीमत यही थी कि गेंद जाकर स्टंप में लगती हुई दिखाई दी. अगर गेंद लेग स्टंप की बजाय थोड़ा भी और बाहर की ओर गिरती दिखाई पड़ती तो फ़ैसला ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में चला जाता. ऐसे में एक बार फिर से DRS की सटीकता पर सवाल खड़े हुए.

लेकिन इसी के बाद सारी गड़बड़ी शुरू हुई. जैसे ही बॉल ट्रैकिंग चलाया गया. गेंद का टप्पा खिसक कर थोड़ा सा दाहिने चला गया और वो लेग स्टंप की लाइन में गिरती हुई दिखाई दे रही थी. गनीमत यही थी कि गेंद जाकर स्टंप में लगती हुई दिखाई दी. अगर गेंद लेग स्टंप की बजाय थोड़ा भी और बाहर की ओर गिरती दिखाई पड़ती तो फ़ैसला ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में चला जाता. ऐसे में एक बार फिर से DRS की सटीकता पर सवाल खड़े हुए.


