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गुजरात में मोदी की मुश्किलें बढ़ाने वाले हार्दिक पटेल को बड़ा झटका लगा है

अब ये भी तय नहीं कि चुनाव लड़ पाएंगे या नहीं.

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29 मार्च 2019 (अपडेटेड: 29 मार्च 2019, 12:44 PM IST)
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जनप्रतिनिधि कानून 1951 के तहत दो साल से ज्यादा सजा होने पर 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकते.
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हार्दिक पटेल. गुजरात में पटेलों के बड़े नेता. अभी कुछ दिन पहले ही धूमधाम से कांग्रेस का दामन थामा था. ऑफिशियली कांग्रेसी बने थे. कांग्रेस की टिकट पर जामनगर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने का प्लान था. लेकिन अदालत के एक फैसले के बाद प्लान धरा रह गया है. क्यों हुआ ऐसा? बताएंगे, लेकिन पहले अदालत का फैसला जान लीजिए.
कुछ दिन पहले 12 मार्च, 2019 को हार्दिक ने कांग्रेस का दामन थामा था.
कुछ दिन पहले 12 मार्च, 2019 को हार्दिक ने कांग्रेस का दामन थामा था.

गुजरात हाईकोर्ट ने पाटीदार आरक्षण आंदोलन के हार्दिक पटेल के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है. हार्दिक पर 23 जुलाई, 2015 में मेहसाणा के विसनगर में तोड़फोड़ करने का आरोप था. ये तोड़फोड़ हुई थी तत्कालीन भाजपा विधायक ऋषिकेश पटेल के दफ्तर में. मामला सेशंस कोर्ट में गया और कोर्ट ने  25 जुलाई, 2018 को हार्दिक को दोषी माना था. 2 साल के साधारण कारावास की सज़ा सुनाई थी. अब चुनावी मौसम है. हार्दिक कांग्रेस में आ गए हैं. जनप्रतिनिधि कानून 1951  के मुताबिक 2 साल या उससे ज्यादा सज़ा पाने वाले चुनाव नहीं लड़ सकते. इसलिए हार्दिक चाहते थे कि केस निपट जाए. ताकि चुनाव लड़ सकें. इसलिए हार्दिक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 8 मार्च को दोबारा अपील फाइल की थी. जिसे आज हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है. मतलब सजा बरकरार रहेगी. और साथ ही अब चुनाव नहीं लड़ पाएंगे.
आप सोच रहे होंगे कि अगर सजा मिली है तो जेल में क्यों नहीं हैं. तो आपको पूरा मामला जान लीजिए.
क्या है मामला पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल और दो साथियों को 2015 के मेहसाणा दंगा मामले में दोषी करार दिया गया था. विसनगर कोर्ट ने उन्हें 2 साल कि सजा भी सुनाई थी. हार्दिक पटेल समेत दोनों पर आगजनी और तोड़फोड़ का आरोप था. चूंकि मामला संगीन नहीं था इसलिए, हार्दिक पटेल समेत तीनों दोषियों को 15,000 रुपये के मुचलके पर सशर्त जमानत मिल गई थी. इस मामले में 17 आरोपी नामज़द किए गए थे. विसनगर कोर्ट ने 17 आरोपियों में से 3 लोगों को दोषी ठहराया था, 14 लोग बरी हो गए थे. इस पूरे मामले में दिलचस्प बात भी है. गुजरात सरकार ने ये घोषणा की थी कि वो पाटीदार आंदोलन के दौरान हुए दंगों के सभी मामले वापस ले लेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. कम-से-कम हार्दिक के केस में तो नहीं हुआ. यहां सरकार की नीति और राजनीति पर सवालिया निशान खड़ा होता है.
हार्दिक पटेल के लिए ये पहला बड़ा इम्तेहान था.
अगर कोर्ट में मामला सलट जाता तो हार्दिक चुनावी राजनीति में खाता खोल सकते थे.

25 अगस्त, 2019 को पाटीदार क्रांति रैली के चार साल पूरे होंगे. तब तक देश में नई सरकार बन चुकी होगी. आज से तकरीबन चार साल पहले पहली बार पाटीदार समाज आरक्षण की मांग के साथ सड़कों पर उतरा था, गुजरात की भाजपा  सरकार ने खूब लाठी-डंडे भांजे. 9 लोगों की मौत हुई थी. गुस्साए पाटीदारों ने 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जमकर मुखालफत की थी. पाटीदार यानी पटेल भाजपा का पक्का वोट बैंक थे. ये वोट बैंक छिटकने की बड़ी वजह हार्दिक ही थे. भाजपा का नुकसान, माने कांग्रेस का फायदा. 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिलने वाले पटेल वोटों में इज़ाफ़ा हुआ था. खासतौर पर ग्रामीण गुजरात में.
बहरहाल, हार्दिक पटेल का ट्वीट आया है. कहा कि मैं हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं.
बहरहाल, हार्दिक पटेल का ट्वीट आया है. कहा कि मैं हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं.

हार्दिक पर चुनाव लड़ने की रोक लगने से कांग्रेस को झटका लग सकता है. खेल किस और जाता है, वक्त बताएगा.


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