हैरी ली. पूरा नाम हेनरी विलियम ली. एक फल और सब्ज़ी बेचने वाले बाप का बेटा. लन्दनमें पैदा हुआ. दिन 26 अक्टूबर 1890. बचपन गरीबी में गुज़रा. एक लैम्प पोस्ट के खिलाफ़बॉलिंग करते गुज़रा. कहता था, "अगर एक आदमी 10 में से 9 बार लैम्प पोस्ट को गेंदफेंकते समय क्लीन बोल्ड कर सकता है तो वो कभी भी मैच के दौरान विकेट्स मिस नहींकरेगा." बचपन में स्कूल के दौरान हेडमास्टर क्रिकेट के मुरीद मिले. उनका रोज़ कानियम था. स्कूल के अच्छे बॉलर्स को पकड़ कर उनसे गेंदें फिंकवाते. और जो उन्हेंबोल्ड कर देता, उसे एक पेनी मिलती. हैरी ली लगभग रोज़ रकम लेकर घर जाते. ली के उसीप्रिंसिपल ने उसे लगातार गुड लेंथ पर गेंद फेंकते रहने की ट्रेनिंग दी. स्कूल केफाइनल इयर के दौरान स्कूल को लोकल शील्ड जितवाई. फाइनल में हैरी ली ने 6 विकेट लिए.स्कूल छोड़ने के बाद हैरी अपने बाप के साथ फल बेचने लगा. ये काम उसे अच्छा लगा, मगरउतना नहीं कि उसे मेलबर्न क्रिकेट क्लब को लेटर लिख लॉर्ड्स मैदान में ग्राउंडस्टाफ का काम मांगने से रोक पाता.ली से जब पूछा जाता तो वो बताते "लॉर्ड्स में फेंका गया मेरा पहला ओवर मेरी ज़िंदगीकी सबसे घटिया 6 गेंदें थीं." लेकिन जैसे उनकी नर्वसनेस कम हुई, वो इम्प्रूव करनेलगे. और इसी के साथ वो पांच ग्राउंड स्टाफ में से एक चुने गए. लॉर्ड्स के मैदानमें. वहां वो झाड़ू लगाते, सीट्स साफ़ करते, पिच बनाते, पिच से घास हटाते, मैदान सेअनचाही घास हटाते. इसके साथ ही उन्हें मैदान के बाहर स्कोरकार्ड बेचने, स्कोरबोर्डचलाने और नेट्स में फील्डिंग करने का काम भी मिला. और इतने काम की वजह से ली कोक्रिकेट खेलने का टाइम बहुत कम मिलता. ली को एक भी कोच नहीं नसीब हुआ. लेकिन वोनेट्स में प्रैक्टिस करती इंग्लिश टीम के प्लेयर्स से टिप्स लेता. इसी दौरानप्लेयर्स की निगाह में बने रहने के कारण और उन्हें गेंद फेंकते-फेंकते वो प्लेयर्सकी निगाह में बना रहने लगा. 1909 में मिडलसेक्स कोल्ट्स की ओर से खेलते हुए 39 रनबनाये. फिर अगले मैच में 60. वो मेलबर्न क्रिकेट क्लब की ओर से और भी ज़्यादा नज़रआने लगा. रन भी बना रहा था और विकेट भी ले रहा था, मगर उसे वो पहचान नहीं मिल रहीथी.1911 में जब कई मिडलसेक्स प्लेयर इंग्लैंड टीम के सेलेक्शन के लिए चले गए, हैरी लीको काउंटी चैंपियनशिप में खेलने के लिए बुलाया गया. यहां आगाज़ हुआ हैरी ली का. वोजो अब एक प्रोफ़ेशनल क्रिकेटर बन चुका था. जिसका उसे कब से इंतज़ार था.पहले मैच में 9 ओवर में ली को एक भी विकेट नहीं मिला. 1912 में उसकी परफॉरमेंससुधरी. साल के पहले ही मैच में उसने पांच विकेट लिए. 1913 में ली को एमसीसी नेबॉलिंग स्टाफ़ में शामिल कर लिया. हालांकि उसे कम मैच खेलने को मिले.वर्ल्ड वॉरसाल 1914. वर्ल्ड वॉर की शुरुआत. जब जंग शुरू हुई तो उसे नहीं लगता था कि उसकीज़िन्दगी पर कोई ख़ास असर पड़ेगा. मगर जब मालूम चला कि MCC और मिडलसेक्स काउंटीक्रिकेट क्लब वॉर में सपोर्ट कर रहे थे, तो ली ने अपना इरादा बदल लिया. दरअसल उसेक्रिकेट से इस कदर प्यार था कि उसने अपनी टीम्स को कुछ करते देखा तो वैसा ही बनजाना चाहा. वो तेरहवीं बटालियन में जाकर भर्ती हो गया. तारीख थी 1 सितंबर 1914. 25फरवरी को उसे बताया गया कि उसे फ़्रांस जाना है. फ़्रांस के नोउव चैपल गांव में जर्मनसेना ने ब्रिटिश आर्मी को घेर लिया. ब्रिटेन को इतनी भारी मात्रा में जर्मन सैनिकोंकी मौजूदगी के बारे में अंदेशा नहीं था.550 ब्रिटिश सैनिकों में 449 मारे गए. 13 अफ़सर मरे. इस अटैक के दौरान हैरी ली कोपैर में गोली लगी. उसकी जांघ की हड्डी चूर हो गयी. तीन दिन वहीं पड़ा रहा. उसे मराहुआ मान कर ब्रिटिश सेना ने उसके घर खबर भिजवा दी. तीन दिन बाद जर्मन सेना ने उसेपकड़ लिया. अस्पताल ले गए. वो युद्धबंदी बन चुका था. पहले हफ़्ते तो उसे रेड क्रॉस नेदेखा. जब हालत सुधरी तो जर्मन उसे ले गए. शायद उसकी जिंदगी खतम होने वाली थी. ऐसाउसे भी लग रहा था. 6 हफ़्ते वो वैलेंसींस में रहा. बिस्तर पर. उसके बाद उसे हैनोवरशिफ्ट किया गया. दो दिन की जर्नी में उसे एक लकड़ी के फट्टे पर सोना पड़ा. एक कम्बलउसके नीचे और उसका टूटा पांव एक लोहे के केस में जकड़ा हुआ था. इसका असर उसकी पीठ परपड़ा. साथ ही इतने पूरे दिनों में उसे नाम-मात्र का खाना मिला. हैनोवर में उसकीरिकवरी शुरू हुई. लेकिन यहां उसने वो किया, जो उसे वापस इंग्लैण्ड लेकर आया.उसने एक नाटक किया. इस नाटक की पटकथा लिखी थी हैरी ली के साथ कैद एक और सैनिक ने.उसके कहने पर हैरी ली ने अपनी चोट को ठीक होने के बावजूद बुरा दिखाना शुरू किया.उसने नाटक किया कि वो बहुत पीड़ा में है. उसे ब्रिटेन वापस भेजने के लिए सेलेक्ट करलिया गया. 1 अक्टूबर 1915 को उसने इंग्लैंड के लिए वापसी की जर्नी शुरू की.ली की चोट, ग़लत परिस्थितियों में रहने के कारण बढ़ गयी थी. इंग्लैंड वापस पहुंचने परउसे ये अहसास हुआ कि उसकी एक टांग दूसरी से थोड़ी छोटी हो गयी है. उसे बताया गया किअब वो कभी भी क्रिकेट नहीं खेल पायेगा. 4 दिसंबर 1915 को उसे आर्मी से डिस्चार्ज करदिया गया. आर्मी से निकलने के बाद मिडलसेक्स ने उसे एक स्पेशलिस्ट से इलाज करवानेका पूरा खर्च दिया. आर्मी स्पेशल कॉर्प्स की तरफ से लैंसिंग कॉलेज के खिलाफ़ एक मैचखेला. साल 1916. सेंचुरी बनाई. हैरी ली की टांग भले ही छोटी हो गयी थी, उसके अन्दरक्रिकेट आज भी ज़िन्दा था.वर्ल्ड वॉर के बाद1916 में गर्मी के मौसम के ख़त्म होने के अंत के आस-पास ली फ्रैंक टैरेंट की पत्नीसे मिले. उसने ली को बताया कि उसे उसके हसबैंड के साथ काम करना चाहिए. इंडिया में.लंडन से निकलने के ठीक पहले ली की मां की मौत हो गयी. उसे ऐसा लगा कि उसे घर पर हीरहना चाहिए. अपने भाइयों की देखभाल के लिए. एक साल बाद वो फिर इंडिया के लिए निकला.इंडिया के लिए हैरी ली का ये सफ़र वर्ल्ड वॉर से कम नहीं था. वो जिस जहाज पर जा रहाथा, नाम था न्यान्ज़ा. बॉम्बे के लिए जा रहा था. लेकिन आखिरी मिनट पर ली को नागोयामें ट्रांसफर कर दिया गया. नागोया कलकत्ता तक जाने वाला था. बीच रास्ते मेंन्यान्ज़ा, जो बॉम्बे जा रहा था, पर टोरपीडो से हमला कर दिया गया. 49 लोग मरे. आगे,नागोया, जिसमें ली सवार थे, पर जर्मनी ने हमला कर दिया. एक और जहाज, शिप ऑफ़ लखनऊ,डूब गया. वो एक 8 हज़ार टन का कार्गो शिप था. नागोया का बचना चमत्कार था.जर्मनी की UBoats जो हमला करती थीं.इंडिया पहुंचने पर ली फ़ुटबॉल और क्रिकेट के कोच बन गए. कोच भी ऐसे वैसे आदमी केनहीं. कूच बिहार के महाराजा के. लेकिन ली को कोच कम और एक मेहमान के तौर पर रखागया. इंडिया में रहने के दौरान ही ली ने कुछ फर्स्ट क्लास गेम खेले. अपने पहले हीमैच में पांच विकेट लिए. मात्र ग्यारह रन देकर. सनद रहे कि इस दौरान उनकी एक टांगछोटी थी.काउंटी क्रिकेट में वापसीवर्ल्ड वॉर के बाद 1919 में जब काउंटी क्रिकेट दोबारा शुरू हुआ तो ली महाराजा कीनौकरी छोड़ वापस आ गए. मिडलसेक्स के साथ खेलने. अब काउंटी चैंपियनशिप मैच दो दिनखेले जाते थे. ये हैरी ली को कतई पसंद नहीं आया. पांच दिन के खेल के वो आदी थे. एकसीज़न में ली ने 1,000 रन बनाये. पहली बार. 'एक छोटी टांग' के साथ. और अब मिडलसेक्सके साथ वो पक्के हो गए. एक सीज़न में चार सेंचुरी मारी. ओवल में हुए एक चैरिटी मैचमें मैच के दोनों इनिंग्स में सेंचुरी मारी. बैटिंग ऐवरेज 40.76 का.1920 में मैचेज़ फिर से तीन दिन के होने लगे. और इस सीज़न में हैरी ली ने अपने जीवनकी ऊंचाइयों को छुआ. लॉर्ड्स में लगातार दो सेंचुरी मारीं. दूसरे मैच में ली ने 11विकेट लिए.पूरे क्रिकेट करियर में ली ने 20 हज़ार से ऊपर रन बनाये और 400 से ऊपर विकेट लिए.इंग्लिश ठण्ड के सीज़न में सेंट एंड्रूज़ कॉलेज और र्होड्स यूनिवर्सिटी में कोचिंग कररहे थे. इंग्लैंड के कैप्टन पर्सी चैपमैन ने रिक्वेस्ट की कि ली को उनकीजिम्मेदारियों से मुक्त किया जाए. वजह ये थी कि MCC टूर पर था और टीम में कईप्लेयर्स चोटिल थे या बीमार थे. ली को MCC से खेलने को मिला. इंग्लैंड की ओर सेएकमात्र टेस्ट खेला. साउथ अफ्रीका के ख़िलाफ़. ली ने बॉब वॉयट के साथ इनिंग्स कीशुरुआत की और दो इनिंग्स में 18 और 1 रन बनाये. मैच ड्रॉ हुआ. मैच के दौरान MCC केपास कुछ लोग पहुंचे जिन्होंने बताया कि ली ने कॉन्ट्रैक्ट तोड़ा है. क्यूंकिउन्होंने बिना MCC की परमिशन लिए इंग्लैंड की तरफ से मैच खेला. ली ने इसके ख़िलाफ़खूब अपील की लेकिन MCC ने एक न सुनी. उसे इंग्लैंड की कैप और ब्लेज़र नहीं दिया गया.ली भी अड़े रहे. उनका कहना था कि उन्हें माफ़ी मागने की कोई ज़रूरत नहीं थी इसलिए वोमाफ़ी नहीं मांगेंगे. हालांकि बाद में जैक हॉब्स ने उन्हें अपना ब्लेज़र और कैप देदिया था.