चुनावी पिच पर फिल्म वालों और क्रिकेटरों की परफॉर्मेंस
उन उम्मीदवारों का लेखा-जोखा भी जान लीजिए जो पैराशूट लेकर पॉलिटिक्स में उतरे. इनका हुआ क्या.
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फोटो - thelallantop
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चुनावी नतीजों में पार्टियों और उनकी सीटों पर नजर रखिए ही. साथ ही उन उम्मीदवारों का लेखा-जोखा भी जान लीजिए जो पैराशूट लेकर पॉलिटिक्स में उतरे. कोई क्रिकेट की दुनिया से आया और कोई सिनेमा से. इनका हुआ क्या:
35 साल के लक्ष्मी ने दिसंबर 2015 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया था. क्रिकेट के मैदान पर वह जाने गए अपने जुझारूपन के लिए. ऑलराउंडर रहे. कहते हैं कि ममता की लड़ाई और संघर्ष से बड़ा प्रभावित हूं और 10 साल बाद क्रिकेटर या नेता के बजाय 'जनता का आदमी' कहलाना चाहता हूं.
राजनीति का करियर आप देख ही लेंगे. क्रिकेट का करियर अच्छा रहा है. 1999 में 3 वनडे खेले थे, पर कमाल नहीं कर पाए. 137 फर्स्ट क्लास मैचों में करीब 6217 रन बनाए और 172 विकेट लिए. हार्ड हिटिंग बैट्समैन, उपयोगी मीडियम पेसर.
'महाभारत' में द्रौपदी बनी थीं. कई बंगाली फिल्मों में काम किया. जनवरी 2015 में टिकट की उम्मीद से बीजेपी में आईं. पार्टी ने उन्हें हावड़ा नॉर्थ सीट से टिकट दिया. चुनाव के दौरान पोलिंग बूथ के बाहर TMC समर्थकों से उनकी कहासुनी हुई और उन्होंने एक महिला को थप्पड़ भी मार दिया. मामले में FIR भी दर्ज हुई है.
पार्टी ने उन्हें प्रदेश महिला बीजेपी अध्यक्ष बनाकर बड़ा सम्मान दिया है. उधर कानाफूसी है कि वह पश्चिम बंगाल की स्मृति ईरानी हैं. टीवी छोड़कर आई थीं तो उन्हें भी गुजरात में पार्टी के महिला मोर्चे की कमान दे दी गई थी. रूपा भी वैसी ही एग्रेसिव अप्रोच की नेता हैं.
बंगाल में बीजेपी की रणनीति नेताजी सुभाषचंद्र बोस की क्लासिफाइड फाइल्स जारी करने तक ही नहीं रही. उसने नेताजी के पोते चंद्र बोस को अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाया है. इतना ही नहीं, बड़ा जोखिम उठाते हुए उन्हें ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर विधानसभा से मैदान में उतारा गया है. वह बीती 25 जनवरी को ही बीजेपी में आए थे.
याद रहे कि नेताजी के एक और पड़पोते सुगत बोस पहले से ही TMC सांसद हैं. 'बोस पॉलिटिक्स' पश्चिम बंगाल में असर करती है. यहां कांग्रेस ने प्रियरंजन दास मुंशी की पत्नी को प्रिया को टिकट दिया है. भवानीपुर सीट पर चंद्र बोस की राह मुश्किल, बहुत मुश्किल नजर आ रही है.
सट्टेबाजी के दाग के बाद तेज गेंदबाज एस श्रीसंत का क्रिकेट करियर खत्म हो गया. डांस में ज्यादा स्कोप नहीं था, तो वह राजनीति में उतर आए. केरल में कोई पहचाना हुआ चेहरा तलाश रही बीजेपी ने उन्हें हाथोंहाथ लिया. वह राजधानी तिरुवनंतपुरम से इलेक्शन लड़ रहे हैं.
दिल्ली में एक ट्रायल कोर्ट ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया था, लेकिन BCCI का बैन बरकरार है. सूत्र बताते हैं कि श्रीसंत एरनाकुलम जिले की तिरुप्पुनितारा सीट से टिकट मांग रहे थे, पर वहां कैंडिडेट पहले ही तय हो चुका था. तिरुवनंतपुरम सीट के लिए भी एक्टर सुरेश गोपी की बातचीत चल रही थी. लेकिन फिर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने तिरुवनंतपुरम सीट से उनका नाम फाइनल कर दिया. 2 दिन पहले उन्होंने कहा था कि प्रदेश में पार्टी 70 से ज्यादा सीटें जीत सकती है. लेकिन वोटों की गिनती के दिन कहा कि हम 30-35 सीटें जीत सकते हैं.
बैंक अफसर थे. फिर कॉलेज में लेक्चरर हो गए. फिर फिल्मों में आए और अब राजनीति में. मलयालम सिनेमा के नामी कॉमेडियन, स्क्रिप्टराइटर और कैरेक्टर आर्टिस्ट. कांग्रेस ने पतानपुरम से टिकट दिया है. यहां वह मलयालम सिनेमा के एक और दिग्गज केबी गणेश कुमार के खिलाफ लड़ रहे हैं. दोनों ने कई मौकों पर स्क्रीन साझा की है.
केरल में सिनेमा और राजनीति के पुराने महारथी हैं. पिता आर बालाकृष्णन पिल्लई मंत्री हुआ करते थे. उनकी पार्टी लेफ्ट मोर्चे वाले LDF गठबंधन का हिस्सा है. 2011 से 2013 तक कम्युनिस्ट सरकार में केबी गणेश मंत्री भी रहे हैं. पतानपुरम सीट पर उनकी अच्छी पकड़ है. 2001 में पहली बार इसी सीट से विधायक चुने गए थे.
32 साल के सोहम बंगाली फिल्मों के पॉपुलर एक्टर हैं. सत्यजीत रे की फिल्म 'शाखा प्रशाखा' में चाइल्ड एक्टर के तौर पर नजर आए थे. पहली बार इलेक्शन लड़ रहे हैं. कांग्रेस ने टिकट दिया है. 2011 में यह सीट TMC ने जीती थी.
फिल्म ऐक्टर. 300 से ज़्यादा फिल्मों में विलेन का रोल. फिल्मों में एंट्री हुई क्यूंकि 'माचो ऐक्टर' जयन की मौत हो गयी. और भीमन उनके जैसे दिखते थे. जयन के मरने पर बहुत से डायरेक्टर्स जो उनके साथ काम करने वाले थे, बगलें झांकने लगे. फिर रघु को लिया गया. उनका नाम रघु था. भीमन उनकी पहली फिल्म थी जो नाम में जुड़ गई.
पतानपुरम में स्टार वॉर हो रहा है. तीन एक्टर लड़ रहे हैं.
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लक्ष्मी रतन शुक्ला: आगे TMC, हावड़ा नॉर्थ (प. बंगाल)
लक्ष्मी रतन शुक्ला. वही क्रिकेट वाले. क्रिकेट के मैदान का 18 साल का एक्सीपीरियंस. IPL में कोलकाता नाइटराइडर्स से खेले. चुनावी डेब्यू अभी किया है. ममता बनर्जी की पार्टी TMC ने उन्हें हावड़ा नॉर्थ सीट से कैंडिडेट बनाया है. यहां उनका मुकाबला एक्टिंग से राजनीति में आईं बीजेपी की रूपा गांगुली से है.
35 साल के लक्ष्मी ने दिसंबर 2015 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया था. क्रिकेट के मैदान पर वह जाने गए अपने जुझारूपन के लिए. ऑलराउंडर रहे. कहते हैं कि ममता की लड़ाई और संघर्ष से बड़ा प्रभावित हूं और 10 साल बाद क्रिकेटर या नेता के बजाय 'जनता का आदमी' कहलाना चाहता हूं.
राजनीति का करियर आप देख ही लेंगे. क्रिकेट का करियर अच्छा रहा है. 1999 में 3 वनडे खेले थे, पर कमाल नहीं कर पाए. 137 फर्स्ट क्लास मैचों में करीब 6217 रन बनाए और 172 विकेट लिए. हार्ड हिटिंग बैट्समैन, उपयोगी मीडियम पेसर.
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रूपा गांगुली: पीछे BJP, हावड़ा नॉर्थ (प. बंगाल)
'महाभारत' में द्रौपदी बनी थीं. कई बंगाली फिल्मों में काम किया. जनवरी 2015 में टिकट की उम्मीद से बीजेपी में आईं. पार्टी ने उन्हें हावड़ा नॉर्थ सीट से टिकट दिया. चुनाव के दौरान पोलिंग बूथ के बाहर TMC समर्थकों से उनकी कहासुनी हुई और उन्होंने एक महिला को थप्पड़ भी मार दिया. मामले में FIR भी दर्ज हुई है.
पार्टी ने उन्हें प्रदेश महिला बीजेपी अध्यक्ष बनाकर बड़ा सम्मान दिया है. उधर कानाफूसी है कि वह पश्चिम बंगाल की स्मृति ईरानी हैं. टीवी छोड़कर आई थीं तो उन्हें भी गुजरात में पार्टी के महिला मोर्चे की कमान दे दी गई थी. रूपा भी वैसी ही एग्रेसिव अप्रोच की नेता हैं.
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चंद्र बोस: पीछे BJP, भवानीपुर
बंगाल में बीजेपी की रणनीति नेताजी सुभाषचंद्र बोस की क्लासिफाइड फाइल्स जारी करने तक ही नहीं रही. उसने नेताजी के पोते चंद्र बोस को अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाया है. इतना ही नहीं, बड़ा जोखिम उठाते हुए उन्हें ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर विधानसभा से मैदान में उतारा गया है. वह बीती 25 जनवरी को ही बीजेपी में आए थे.
याद रहे कि नेताजी के एक और पड़पोते सुगत बोस पहले से ही TMC सांसद हैं. 'बोस पॉलिटिक्स' पश्चिम बंगाल में असर करती है. यहां कांग्रेस ने प्रियरंजन दास मुंशी की पत्नी को प्रिया को टिकट दिया है. भवानीपुर सीट पर चंद्र बोस की राह मुश्किल, बहुत मुश्किल नजर आ रही है.
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एस श्रीसंत: पीछे BJP, तिरुवनंतपुरम (केरल)
सट्टेबाजी के दाग के बाद तेज गेंदबाज एस श्रीसंत का क्रिकेट करियर खत्म हो गया. डांस में ज्यादा स्कोप नहीं था, तो वह राजनीति में उतर आए. केरल में कोई पहचाना हुआ चेहरा तलाश रही बीजेपी ने उन्हें हाथोंहाथ लिया. वह राजधानी तिरुवनंतपुरम से इलेक्शन लड़ रहे हैं.
दिल्ली में एक ट्रायल कोर्ट ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया था, लेकिन BCCI का बैन बरकरार है. सूत्र बताते हैं कि श्रीसंत एरनाकुलम जिले की तिरुप्पुनितारा सीट से टिकट मांग रहे थे, पर वहां कैंडिडेट पहले ही तय हो चुका था. तिरुवनंतपुरम सीट के लिए भी एक्टर सुरेश गोपी की बातचीत चल रही थी. लेकिन फिर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने तिरुवनंतपुरम सीट से उनका नाम फाइनल कर दिया. 2 दिन पहले उन्होंने कहा था कि प्रदेश में पार्टी 70 से ज्यादा सीटें जीत सकती है. लेकिन वोटों की गिनती के दिन कहा कि हम 30-35 सीटें जीत सकते हैं.
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जगदीश: पीछे कांग्रेस, पतानपुरम (केरल)
बैंक अफसर थे. फिर कॉलेज में लेक्चरर हो गए. फिर फिल्मों में आए और अब राजनीति में. मलयालम सिनेमा के नामी कॉमेडियन, स्क्रिप्टराइटर और कैरेक्टर आर्टिस्ट. कांग्रेस ने पतानपुरम से टिकट दिया है. यहां वह मलयालम सिनेमा के एक और दिग्गज केबी गणेश कुमार के खिलाफ लड़ रहे हैं. दोनों ने कई मौकों पर स्क्रीन साझा की है.
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केबी गणेश कुमार: आगे केरल कांग्रेस, पतानपुरम (केरल)
केरल में सिनेमा और राजनीति के पुराने महारथी हैं. पिता आर बालाकृष्णन पिल्लई मंत्री हुआ करते थे. उनकी पार्टी लेफ्ट मोर्चे वाले LDF गठबंधन का हिस्सा है. 2011 से 2013 तक कम्युनिस्ट सरकार में केबी गणेश मंत्री भी रहे हैं. पतानपुरम सीट पर उनकी अच्छी पकड़ है. 2001 में पहली बार इसी सीट से विधायक चुने गए थे.
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सोहम चक्रवर्ती: आगे कांग्रेस, बरजोरा (बांकुरा, पश्चिम बंगाल)
32 साल के सोहम बंगाली फिल्मों के पॉपुलर एक्टर हैं. सत्यजीत रे की फिल्म 'शाखा प्रशाखा' में चाइल्ड एक्टर के तौर पर नजर आए थे. पहली बार इलेक्शन लड़ रहे हैं. कांग्रेस ने टिकट दिया है. 2011 में यह सीट TMC ने जीती थी.
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भीमन रघु: पीछे बीजेपी, पतानपुरम (केरल)
फिल्म ऐक्टर. 300 से ज़्यादा फिल्मों में विलेन का रोल. फिल्मों में एंट्री हुई क्यूंकि 'माचो ऐक्टर' जयन की मौत हो गयी. और भीमन उनके जैसे दिखते थे. जयन के मरने पर बहुत से डायरेक्टर्स जो उनके साथ काम करने वाले थे, बगलें झांकने लगे. फिर रघु को लिया गया. उनका नाम रघु था. भीमन उनकी पहली फिल्म थी जो नाम में जुड़ गई.
पतानपुरम में स्टार वॉर हो रहा है. तीन एक्टर लड़ रहे हैं.
