प्रयोग, प्रोसेस या घमंड, टीम इंडिया के बुरे हाल की वजह क्या है?
हार्दिक को अपने साथियों पर भरोसा ही नहीं है?

हार्दिक पंड्या. टीम इंडिया इन्हें अगले कप्तान के रूप में देख रही है. लेकिन फ़ैन्स की मानें, तो इनसे नहीं हो पा रहा. हो तो ख़ैर राहुल द्रविड़ से भी नहीं पा रहा. लेकिन हार्दिक ज्यादा निशाने पर हैं, क्योंकि मैदान में वही दिखते हैं. और मैदान के अंदर के उनके काम भी अतरंगी ही हैं.
हार्दिक जब भी ब्रॉडकास्टर या मीडिया से बात करते हैं, तो उनकी बातों में अजब सा आत्मविश्वास होता है. हालांकि कई लोग इसे घमंड भी बताते हैं. और इन्हीं लोगों का कहना है कि हार्दिक का घमंड ही भारत का बुरा हाल करा रहा है. लेकिन क़रीब से देखेंगे तो इस बुरे हाल में हार्दिक के फैसलों का भी रोल है.
वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ़ भारत पहले दोनों T20I हार चुका है. लेकिन हार्दिक को इससे क्या, वो तो सच के साथ अपने प्रयोगों में बिज़ी हैं. हर मैच में हार्दिक कुछ ऐसा कर जाते हैं, जिसे देख आम फ़ैन के साथ बड़े-बड़े दिग्गज भी सर पीट लेते हैं. जैसे दूसरे मैच की बात कर लीजिए. हार्दिक ने अक्षर पटेल को स्पेशलिस्ट बैटर उतार दिया. जी हां, अक्षर इस मैच में भारत के सातवें बल्लेबाज थे. जैसा कि मैच के बाद हार्दिक बोले भी,
'अभी के कॉम्बिनेशन में हमें अपने टॉप सेवेन बैटर्स पर यक़ीन रखना होगा.'
टॉप सेवेन पर ध्यान दीजिए. दूसरे मैच में खेली टीम में अक्षर ही वो सातवें बल्लेबाज थे. उनसे ऊपर, हार्दिक, सैमसन, तिलक, सूर्या, शुभमन और ईशान खेले थे. जबकि उनके बाद बिश्नोई, अर्शदीप, चहल और मुकेश बचे.
# Hardik Captaincyलेकिन अब सवाल ये है, कि अगर आपको यही कॉम्बिनेशन बनाना है. जिसमें सात बल्लेबाज और चार बोलर हों. तो आप यशस्वी को उतार सकते थे. ईशान मुंबई के लिए ठीकठाक वक्त पर नंबर तीन खेले हैं. जबकि सूर्या भी उस वक्त चार नंबर पर खेलते थे. इनके बाद आप सैमसन, तिलक और खुद को रख सकते हैं.
और आप खुद टीम के पांचवें बोलर हैं ही. तो सात बैटर और पांच बोलिंग ऑप्शन वाली टीम बन ही जाती. लेकिन आपने अक्षर को चुना, जिन्हें दुनिया बोलिंग ऑलराउंडर मानती है. उन्हें आपने बैटर मान लिया. इतना ही नहीं. युज़वेंद्र चहल से आपकी जाने क्या नाराज़गी है. भाई जब भी एक ओवर में दो विकेट लेता है, आप अगला ओवर ही नहीं देते.
पहले मैच में भी वही हुआ और फिर दूसरे में भी. दूसरे में आप तर्क दे सकते हैं कि मैच डेथ्स की ओर बढ़ रहा था, लेकिन पहले में क्या? वहां तो युज़ी ने पांचवां ओवर ही फेंका था सबसे पहले. दोनों ही मैच में युज़ी को सिर्फ़ तीन ओवर मिले. जबकि दोनों ही बार वह अच्छी लय में दिख रहे थे, बढ़िया बोलिंग कर रहे थे.
आपने दूसरे मैच में अक्षर को बोलिंग ही नहीं दी. कारण बताया कि निकलस पूरन बहुत बढ़िया खेल रहे थे, रिस्की होता. भाईसाब अक्षर फेंकते हैं लेफ़्ट आर्म ऑर्थोडॉक्स और ऐसा नहीं है कि पूरन ऐसे बोलर के आगे आउट ही नहीं होते. सेम बोलिंग करने वाले पाकिस्तानी मोहम्मद नवाज़ ने दो बार उन्हें आउट कराया है.
आप और राहुल जी जाने क्या तैयारी करते हैं कि आपको ये भी नहीं पता था. और फिर आपने हर उस बोलर को बदला, जिसने अच्छी बोलिंग की. जब आपका मन करता है आप गेंद उठा लेते हैं. जब आपका मन करता है आप नंबर पांच आ जाते हैं, जब मन करता है नंबर छह आ जाते हैं. और मैच आपसे दोनों दशाओं में फ़िनिश नहीं होता. ना तो आप पांच पर आकर अंत तक रुक पाते हैं, ना छह पर.
कभी आप नई गेंद से बोलिंग करने लगते हैं तो कभी आपको पुरानी गेंद पसंद आ जाती है. टीम ऐसे थोड़े ना चलती है भाई. ये कॉर्पोरेट टूर्नामेंट थोड़े ना चल रहा है कि कप्तान साब जो चाहें, जैसे चाहें कर लें. आप बार-बार प्रोसेस की बात करते हैं. कहते हैं कि प्रोसेस फ़ॉलो करेंगे तो रिजल्ट आएंगे ही. ये किस चीज की प्रोसेस चल रही है? बोलर्स का मनोबल तोड़ने की? या फ़ैन्स को 2007 की याद दिलाने की?
और आपकी इस प्रोसेस से आने वाला रिज़ल्ट हम सह पाएंगे? क्योंकि प्रोसेस तो नहीं ही सही जा रही है. दिशाहीन टीम सेलेक्शन, कमाल की बोलिंग चॉइसेज़. अक्षर पटेल ने दो मैच में कुल दो ओवर फेंके हैं. आपने आठ. अब समझ नहीं आ रहा कि आप दोनों में से बैटिंग ऑलराउंडर कौन है और बोलिंग ऑलराउंडर कौन. या तो आपको अपने ही साथियों पर भरोसा नहीं है. और अगर ऐसा है, फिर तो समस्या गंभीर है. क्योंकि जंग हथियारों और सैनिकों से ज्यादा, भरोसे से जीती जाती है.
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