अपने घर में खेलने का मज़ा ही अलग होता है. क्रिकेट खिलाड़ियों को अपनापन तो हर जगहमिलता है लेकिन जिस शहर में आपकी क्रिकेट की सुबह होती है वहां के लोगों के सामनेखेलना अलग एहसास देता है. धोनी आज शायद आखिरी बार अपने शहर रांची में खेल रहे हैं.अगले कुछ महीनों का शेड्युल टेस्ट मैचों से भरा है. रांची भी एक टेस्ट मैच कीमेज़बानी करेगा. पर धोनी तो सिर्फ वनडे और टी20 खेलते हैं. अगले साल इंग्लैंड मेंचैंपियंस ट्रॉफी से पहले भारत को इंग्लैंड के खिलाफ 3 वनडे और 3 टी 20 खेलने हैंबस. धोनी इन मैचों में दिखेंगे. जिन लोगों को धोनी के हेलीकॉप्टर देखने की आदत सीहो गई वो अभी भी यकीन नहीं कर पा रहे होंगे की धोनी अपने कैरियर के निर्णायक मोड़पर हैं और धोनी को खेलते हुए 11 साल हो गए हैं. ये सब कल की सी बात लगती है. आजनहीं तो कल धोनी की जगह विराट कप्तान होने ही वाले हैं. जानने वाले बताते हैं किधोनी 2019 वर्ल्ड कप के लिए खूब मेहनत कर रहे हैं. पर धोनी ने टेस्ट में संयास लियाथा वैसे ही वनडे में कभी भी चौंका सकते हैं.धोनी जब कभी अपने शहर आते हैं तो दोस्तों- जान पहचान वाले लोगों से मिलने का मौकानहीं मिलता. इससे पहले कि लोग पहचान पाएं धोनी है वो अपनी बाइक पर अगली लाल बत्तीपर पहुंच जाते हैं. लेकिन रांची शहर को खुश करने का उनका अपना तरीका-ए-कार है. 2013में रांची में खेले गए पहले वनडे में इंग्लैंड ने स्कोर ही 155 रन बनाया था तो धोनीइतना खेल नहीं दिखा सके, फिर भी 5वें नंबर आकर 10 रन बनाकर जनता को खुश कर दिया, इन10 रनों में धोनी के बल्ले से निकला जीत का चौका भी था. उसी साल रांची में दूसरावनडे हुआ ऑस्ट्रेलिया के साथ लेकिन उस ड्रॉ मैच में धोनी की बैटिंग ही नहीं आई.2014 में रांची के तीसरे वनडे में श्रीलंका के खिलाफ धोनी थे ही नहीं. फरवरी 2016में श्रीलंका के खिलफ टी 20 मैच में तब आए जब सिर्फ 1 ओवर बचा था. रांची में अब तकधोनी ने कुल 17 गेंदे ही खेली हैं. आज उन सबकी भरपाई करने का मौका है. धोनी अपनेहॉम ग्राउंड पर आखिरी बार उतरेंगे तो नंबर 4 पर उतरेंगे.इधर रांची में सिर्फ एक लड़के की कामयाबी के दम पर क्रिकेट मैच एक सालाना उत्सव होगया है. विपक्ष के झारखंड बंद बुलाने के बावजूद हवाई अड्डे भारतीय टीम के स्वागत केलिए भीड़ टूटकर पड़ी थी. रांची का जेएसकेए स्टेडियम 39000 लोगों से खचाखच भरा होगा.धोनी से आम जनता की एक ही मांग है ‘बस एक छक्का चाहिए.’ धोनी के ख़जाने में अभीछक्कों की कमी नहीं है और अपने घर के लिए तो कभी नहीं. सचिन जैसी विदाई बहुत कमलोगों को मिल पाती है पर कौन जाने कि रांची की जनता और धोनी भी इतने खुशकिस्मत होंकि धोनी का आखिरी मैच भी फिर कभी रांची में हो जावे.