साल 2003. हिमाचल में कांग्रेस पर वीरभद्र के कब्जे के 20 साल हो चुके थे. 1998 मेंभाजपा को जीत तोहफे में देने के बाद जब 2003 में सत्ता वापिस पाने का मौका आया तोठियोग से विधायक और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विद्या स्टोक्स ने वीरभद्र को चुनौतीदे दी. स्टोक्स ने सोनिया गांधी से अपनी नजदीकी का फायदा उठा कर दिल्ली में दावापेश कर दिया कि विधायक दल उन्हें मुख्यमंत्री पद पर देखना चाहता है. दो धड़ों मेंबंटी प्रदेश कांग्रेस का एक धड़ा वीरभद्र का था और दूसरा विद्या स्टोक्स का. विद्याकी तरफ अानंद शर्मा और पंडित सुखराम शुरू से रहे हैं. वीरभद्र ने ज्यादा चुस्तीदिखाई.शिमला में बने रहकर वे 68 सदस्यों वाली विधानसभा में कांग्रेस के 40 में से34 विधायकों का समर्थन जुटाने में कामयाब रहे. जहां विद्या दिल्ली में थीं, वीरभद्रने इलैक्ट्रॉनिक मीडिया के सामने अपने 22 विधायकों की परेड करा दी. पार्टी आलाकमानको वीरभद्र की ताकत का अंदाजा हो गया. विद्या की गैर-मौजूदगी में 6 और विधायकवीरभद्र के खेमे में आ गए. इस तरह पार्टी आलाकमान के सामने वीरभद्र को मुख्यमंत्रीबनाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा.आनंद शर्मा, विद्या स्टोक्स और वीरभद्र सिंह.जब खुद 5वीं बार मुख्यमंत्री बन गए तो वीरभद्र ने स्टोक्स को मंत्री पद देकर एक औरचाल खेल दी. इस शातिर नेता ने विद्या को उपमुख्यमंत्री का पद देने से पहले ही साफइंकार कर दिया था मगर मंत्री पद के साथ प्रदेश अध्यक्ष के पद बने रहने दिया.वीरभद्र ने इस पर कहा था कि इस बात में पूरी संभावना है कि स्टोक्स अपने साथविधायकों को लाकर उनकी की कुर्सी पलट सकती हैं. इंडिया टुडे से वीरभद्र ने कहा था-उनमें (स्टोक्स) तिकड़में करने की बेहिसाब क्षमता है". मुख्यमंत्री बनने के बाद जबवीरभद्र से पूछा गया था कि क्या आपने विद्या स्टोक्स के समर्थकों को फोड़ लिया,वीरभद्र बोले थे- ये पराजित जुआरी की बड़बड़ाहट जैसा है.विद्या के ससुर हिमाचल में सेब लाए-विद्या स्टोक्स शिमला के एक प्रभावशाली परिवारसे आती हैं. ससुर सत्यानंद स्टोक्स थे जो अमेरिकी नागरिक थे जो 1920 में शिमला केकोटगढ़ में आकर बसे. असली नाम सैम्यूल्स इवान्स स्टोक्स जूनियर था मगर जब से यहांबस गए और नाम सत्यानंद स्टोक्स रख लिया. सत्यानंद ने ही हिमाचल में सेब की खेतीशुरू की थी. आज भी स्टोक्स के कई सेब के बगीचे हैं.1920 में सत्यानंद स्टोक्स हिमाचल में आकर बस गए और सेब के बाग तैयार किए.89 साल की विद्या 2012 में भी सबसे उम्रदराज उम्मीदवार थीं और ये रिकॉर्ड 2017 केइन चुनावों में भी कायम रहा. कहा जाता है कि विद्या ने पिछले 55 सालों से अनाज नहींखाया है. वो सिर्फ सलाद, फल और सब्जियां ही खाती हैं. यानी रोटी, चावल या अन्य अनाजका आहार नहीं लेती हैं. वहीं एक और रोचक तथ्य ये कि विद्या स्टोक्स ने बतौर विधायक,मंत्री या अन्य किसी पद पर रहते हुए एक रुपया भी पगार नहीं ली है. इसके लिए उनकीकाफी तारीफ हुई है. 83 साल की उम्र में हॉकी इंडिया की प्रेसिडेंट बनने वालीस्टोक्स का मुख्यमंत्री बनने का सपना साकार नहीं हो पाया, मगर करीब 45 साल केराजनीतिक करियर में विद्या ने कद्यावर नेता के रूप में अपना लोहा मनवाया.विद्या की कुछ और बातें- * हिमाचल प्रदेश की ये कद्दावर नेता बैंकर बनना चाहती थी मगर 36 साल की उम्र में राजनीति में आ गईं. उस दौरान विद्या स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में सबसे युवा महिला डायरेक्टर थीं. * विद्या स्टोक्स की शादी लाल चंद स्टोक्स से हुई जो समाजसेवी और होर्टिकल्चरिस्ट थे. * 8 दिसंबर 1927 को पैदा हुईं विद्या साल 1970 से कांग्रेस में रही हैं. पहली बार हिमाचल प्रदेश विधानसभा में साल 1974 में पहुंची थीं. ये हिमाचल के पहले मुख्यमंत्री यशवंत सिंह परमार का टाइम था. * उसके बाद 1982, 1985, 1990, 1998, 2003, 2007 और फिर 2012 में फिर जीतीं. * यूं तो स्टोक्स ने 2017 में चुनाव लड़ने से मना किया था, मगर बाद में जब वीरभद्र ने ठियोग की जगह अर्की सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया तो विद्या ने खुद ही चुनाव में उतरने का फैसला किया. आखिरी दिन भरा पर्चा अगले दिन चुनाव आयोग ने कुछ डॉक्युमेंट्स में गड़बड़ी के चलते रद्द कर दिया. विद्या इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच गई हैं.हिमाचल चुनाव से जुड़ा वीडियो भी देखें-ये भी पढ़ें-9 और 14 दिसंबर को होगी गुजरात में वोटिंग, रिजल्ट 18 दिसंबर कोशांता कुमार के होमग्राउंड पर मोदी ने अपना कैंडिडेट उतार दिया है