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फ्रेंचाइजी क्रिकेट की धमक से सहमा ICC, बाइलेटरल सीरीज बचाने के लिए बनाया प्लान

फ्रेंचाइजी क्रिकेट पिछले कुछ समय में तेजी से उभार पर है. IPL के अलावा SA T-20 लीग, पीएसएल समेत कई लीग टूर्नामेंट आयोजित हो रहे हैं. इसे देखते हुए ICC ने द्विपक्षीय सीरीज का क्रेज बचाने के लिए खास कमेटी गठित की है.

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2 जून 2026 (पब्लिश्ड: 12:05 PM IST)
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ICC फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बढ़ते दायरे से चिंतित है. (फोटो- Reuters)
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दुनियाभर में फ्रेंचाइजी क्रिकेट तेजी से बढ़ रहा है. इससे चिंतित होकर ICC ने एक खास कमेटी बनाने को मंजूरी दी है. यह कमेटी देखेगी कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट मौजूदा स्ट्रक्चर को बिना नुकसान पहुंचाए इंटरनेशनल कैलेंडर के साथ कैसे चल सकता है? नई कमेटी से उम्मीद है कि वह ऐसे तरीके खोजेगी, जो इंटरनेशनल क्रिकेट खासकर बाइलेटरल सीरीज को बचा सके.

डोमेस्टिक क्रिकेट लीग बढ़ने से इसका असर बाइलेटरल सीरीज पर पड़ा है. मार्केट में फ्रेंचाइजी क्रिकेट की वजह से बाइलेटरल सीरीज का आयोजन कम हो गया है.

फ्रेंचाइजी क्रिकेट की भरमार

मौजूदा समय में IPL के अलावा,  SA T20 लीग, ILT20, बिग बैश लीग (BBL), बांग्लादेश प्रीमियर लीग (BPL), लंका प्रीमियर लीग (LPL), द हंड्रेड, कैरेबियन प्रीमियर लीग (CPL) जैसे फ्रेंचाइजी टूर्नामेंट खेले जा रहे हैं. वहीं, इस साल के आखिर में यूरोपियन T20 प्रीमियर लीग भी शुरू होने वाली है.

ICC ने एक स्टेटमेंट में कहा,

बोर्ड ने फ्रेंचाइजी क्रिकेट के  बढ़ते दायरे पर चिंता जताई है. इसलिए उसने मौजूदा स्ट्रक्चर के अंदर फ्रेंचाइजी क्रिकेट को इंटरनेशनल कैलेंडर के साथ तालमेल बिठाने के लिए कमेटी बनाने का फैसला किया.

गवर्निंग बॉडी लंबे समय से  खिलाड़ियों की उपलब्धता, नेशनल ड्यूटी और फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बीच बैलेंस बनाने में लगी है.  ICC कमेटीज की पिछली चर्चा में यह प्रपोजल शामिल था कि एक सीजन में एक प्लेयर कितनी लीग्स में हिस्सा ले सकता है,  इसकी लिमिट तय की जाए. साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इंटरनेशनल क्रिकेट की प्रायोरिटी बनी रहे.

प्लेयर्स पर फ्रेंचाइजी क्रिकेट का असर

ICC की यह चिंता छोटे क्रिकेट खेलने वाले देशों के लिए ज्यादा है. इन देशों के क्रिकेटर इंटरनेशनल क्रिकेट की अपेक्षा फ्रेचाइजी क्रिकेट को ज्यादा फायदेमंद मानते हैं. वे लीग क्रिकेट में ही टिकाऊ करियर देख रहे हैं.

पिछले कुछ सालों में देखा जाए, तो फ्रेंचाइजी क्रिकेट की वजह से कई क्रिकेटर्स ने समय से पहले इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंट ले लिया. वेस्टइंडीज के विस्फोटक बैटर निकोलस पूरन ने 30 की उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया. वहीं, पिछले साल साउथ अफ्रीका के धुरंधर क्रिकेटर हेनरिक क्लासेन ने भी इंटरनेशनल क्रिकेट को बाय-बाय कह दिया. वेस्टइंडीज के पूर्व मिस्ट्री स्पिनर सुनील नारायण ने इंटरनेशनल क्रिकेट को दरकिनार करके ज्यादातर फ्रेंचाइजी क्रिकेट पर फोकस किया.

नई लीग और फ्रेंचाइजी क्रिकेट बढ़ने के साथ ICC को डर है कि यह बाइलेटरल सीरीज को कमजोर कर सकता है. लीग क्रिकेट फॉरेन टूर प्रोग्राम (FTP) की  शेड्यूलिंग को मुश्किल बना सकता है.

इस मामले में फ्रेंचाइजी क्रिकेट के मामले में भारत का रवैया सख्त है. इंडियन क्रिकेटर सिर्फ IPL में खेलते हैं. BCCI ने कॉन्ट्रैक्टेड फर्स्ट क्लास क्रिकेटर्स को विदेशी T20 लीग में खेलने की इजाजत नहीं दी है.

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