IND vs AUS : वो 5 फैक्टर, जिन्होंने भारत को दूसरा वनडे जिता दिया
कोहली तो हैं हीं...मगर असली काम तो बॉलरों ने किया.
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भारत ने जीता दूसरा वनडे.
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भारत वर्सेज ऑस्ट्रेलिया. टी20 सीरीज में करारी हार के बाद लड़के एकदम भरे बैठे थे. तो इसका पूरा बदला लेती दिख रही है टीम इंडिया वनडे सीरीज में. पहले वनडे में जीत के बाद टीम ने दूसरा वनडे भी जीत लिया है. मगर दूसरे वनडे की ये जीत थी एकदम कांटे वाली. जनता ने पक्का सारे टोटके कर दिए होंगे. तभी ये मैच आखिरी ओवर तक जाकर भी बच गया. मैच के हीरो तो ढेरों हैं मसलन विराट कोहली, बुमराह, कुलदीप. पर हम आपको वो पांच कारण बता देते हैं जिसने ये नाखून चबवा देने वाला मैच भारत के पाले में गिरा दिया -
1. स्वयं विराट कोहली
मतलब कुल 250 रन बने हों. और उसमें से एक शतक हो तो ये विराट कोहली का ही होगा. अपनी रन मशीन, अपना हीरो. 116 रन बनाए. 40वां शतक. और ये 116 कितने बड़े हैं. इसे ऐसे समझिए कि कोहली के आने से पहले 0 स्कोर था. माने ओपनिंग जोड़ी टूट चुकी थी. कोहली के क्रीज पर रहते 248 रन बने और आउट होने के बाद मात्र 2 रन बने. ये बताता है कि कोहली कितने जरूरी है टीम इंडिया के लिए.

कोहली ने 40वां शतक मारा.
2. कुलदीप यादव की फिर्की
ऑस्ट्रेलिया की ओपनिंग पार्टनरशिप 14वें ओवर तक 83 रन की हो चुकी थी. और जैसे ख्वाजा और फिंच खेल रहे थे, काफी लोग टीवी बंद करके भी बैठ गए होंगे कि मैच गया. पर फिर बॉल लेकर आए चाइनामैन कुलदीप यादव. और फिंच को 15वें ओवर की तीसरी गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट किया. ये मैच में भारत की पहली वापसी थी. कुलदीप ने भारत की दूसरी बार मैच में वापसी करवाई मैक्सवेल का विकेट लेकर. मैक्सवेल क्या कर सकते थे, वो आप जानते ही हैं. अपने इस स्पेल में 10 ओवर में कुलदीप ने 54 रन देकर 3 विकेट लिए.
3. बुमराह का डेथ स्पेल
इस आदमी का तो कोई जोड़ नहीं है डेथ ओवर्स में बॉलिंग का. मतलब आखिरी के ओवरों में इसके अंदर कौन सा शक्तिमान आ जाता है, समझ नहीं आता. बंदे ने मैच में सिर्फ 2 विकेट लिए, पर एक ही ओवर में. मैच के 46वें ओवर में. पहले कुल्टर नाइल को बोल्ड मारा. फिर कमिंस का एज छुआकर कैच आउट करवाया. और यहीं से एक बार फिर हाथ से जाता मैच वापस भारत के हाथ में आ गया था. बुमराह ने अपने 10 ओवर के स्पेल में मात्र 29 रन दिए और 2 विकेट लिए.

बुमराह की तगड़ी बॉलिंग.
4. जडेजा का थ्रो
सही बात. तारीफ तो टीम इंडिया की फील्डिंग की भी होनी चाहिए. तगड़ी फील्डिंग की सबने. पर जब थ्रो मारने की बारी आए तो तलवारबाज रवींद्र जडेजा का कोई सानी नहीं. और इस मैच में ये कला दिखी मैच के 38वें ओवर में. जब जडेजा ने बॉल विकट पर जड़ 48 रन पर जमके खेल रहे हैंड्सकॉम्ब को चलता कर दिया. स्टोनिस और हैंड्सकॉम्ब के बीच 39 रन की पार्टनरशिप तोड़ी. और जीत की आस जगाई.
5. स्टोनिस की रिस्क और कोहली का इक्का
देखा जाए तो स्टोनिस ने समझदारी वाला ही काम किया था. वो खतरनाक दिख रहे बुमराह का पूरा 48वां ओवर झेल गए. फिर शमी के ओवर में भी ज्यादा मारने की कोशिश नहीं की. कुल मिलाके वो उस एक ओवर की तलाश में थे जिसमें कोई तीसरा गेंदबाज आए. तो मैच गया आखिरी ओवर तक. जिसे डाला विजय शंकर ने.

विजय शंकर ने आखिर में जंपा को बोल्ड मारा.
कहते हैं न ऊपर वाले के घर में देर है अंधेर नहीं. तो ये आज लागू होता है शंकर के केस में. बेचारे बैटिंग के वक्त अनलकी रहे. 46 रन पर रनआउट हो गए. मौके से चूक गए. पर आखिर में हीरो वही बने. 50वें ओवर की पहली ही बॉल पर स्टोनिस को एलबीडब्ल्यू आउट करके. फिर तीसरी बॉल पर जंपा को बोल्ड मारके. वो भी तब जब ये इस मैच का उनका दूसरा ओवर था. पहले ओवर में वो 13 रन खा गए थे, इसलिए उनको ओवर नहीं मिल रहा था. पर जब मिला तो लड़के ने कमाल कर दिया. हीरो बनकर निकला. मैच के बाद विजय शंकर ने इस पर कहा कि मैं इस अपॉर्च्युनिटी के लिए तैयार था. मैं 43वें ओवर से ही सोच रहा था कि मैं आखिरी ओवर करुंगा. औऱ जो प्लान किया वो पूरा किया.
कोहली ने भी मैच के बाद मजेदार बात कही. बोले-
लल्लनटॉप वीडियो देखें-
1. स्वयं विराट कोहली
मतलब कुल 250 रन बने हों. और उसमें से एक शतक हो तो ये विराट कोहली का ही होगा. अपनी रन मशीन, अपना हीरो. 116 रन बनाए. 40वां शतक. और ये 116 कितने बड़े हैं. इसे ऐसे समझिए कि कोहली के आने से पहले 0 स्कोर था. माने ओपनिंग जोड़ी टूट चुकी थी. कोहली के क्रीज पर रहते 248 रन बने और आउट होने के बाद मात्र 2 रन बने. ये बताता है कि कोहली कितने जरूरी है टीम इंडिया के लिए.

कोहली ने 40वां शतक मारा.
2. कुलदीप यादव की फिर्की
ऑस्ट्रेलिया की ओपनिंग पार्टनरशिप 14वें ओवर तक 83 रन की हो चुकी थी. और जैसे ख्वाजा और फिंच खेल रहे थे, काफी लोग टीवी बंद करके भी बैठ गए होंगे कि मैच गया. पर फिर बॉल लेकर आए चाइनामैन कुलदीप यादव. और फिंच को 15वें ओवर की तीसरी गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट किया. ये मैच में भारत की पहली वापसी थी. कुलदीप ने भारत की दूसरी बार मैच में वापसी करवाई मैक्सवेल का विकेट लेकर. मैक्सवेल क्या कर सकते थे, वो आप जानते ही हैं. अपने इस स्पेल में 10 ओवर में कुलदीप ने 54 रन देकर 3 विकेट लिए.
3. बुमराह का डेथ स्पेल
इस आदमी का तो कोई जोड़ नहीं है डेथ ओवर्स में बॉलिंग का. मतलब आखिरी के ओवरों में इसके अंदर कौन सा शक्तिमान आ जाता है, समझ नहीं आता. बंदे ने मैच में सिर्फ 2 विकेट लिए, पर एक ही ओवर में. मैच के 46वें ओवर में. पहले कुल्टर नाइल को बोल्ड मारा. फिर कमिंस का एज छुआकर कैच आउट करवाया. और यहीं से एक बार फिर हाथ से जाता मैच वापस भारत के हाथ में आ गया था. बुमराह ने अपने 10 ओवर के स्पेल में मात्र 29 रन दिए और 2 विकेट लिए.

बुमराह की तगड़ी बॉलिंग.
4. जडेजा का थ्रो
सही बात. तारीफ तो टीम इंडिया की फील्डिंग की भी होनी चाहिए. तगड़ी फील्डिंग की सबने. पर जब थ्रो मारने की बारी आए तो तलवारबाज रवींद्र जडेजा का कोई सानी नहीं. और इस मैच में ये कला दिखी मैच के 38वें ओवर में. जब जडेजा ने बॉल विकट पर जड़ 48 रन पर जमके खेल रहे हैंड्सकॉम्ब को चलता कर दिया. स्टोनिस और हैंड्सकॉम्ब के बीच 39 रन की पार्टनरशिप तोड़ी. और जीत की आस जगाई.
5. स्टोनिस की रिस्क और कोहली का इक्का
देखा जाए तो स्टोनिस ने समझदारी वाला ही काम किया था. वो खतरनाक दिख रहे बुमराह का पूरा 48वां ओवर झेल गए. फिर शमी के ओवर में भी ज्यादा मारने की कोशिश नहीं की. कुल मिलाके वो उस एक ओवर की तलाश में थे जिसमें कोई तीसरा गेंदबाज आए. तो मैच गया आखिरी ओवर तक. जिसे डाला विजय शंकर ने.

विजय शंकर ने आखिर में जंपा को बोल्ड मारा.
कहते हैं न ऊपर वाले के घर में देर है अंधेर नहीं. तो ये आज लागू होता है शंकर के केस में. बेचारे बैटिंग के वक्त अनलकी रहे. 46 रन पर रनआउट हो गए. मौके से चूक गए. पर आखिर में हीरो वही बने. 50वें ओवर की पहली ही बॉल पर स्टोनिस को एलबीडब्ल्यू आउट करके. फिर तीसरी बॉल पर जंपा को बोल्ड मारके. वो भी तब जब ये इस मैच का उनका दूसरा ओवर था. पहले ओवर में वो 13 रन खा गए थे, इसलिए उनको ओवर नहीं मिल रहा था. पर जब मिला तो लड़के ने कमाल कर दिया. हीरो बनकर निकला. मैच के बाद विजय शंकर ने इस पर कहा कि मैं इस अपॉर्च्युनिटी के लिए तैयार था. मैं 43वें ओवर से ही सोच रहा था कि मैं आखिरी ओवर करुंगा. औऱ जो प्लान किया वो पूरा किया.
कोहली ने भी मैच के बाद मजेदार बात कही. बोले-
हम नहीं चाहते कि हम उस टीम की तरह हों जो हर मैच एकतरफा जीत जाए. हम ऐसे करीबी मुकाबले ही चाहते हैं ताकि हमारी एबिलिटीज चेक हो सकें. और वर्ल्डकप से पहले ऐसे मैच बहुत कॉन्फिडेंस देते हैं.ठीक बात. मगर कॉन्फिडेंस तब तक ही देते हैं जब तक जीतो. जनता से पूछो, यहां जान सूख जाती है. पर गुरू मैच तो था मजेदार. याद रहने वाला.
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