70 साल, 12 टेस्ट और एक जीत...सिडनी में ऐसा है टीम इंडिया का इतिहास
विजय हज़ारे से कुलदीप यादव तक भारतीय स्पिनर्स का कमाल.
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टीम इंडिया और सिडनी क्रिकेट ग्राउंड. फोटो: AP
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सिडनी क्रिकेट मैदान. ऑस्ट्रेलिया का वो मैदान जिसकी पिच देखते ही एशियाई टीमों की आंखें चमक जाती है. वजह यहां की स्पिन फ्रेंडली विकेट. इस मैदान पर स्पिनर्स ने हमेशा अपना कमाल दिखाया है. फिर चाहें वो शेन वॉर्न हों या फिर अनिल कुंबले. भगवत चंद्रशेखर हों या फिर कुलदीप यादव. इन सभी ने जब भी इस मैदान पर गेंद घुमाई तो सामने वाली टीम फंस गई.
वैसे तो इंडियन टीम स्पिनर्स के लिए जानी जाती है. लेकिन SCG का ज्यादा फायदा ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर शेन वॉर्न ने उठाया है. वॉर्न ने इस मैदान पर 64 विकेट चटकाए हैं. वहीं ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर स्टुअर्ट मैकगिल ने भी 53 विकेट अपने नाम किए है.
इस विकेट पर इंडियन स्पिनर्स ने भी कई शानदार स्पेल्स फेंके. लेकिन इन सब के बावजूद 70 साल के इतिहास में टीम इंडिया यहां सिर्फ एक ही मुकाबला जीत पाई.
भारत ने इस मैदान पर अब तक 12 टेस्ट मैच खेले हैं. लेकिन उसे सिर्फ एक बार ही जीत मिली है. वो भी 42 साल पहले साल 1978 में. चलिए आपको बताते हैं 1948 से 2019 के बीच सिडनी में खेले गए 12 टेस्ट मैचों में भारत ने क्या किया.? सिडनी में टीम इंडिया के 12 टेस्ट: IND vs AUS 12-18 दिसंबर 1947: आज़ाद भारत पहली बार ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गया. सन डॉन ब्रैडमेन वाली लाइनअप के आगे भारत के पास बहुत कुछ नहीं था. सीरीज़ का दूसरा मैच सिडनी में खेला गया. पूरे टेस्ट में खूब बारिश हुई और मैच में सिर्फ 153.2 ओवर फेंके जा सके. भारतीय टीम की पहली पारी 188 रन पर सिमट गई. लेकिन इसके बाद टीम इंडिया ने तगड़ा उलटफेर कर दिया. टीम इंडिया ने मेज़बान ऑस्ट्रेलिया को 107 रन पर ढेर कर दिया.
इसमें सबसे कमाल का काम किया विजय हज़ारे ने. हज़ारे ने पारी में सिर्फ 29 रन देकर चार विकेट चटकाए. वो भी सर डॉन ब्रैडमेन समेत हेसेट, लिंडवॉल और टेलॉन के.
ये मुकाबला ड्रॉ पर खत्म हुआ. लेकिन भारत के खेल की हर तरफ तारीफ हुई. IND vs AUS 26-31 दिसंबर 1968: पहले दौरे के 21 साल बाद भारतीय टीम फिर से सिडनी पहुंची. अब तक टीम इंडिया की फैब फोर स्पिन चौकड़ी में से बिशन सिंह बेदी और इरापल्ली प्रसन्ना टीम इंडिया में पहुंच गए थे. दोनों ने मैच में 10 विकेट चटकाए. प्रसन्ना ने दोनों पारियों में सात विकेट और बेदी ने तीन विकेट अपने नाम किए. लेकिन बल्लेबाज़ी बिखरी और भारत इस मैच को 144 रन से हार गया. IND vs AUS 7-12 जनवरी 1978: 10 साल बाद टीम इंडिया स्पिन ताकत बनकर सिडनी पहुंची. इस दशक में हम एक नई टीम थे. जिसने अब विदेशों में भी जीत दर्ज करनी शुरू कर दी थी. इंग्लैंड को और वेस्टइंडीज़ को हरा चुके थे. ऑस्ट्रेलिया को हराने के लिए बेकरार थे.

भगवत चंद्रशेखर. फोटो: Getty Images
7 जनवरी के दिन सिडनी में ऐतिहासिक टेस्ट शुरू हुआ. पहली बार भारत सिडनी में जीत दर्ज करने वाला था. इस मुकाबले में चंद्रशेखर ने छह, बिशन सिंह बेदी और इरापल्ली प्रसन्ना ने 5-5 विकेट चटकाए और ऑस्ट्रेलियन बैटिंग को पूरी तरह से ढेर कर दिया.
ऑस्ट्रेलियाई टीम भारतीय स्पिन बॉलिंग के आगे पहली पारी में 131 और दूसरी पारी में 263 रन ही बना सका. भारत ने बल्लेबाज़ी में भी कमाल दिखाया और 396 रन बना दिए. इस मुकाबले को टीम इंडिया ने पारी और दो रन से जीत सिडनी का किला फतेह किया. IND vs AUS 2-4 जनवरी 1981: 1981 में भारत एक बार फिर सिडनी पहुंचा. लेकिन इस बार ग्रेग चैपल के दोहरे शतक और डेनिस लिली और पोसको की गेंदबाज़ी के आगे भारत पारी और चार रन से हार गया. भारत को इस दौरे पर बेदी, प्रसन्ना, चंद्रशेखर की बहुत कमी खली.
1986 और 1992 में भारतीय टीम के लिए शिवलाल यादव और रवि शास्त्री ने गेंदबाज़ी में मोर्चा संभाला लेकिन मैच जिता नहीं पाए. 1986 और 1992 दोनों दौरों पर सिडनी टेस्ट ड्रॉ पर खत्म हुआ. IND vs AUS 2-4 जनवरी 2000: साल 2000 तक क्रिकेट पूरी तरह से बदल चुका था. भारत को अनिल कुंबले और सचिन तेंडुलकर के रूप में नए लीजेंड्स मिल चुके थे. भारतीय टीम फिर से सिडनी में खेलने पहुंची. 1978 की वो जीत अब 22 साल पुरानी हो चली थी. लेकिन इस बार जस्टिन लैंगर और रिकी पोन्टिंग की जोड़ी ने सचिन की कप्तानी वाली टीम को बुरी तरह से रौंद दिया.

शेन वॉर्न और सचिन तेंडुलकर. फोटो: Getty Images
इस मैच में न तो अनिल कुंबले को और न ही ऑस्ट्रेलियन लीजेंड शेन वॉर्न को एक भी विकेट मिला. सिडनी की जिस विकेट पर बेदी और प्रसन्ना ने झंडे गाड़े थे. वहां अब कुंबले और वॉर्न की नहीं चल रही थी. पहली बार सिडनी की विकेट पर स्पिनर्स की ऐसी दुर्गती होती दिखी. ऑस्ट्रेलियन बल्लेबाज़ों की मदद से मेज़बान ने इस मैच को पारी और 141 रनों से जीत लिया. IND vs AUS 2-6 जनवरी 2004: 2000 की सीरीज़ के बाद 2001 में भारत में ऐतिहासिक ऑस्ट्रेलिया के साथ सीरीज़ खेली गई. जी हां, वही ईडन गार्डन्स वाली. इस सीरीज़ का असर 2004 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी दिखा. 2-6 जनवरी के बीच सिडनी में खेले गए मुकाबले में भारत ने 705 रन बना दिए.
ऑस्ट्रेलियन स्पिनर्स एक बार फिर सिडनी में विकेट के लिए तरसते दिखे. लेकिन इस बार अनिल कुंबले को कोई दिक्कत नहीं थी. उन्होंने शानदार कमाल कर दिया. ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में आठ विकेट चटकाकर उन्होंने ऑस्ट्रेलियन टीम को फंसा दिया.
भारत ने इस मैच में ऑस्ट्रेलिया को 442 रनों का लक्ष्य दिया. चौथी पारी में कुंबले ने फिर से ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों को परेशान किया और चार विकेट चटकाए. लेकिन स्टीव वॉ ने ऑस्ट्रेलिया के लिए इस मैच को बचा लिया. भारत ने 2004 के इस सुनहरे मौके को गंवा दिया. ये मैच ड्रॉ पर खत्म हुआ. IND vs AUS 2-6 जनवरी 2008: 2008 के सबसे विवादास्पद ऑस्ट्रेलियन दौरे पर खेले गए सिडनी टेस्ट को कोई भी क्रिकेट फैन नहीं भुला सकता. सिडनी में ही मंकीगेट विवाद हुआ. जिसने बाद में बड़े विवाद का रूप ले लिया.

हरभजन सिंह और एंड्र्यू सायमंड्स. फोटो: Getty Images
खैर आज बात खेल की होगी. इस मुकाबले की पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया ने 463 रन बनाए. भारत के लिए छह विकेट अकेले अनिल कुंबले और हरभजन सिंह की जोड़ी ने निकाल दिए. भारत ने भी पहली पारी में सचिन और लक्ष्मण के शतकों से करारा जवाब दिया. टीम इंडिया ने बोर्ड पर 532 रन टांगे. ऑस्ट्रेलियन स्पिनर ब्रैड हॉग को दो विकेट मिले लेकिन वो कुंबले और भज्जी जितने कामयाब नहीं हुए.
दूसरी पारी में फिर से सात में से छह विकेट अकेले कुंबले और भज्जी की जोड़ी ने निकाले. लेकिन ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 401 रन बना लिए.
चौथी पारी में कुछ खराब अंपायरिंग और कुछ सायमंड्स और क्लार्क के स्पेल ने भारत को मैच में मात दे दी. टीम इंडिया ने इस विवादित मैच को 122 रन से गंवाया. IND vs AUS 3-6 जनवरी 2012: साल 2012 में एक बार फिर से टीम इंडिया जीत की उम्मीद के साथ सिडनी पहुंची. लेकिन इस बार भी यहां पर ऐसी विकेट मिली की हमारे स्पिनर्स बुरी तरह से परेशानी में दिखे. भारत के 191 रनों के जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने बोर्ड पर 659 रन टांग दिए. भारतीय स्पिनर अश्विन ने 44, सहवाग ने 23 ओवर फेंके लेकिन एक भी विकेट इनके नाम नहीं हुआ. भारत दूसरी पारी में 400 रन ही बना सका और मैच को पारी और 68 रनों से हार गया. IND vs AUS 6-10 जनवरी 2015: 2015 में विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने सिडनी टेस्ट खेला. विराट की कप्तानी में ये पहला टेस्ट भी था. लेकिन इस मैच में भी भारत को जीत नसीब नहीं हुई. कप्तान विराट के शतक से ये मैच ड्रॉ पर खत्म हुआ.
भारतीय स्पिनर रविचन्द्रन अश्विन ने दूसरी पारी में तो चार विकेट निकाले लेकिन पहली पारी में उन्हें सिर्फ एक ही विकेट मिला. IND vs AUS 3-7 जनवरी 2019: साल 2019 का ऐतिहासिक ऑस्ट्रेलियाई दौरा. 70 सालों में पहली बार भारत ने ऑस्ट्रेलिया में जाकर ऑस्ट्रेलिया को हराया और कामयाबी पाई. लेकिन सिडनी की किस्मत अब भी रूठी रही. 2019 में सीरीज़ जीते लेकिन सिडनी नहीं जीत पाए.
भारत जब सिडनी पहुंचा तो सीरीज़ में पहले ही 2-1 से आगे था. सिडनी टेस्ट भारत के नाम तो नहीं हो सका लेकिन कुलदीप यादव के नाम ज़रूर रहा.

कुलदीप यादव. फोटो: Getty Images
पहली पारी में भारत ने चेतेश्वर पुजारा और ऋषभ पंत के बड़े शतकों से 622 रन बना दिए. अब ऑस्ट्रेलिया की पारी को फंसाने के लिए कुलदीप यादव का जाल काम कर गया. कुलदीप यादव ने 99 रन देकर पांच विकेट चटका दिए. उनकी गेंदबाज़ी से ऑस्ट्रेलिया 300 रनों पर सिमट गया.
भारत ने ऑस्ट्रेलिया को फॉलो ऑन दिया. लेकिन खराब मौसम की वजह से मैच पूरा नहीं हो सका. आखिर में मैच ड्रॉ पर खत्म हुआ और भारत 2-1 से सीरीज़ जीता लेकिन सिडनी जीतने से फिर चूक गया.
सिडनी में स्पिनर्स ने एक नहीं कई बार बेहतरीन गेंदबाज़ी से भारत की उम्मीदें जगाई हैं. लेकिन 1978 के बाद 42 साल गुज़रने पर भी भारत सिडनी में टेस्ट मैच नहीं जीत सका.
2020 के दौरे पर मेलबर्न में भारत ने जिस तरह से वापसी की है. उससे उम्मीद है कि सिडनी में भारत इतिहास बदल सकता है.
वैसे तो इंडियन टीम स्पिनर्स के लिए जानी जाती है. लेकिन SCG का ज्यादा फायदा ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर शेन वॉर्न ने उठाया है. वॉर्न ने इस मैदान पर 64 विकेट चटकाए हैं. वहीं ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर स्टुअर्ट मैकगिल ने भी 53 विकेट अपने नाम किए है.
इस विकेट पर इंडियन स्पिनर्स ने भी कई शानदार स्पेल्स फेंके. लेकिन इन सब के बावजूद 70 साल के इतिहास में टीम इंडिया यहां सिर्फ एक ही मुकाबला जीत पाई.
भारत ने इस मैदान पर अब तक 12 टेस्ट मैच खेले हैं. लेकिन उसे सिर्फ एक बार ही जीत मिली है. वो भी 42 साल पहले साल 1978 में. चलिए आपको बताते हैं 1948 से 2019 के बीच सिडनी में खेले गए 12 टेस्ट मैचों में भारत ने क्या किया.? सिडनी में टीम इंडिया के 12 टेस्ट: IND vs AUS 12-18 दिसंबर 1947: आज़ाद भारत पहली बार ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गया. सन डॉन ब्रैडमेन वाली लाइनअप के आगे भारत के पास बहुत कुछ नहीं था. सीरीज़ का दूसरा मैच सिडनी में खेला गया. पूरे टेस्ट में खूब बारिश हुई और मैच में सिर्फ 153.2 ओवर फेंके जा सके. भारतीय टीम की पहली पारी 188 रन पर सिमट गई. लेकिन इसके बाद टीम इंडिया ने तगड़ा उलटफेर कर दिया. टीम इंडिया ने मेज़बान ऑस्ट्रेलिया को 107 रन पर ढेर कर दिया.
इसमें सबसे कमाल का काम किया विजय हज़ारे ने. हज़ारे ने पारी में सिर्फ 29 रन देकर चार विकेट चटकाए. वो भी सर डॉन ब्रैडमेन समेत हेसेट, लिंडवॉल और टेलॉन के.
ये मुकाबला ड्रॉ पर खत्म हुआ. लेकिन भारत के खेल की हर तरफ तारीफ हुई. IND vs AUS 26-31 दिसंबर 1968: पहले दौरे के 21 साल बाद भारतीय टीम फिर से सिडनी पहुंची. अब तक टीम इंडिया की फैब फोर स्पिन चौकड़ी में से बिशन सिंह बेदी और इरापल्ली प्रसन्ना टीम इंडिया में पहुंच गए थे. दोनों ने मैच में 10 विकेट चटकाए. प्रसन्ना ने दोनों पारियों में सात विकेट और बेदी ने तीन विकेट अपने नाम किए. लेकिन बल्लेबाज़ी बिखरी और भारत इस मैच को 144 रन से हार गया. IND vs AUS 7-12 जनवरी 1978: 10 साल बाद टीम इंडिया स्पिन ताकत बनकर सिडनी पहुंची. इस दशक में हम एक नई टीम थे. जिसने अब विदेशों में भी जीत दर्ज करनी शुरू कर दी थी. इंग्लैंड को और वेस्टइंडीज़ को हरा चुके थे. ऑस्ट्रेलिया को हराने के लिए बेकरार थे.

भगवत चंद्रशेखर. फोटो: Getty Images
7 जनवरी के दिन सिडनी में ऐतिहासिक टेस्ट शुरू हुआ. पहली बार भारत सिडनी में जीत दर्ज करने वाला था. इस मुकाबले में चंद्रशेखर ने छह, बिशन सिंह बेदी और इरापल्ली प्रसन्ना ने 5-5 विकेट चटकाए और ऑस्ट्रेलियन बैटिंग को पूरी तरह से ढेर कर दिया.
ऑस्ट्रेलियाई टीम भारतीय स्पिन बॉलिंग के आगे पहली पारी में 131 और दूसरी पारी में 263 रन ही बना सका. भारत ने बल्लेबाज़ी में भी कमाल दिखाया और 396 रन बना दिए. इस मुकाबले को टीम इंडिया ने पारी और दो रन से जीत सिडनी का किला फतेह किया. IND vs AUS 2-4 जनवरी 1981: 1981 में भारत एक बार फिर सिडनी पहुंचा. लेकिन इस बार ग्रेग चैपल के दोहरे शतक और डेनिस लिली और पोसको की गेंदबाज़ी के आगे भारत पारी और चार रन से हार गया. भारत को इस दौरे पर बेदी, प्रसन्ना, चंद्रशेखर की बहुत कमी खली.
1986 और 1992 में भारतीय टीम के लिए शिवलाल यादव और रवि शास्त्री ने गेंदबाज़ी में मोर्चा संभाला लेकिन मैच जिता नहीं पाए. 1986 और 1992 दोनों दौरों पर सिडनी टेस्ट ड्रॉ पर खत्म हुआ. IND vs AUS 2-4 जनवरी 2000: साल 2000 तक क्रिकेट पूरी तरह से बदल चुका था. भारत को अनिल कुंबले और सचिन तेंडुलकर के रूप में नए लीजेंड्स मिल चुके थे. भारतीय टीम फिर से सिडनी में खेलने पहुंची. 1978 की वो जीत अब 22 साल पुरानी हो चली थी. लेकिन इस बार जस्टिन लैंगर और रिकी पोन्टिंग की जोड़ी ने सचिन की कप्तानी वाली टीम को बुरी तरह से रौंद दिया.

शेन वॉर्न और सचिन तेंडुलकर. फोटो: Getty Images
इस मैच में न तो अनिल कुंबले को और न ही ऑस्ट्रेलियन लीजेंड शेन वॉर्न को एक भी विकेट मिला. सिडनी की जिस विकेट पर बेदी और प्रसन्ना ने झंडे गाड़े थे. वहां अब कुंबले और वॉर्न की नहीं चल रही थी. पहली बार सिडनी की विकेट पर स्पिनर्स की ऐसी दुर्गती होती दिखी. ऑस्ट्रेलियन बल्लेबाज़ों की मदद से मेज़बान ने इस मैच को पारी और 141 रनों से जीत लिया. IND vs AUS 2-6 जनवरी 2004: 2000 की सीरीज़ के बाद 2001 में भारत में ऐतिहासिक ऑस्ट्रेलिया के साथ सीरीज़ खेली गई. जी हां, वही ईडन गार्डन्स वाली. इस सीरीज़ का असर 2004 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी दिखा. 2-6 जनवरी के बीच सिडनी में खेले गए मुकाबले में भारत ने 705 रन बना दिए.
ऑस्ट्रेलियन स्पिनर्स एक बार फिर सिडनी में विकेट के लिए तरसते दिखे. लेकिन इस बार अनिल कुंबले को कोई दिक्कत नहीं थी. उन्होंने शानदार कमाल कर दिया. ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में आठ विकेट चटकाकर उन्होंने ऑस्ट्रेलियन टीम को फंसा दिया.
भारत ने इस मैच में ऑस्ट्रेलिया को 442 रनों का लक्ष्य दिया. चौथी पारी में कुंबले ने फिर से ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों को परेशान किया और चार विकेट चटकाए. लेकिन स्टीव वॉ ने ऑस्ट्रेलिया के लिए इस मैच को बचा लिया. भारत ने 2004 के इस सुनहरे मौके को गंवा दिया. ये मैच ड्रॉ पर खत्म हुआ. IND vs AUS 2-6 जनवरी 2008: 2008 के सबसे विवादास्पद ऑस्ट्रेलियन दौरे पर खेले गए सिडनी टेस्ट को कोई भी क्रिकेट फैन नहीं भुला सकता. सिडनी में ही मंकीगेट विवाद हुआ. जिसने बाद में बड़े विवाद का रूप ले लिया.

हरभजन सिंह और एंड्र्यू सायमंड्स. फोटो: Getty Images
खैर आज बात खेल की होगी. इस मुकाबले की पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया ने 463 रन बनाए. भारत के लिए छह विकेट अकेले अनिल कुंबले और हरभजन सिंह की जोड़ी ने निकाल दिए. भारत ने भी पहली पारी में सचिन और लक्ष्मण के शतकों से करारा जवाब दिया. टीम इंडिया ने बोर्ड पर 532 रन टांगे. ऑस्ट्रेलियन स्पिनर ब्रैड हॉग को दो विकेट मिले लेकिन वो कुंबले और भज्जी जितने कामयाब नहीं हुए.
दूसरी पारी में फिर से सात में से छह विकेट अकेले कुंबले और भज्जी की जोड़ी ने निकाले. लेकिन ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 401 रन बना लिए.
चौथी पारी में कुछ खराब अंपायरिंग और कुछ सायमंड्स और क्लार्क के स्पेल ने भारत को मैच में मात दे दी. टीम इंडिया ने इस विवादित मैच को 122 रन से गंवाया. IND vs AUS 3-6 जनवरी 2012: साल 2012 में एक बार फिर से टीम इंडिया जीत की उम्मीद के साथ सिडनी पहुंची. लेकिन इस बार भी यहां पर ऐसी विकेट मिली की हमारे स्पिनर्स बुरी तरह से परेशानी में दिखे. भारत के 191 रनों के जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने बोर्ड पर 659 रन टांग दिए. भारतीय स्पिनर अश्विन ने 44, सहवाग ने 23 ओवर फेंके लेकिन एक भी विकेट इनके नाम नहीं हुआ. भारत दूसरी पारी में 400 रन ही बना सका और मैच को पारी और 68 रनों से हार गया. IND vs AUS 6-10 जनवरी 2015: 2015 में विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने सिडनी टेस्ट खेला. विराट की कप्तानी में ये पहला टेस्ट भी था. लेकिन इस मैच में भी भारत को जीत नसीब नहीं हुई. कप्तान विराट के शतक से ये मैच ड्रॉ पर खत्म हुआ.
भारतीय स्पिनर रविचन्द्रन अश्विन ने दूसरी पारी में तो चार विकेट निकाले लेकिन पहली पारी में उन्हें सिर्फ एक ही विकेट मिला. IND vs AUS 3-7 जनवरी 2019: साल 2019 का ऐतिहासिक ऑस्ट्रेलियाई दौरा. 70 सालों में पहली बार भारत ने ऑस्ट्रेलिया में जाकर ऑस्ट्रेलिया को हराया और कामयाबी पाई. लेकिन सिडनी की किस्मत अब भी रूठी रही. 2019 में सीरीज़ जीते लेकिन सिडनी नहीं जीत पाए.
भारत जब सिडनी पहुंचा तो सीरीज़ में पहले ही 2-1 से आगे था. सिडनी टेस्ट भारत के नाम तो नहीं हो सका लेकिन कुलदीप यादव के नाम ज़रूर रहा.

कुलदीप यादव. फोटो: Getty Images
पहली पारी में भारत ने चेतेश्वर पुजारा और ऋषभ पंत के बड़े शतकों से 622 रन बना दिए. अब ऑस्ट्रेलिया की पारी को फंसाने के लिए कुलदीप यादव का जाल काम कर गया. कुलदीप यादव ने 99 रन देकर पांच विकेट चटका दिए. उनकी गेंदबाज़ी से ऑस्ट्रेलिया 300 रनों पर सिमट गया.
भारत ने ऑस्ट्रेलिया को फॉलो ऑन दिया. लेकिन खराब मौसम की वजह से मैच पूरा नहीं हो सका. आखिर में मैच ड्रॉ पर खत्म हुआ और भारत 2-1 से सीरीज़ जीता लेकिन सिडनी जीतने से फिर चूक गया.
सिडनी में स्पिनर्स ने एक नहीं कई बार बेहतरीन गेंदबाज़ी से भारत की उम्मीदें जगाई हैं. लेकिन 1978 के बाद 42 साल गुज़रने पर भी भारत सिडनी में टेस्ट मैच नहीं जीत सका.
2020 के दौरे पर मेलबर्न में भारत ने जिस तरह से वापसी की है. उससे उम्मीद है कि सिडनी में भारत इतिहास बदल सकता है.

