चेतेश्वर पुजारा ने बताया, क्यों शरीर पर झेली ऑस्ट्रेलियाई बोलरों की गेंदें
सीरीज के बीच कुंबले ने क्यों किया पुजारा को मैसेज?
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चेतेश्वर पुजारा राहुल द्रविड़ के बाद भारत के दूसरे ऐसे बल्लेबाज़ हैं जिन्होंने तीसरे नंबर पर 5000 से ज़्यादा रन बनाए हैं. फोटो: AP
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भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसी की जमीन पर हराकर इतिहास रचा है. इस जीत में भारतीय टेस्ट बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा का रोल बेहद खास रहा. हालांकि उन्होंने ज्यादा रन नहीं बनाए, लेकिन जो बनाए वे निर्णायक साबित हुए. पुजारा भी पूरी टीम के साथ वापस भारत लौट आए हैं. उन्होंने बताया है कि किस तरह से टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और कोच अनिल कुंबले ने बल्लेबाजी में उनकी मदद की.
साल 2017 में कुंबले ने पुजारा को स्पिनर नैथन लायन के खिलाफ खेलने के लिए कुछ टिप्स दिए थे. इन्हीं की मदद से उनका प्रदर्शन स्पिनर्स के खिलाफ और बेहतर हुआ है. इस बार भी जब वो ऑस्ट्रेलिया में फंसे तो कुंबले ने ही उनकी मदद की.
पूर्व दिग्गज स्पिनर से मिले टिप्स के बाद ऑस्ट्रेलिया के दोनों दौरों पर पुजारा के बल्ले से खूब रन निकले हैं. साल 2018-19 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में पुजारा ने 521 रन बनाए थे. वहीं, हाल में खेली गई सीरीज़ में उन्होंने अहम 271 रन बनाए. भले ही इस सीरीज़ में पुजारा ने 2018-19 सीरीज़ जितने रन नहीं बनाए, लेकिन लगभग 10 महीने के गैप के बाद खेलते हुए पुजारा ने सीरीज़ में 928 गेंदों का सामना किया. सिडनी और गाबा के ऐतिहासिक टेस्ट मैचों में तो उन्होंने मैच जिताऊ पारियां भी खेलीं.
ऑस्ट्रेलिया गई भारतीय टीम में पुजारा कप्तान रहाणे के साथ सिर्फ दूसरे ऐसे भारतीय रहे, जो पूरे चार टेस्ट मैचों में खेले. ब्रिस्बेन टेस्ट में 328 रन चेज कर भारत ने इतिहास रचा था. उस टेस्ट के पांचवें दिन पुजारा ने 211 गेंदें खेलकर 56 रन बनाए थे. इस पारी के दौरान पुजारा को कई बार शरीर पर गेंदें लगीं, लेकिन वो मैदान पर डटे रहे.

चेतेश्वर पुजारा. फोटो: AP
विक्रम राठौड़ और रवि शास्त्री बोले ऐसे ही खेलते रहो: स्पोर्ट्स टुडे से बात करते हुए पुजारा ने अपनी तकनीक और खेल पर बात की. उन्होंने कहा,
साल 2017 में कुंबले ने पुजारा को स्पिनर नैथन लायन के खिलाफ खेलने के लिए कुछ टिप्स दिए थे. इन्हीं की मदद से उनका प्रदर्शन स्पिनर्स के खिलाफ और बेहतर हुआ है. इस बार भी जब वो ऑस्ट्रेलिया में फंसे तो कुंबले ने ही उनकी मदद की.
पूर्व दिग्गज स्पिनर से मिले टिप्स के बाद ऑस्ट्रेलिया के दोनों दौरों पर पुजारा के बल्ले से खूब रन निकले हैं. साल 2018-19 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में पुजारा ने 521 रन बनाए थे. वहीं, हाल में खेली गई सीरीज़ में उन्होंने अहम 271 रन बनाए. भले ही इस सीरीज़ में पुजारा ने 2018-19 सीरीज़ जितने रन नहीं बनाए, लेकिन लगभग 10 महीने के गैप के बाद खेलते हुए पुजारा ने सीरीज़ में 928 गेंदों का सामना किया. सिडनी और गाबा के ऐतिहासिक टेस्ट मैचों में तो उन्होंने मैच जिताऊ पारियां भी खेलीं.
ऑस्ट्रेलिया गई भारतीय टीम में पुजारा कप्तान रहाणे के साथ सिर्फ दूसरे ऐसे भारतीय रहे, जो पूरे चार टेस्ट मैचों में खेले. ब्रिस्बेन टेस्ट में 328 रन चेज कर भारत ने इतिहास रचा था. उस टेस्ट के पांचवें दिन पुजारा ने 211 गेंदें खेलकर 56 रन बनाए थे. इस पारी के दौरान पुजारा को कई बार शरीर पर गेंदें लगीं, लेकिन वो मैदान पर डटे रहे.

चेतेश्वर पुजारा. फोटो: AP
विक्रम राठौड़ और रवि शास्त्री बोले ऐसे ही खेलते रहो: स्पोर्ट्स टुडे से बात करते हुए पुजारा ने अपनी तकनीक और खेल पर बात की. उन्होंने कहा,
''मुझे अपनी तैयारी पर पूरा भरोसा था. लेकिन दूसरी तरफ प्रेशर भी बहुत ज्यादा था. इसलिए मैंने खुद से कहा कि मुझे कुछ तो करना ही होगा. मेरे दिमाग में बहुत सी चीजें चल रही थीं, जिन्हें मैंने मैदान पर लागू किया.''उन्होंने आगे कहा,
''मैंने बैटिंग कोच (विक्रम राठौड़) से बात की, रवि भाई से बात की. ज्यादातर लोगों से मुझे मेरा फीडबैक पॉजीटिव मिला. सबने कहा कि मैं अच्छी बल्लेबाजी कर रहा हूं और किसी भी तरह के दबाव को दूर रखकर ऐसे ही खेलता रहूं.''अनिल कुंबले ने की मदद: पुजारा ने इस बातचीत में पूर्व कोच अनिल कुंबले से मिले टिप्स पर भी बात की. उन्होंने कहा,
''इस बार भी एडिलेड टेस्ट के बाद मैं अनिल भाई के टच में था. उन्होंने मुझे मैसेज करके सलाह दी. उनकी दी हुई सलाह मैदान पर मेरे बहुत काम आई.''पुजारा ने इस सीरीज में अपनी धीमी बल्लेबाजी और शरीर पर गेंदें खेलने का भी जवाब दिया. उन्होंने कहा,
''ब्रिस्बेन में जैसी पिच थी, वहां कभी भी गेंद बल्ले का किनारा ले सकती थी. इसी वजह से मैंने गेंद को शरीर पर झेलना ज्यादा बेहतर समझा.''सबसे बड़ी जीत होगी टेस्ट चैम्पियनशिप: इसी बातचीत में पुजारा ने आगे कहा कि उनके लिए टेस्ट क्रिकेट बहुत ज्यादा मायने रखता है. वे बोले,
''आप किसी भी फॉर्मेट में खेलने वाले खिलाड़ी से पूछेंगे तो वो भी यही कहेगा कि टेस्ट क्रिकेट का महत्व सबसे ज्यादा है. अब हमारा ध्यान टेस्ट चैम्पियनशिप की तरफ है. अगर हम इसे जीतने में कामयाब होते हैं तो ये भातीय क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी जीत होगी.''

