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'T20 के लिए अलग कोच, सेलेक्टर्स को ज्यादा पैसे दे BCCI'

भज्जी ने स्प्लिट कोचिंग की बात की.

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26 फ़रवरी 2023 (अपडेटेड: 26 फ़रवरी 2023, 06:30 PM IST)
BCCI needs two coaches, more money to selectors - Harbhajan Singh
जय शाह और भज्जी (Courtesy:PTI)
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10 साल बीत गए, टीम इंडिया ने एक भी ICC ट्रॉफी नहीं जीती. इस दशक में टीम इंडिया ने हर फॉर्मेट में शानदार क्रिकेट खेला है. हर टीम को हराया है. पर बड़े मोमेंट्स में इंडियन टीम पर बाकी टीम्स भारी पड़ी हैं. ऐसे में हरभजन सिंह का मानना है कि टीम इंडिया को दो अलग-अलग कोच ट्राई करने चाहिए. भज्जी का मानना है कि एक कोच सिर्फ T20 फॉर्मेट के लिए चुना जाना चाहिए.

टीम इंडिया के पास दो कप्तान हैं. रोहित शर्मा टीम को टेस्ट और वनडे में और हार्दिक पंड्या टीम को T20 फॉर्मेट में लीड करते हैं. ये बदलाव 2022 T20 वर्ल्ड कप के बाद आया है. इस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने भारत को 10 विकेट से हराया था. इंडियन एक्सप्रेस के आइडिया एक्सचेंज सेशन के दौरान भज्जी ने कहा -

आपके पास दो कप्तान हैं. तो दो कोच क्यों नहीं हो सकते. कोई ऐसा, जिसकी प्लानिंग अलग हो. जैसा इंग्लैंड ने ब्रेंडन मैक्कुलम के साथ किया है. विरेन्द्र सहवाग या आशीष नेहरा जैसा कोई. नेहरा ने गुजरात टाइटन्स के साथ काम किया जब हार्दिक पंड्या ने बतौर कप्तान अपना पहला (IPL) टूर्नामेंट जीता. ऐसे किसी को लाओ जो T20 के कॉन्सेप्ट को समझे और क्या करना चाहिए, वो पता हो.

भज्जी ने आगे कहा -

ऐसे में कोच को पता होगा कि उनका फोकस T20 क्रिकेट है. मान लीजिए आशीष नेहरा को कोच बना दिया जाता है. उन्हें पता होगा कि उनका काम है टीम इंडिया को T20 फॉर्मेट में चैम्पियन बनाना. राहुल द्रविड़ को पता रहेगा उन्हें टेस्ट और वनडे क्रिकेट में टीम को नंबर 1 बनाना होगा.

भज्जी का ये भी मानना है कि भारत के पास जितना टैलेंट है, हमें एक वर्ल्ड कप जीतना चाहिए. भज्जी से पूछा गया कि 2011 के बाद हमने कोई वर्ल्ड कप क्यों नहीं जीता. उन्होंने कहा कि हमारे प्लेयर्स ने प्रेशर से अच्छे तरीके से डील नहीं किया. उन्होंने ये भी कहा कि टीम में लगातार बदलाव होते रहे हैं. इससे भी फर्क पड़ा है. भज्जी ने कहा -

ये एक पैटर्न की तरह बन गया है. हमने 2018-19 में देखा, प्लेयर्स को बहुत शफल किया गया. दिनेश कार्तिक खेल रहे थे, ऋषभ पंत भी खेल रहे थे. बड़े मैच कैसे जीतने है, इस लिहाज़ से प्लेयर्स को कम अनुभव है. बड़े मैचेस में ज्यादा प्रेशर होता है. वर्ल्ड कप बाइलैटरल सीरीज़ से अलग होता है. जितना बड़ा टूर्नामेंट, उतना ज्यादा प्रेशर. बहुत कम प्लेयर्स हैं जो वैसा प्रेशर लेते हैं. पहले हम कहते थे कि विराट कोहली या रोहित शर्मा रन्स बनाएंगे, तो हम जीत जाएंगे. अब हार्दिक पंड्या का दौर है. अब हमारे पास और ज्यादा मैचविनर्स हैं. मैं उम्मीद करता हूं कि ये ट्रेंड बदलेगा. हमारे टैलेंट को देखते हुए इसे बदलना भी चाहिए. अगर ऐसे टैलेंट के साथ हम अब नहीं जीत रहे, तो कब जीतेंगे?

भज्जी ने आगे ये भी कहा कि टीम इंडिया को 2023 वनडे वर्ल्ड कप जीतने के लिए सही इंटेंट के साथ खेलना होगा.

#BCCI सेलेक्टर्स पर क्या कहा?

भज्जी ने इसी प्रोग्राम में ये भी कहा कि BCCI को चीफ सेलेक्टर को और पैसे देने चाहिए. भज्जी ने कहा -

दिग्गज़ क्रिकेटर्स को कॉमेंट्री कर ब्रॉडकास्टर्स से अच्छे पैसे मिल रहे हैं. ऐसे में चीफ सेलेक्टर की नौकरी से उतना फायदा नहीं है. किसी बड़े नाम को चीफ सेलेक्टर बनाना है तो BCCI को अच्छे पैसे खर्च करने होंगे. कोई बड़ा नाम, जिसने ढेर सारा क्रिकेट खेला हो, वो सेलेक्शन की कई समस्याएं सुलझा देगा. पर वो इस मौके को लेना क्यों नहीं चाहते? मैं वीरेन्द्र सहवाग का उदाहरण दूंगा. अगर आप सहवाग से चीफ सेलेक्टर बनने को कहते हैं, तो आपको उस पोस्ट की सैलरी को देखना होगा. मुझे नहीं पता भारत का चीफ़ सेलेक्टर कितना कमाता है, पर अगर सहवाग क्रिकेट से जुड़ा कोई भी और काम कर रहे हैं, तो वो उससे ज्यादा ही कमा रहे होंगे.

भज्जी ने आगे कहा -

अगर आप सहवाग जैसे बड़े नाम को चीफ़ सेलेक्टर के रूप में देखना चाहते हैं, तो आपको पैसे खर्चने होंगे. अगर आप पैसे नहीं खर्चेंगे, तो आपको ऐसे प्लेयर्स में से सेलेक्टर्स चुनने होंगे जिन्होंने शायद एक ही साल खेला हो और उतने बड़े नाम ना हो. अगर राहुल द्रविड़ जैसा प्लेयर कोच बनाया जाता है, तो चीफ़ सेलेक्टर भी वैसे ही कद का आदमी होना चाहिए. जिसकी आवाज़ में दम हो, जिसके वजूद में दम हो.

सीनियर मेंस टीम के चीफ़ सेलेक्टर को हर साल 1 करोड़ रुपये और सेलेक्शन कमिटी के बाकी सदस्यों को 90 लाख रुपये मिलते हैं. वहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक टीम इंडिया के कोच राहुल द्रविड़ हर साल 7 करोड़ रुपये कमाते हैं. भज्जी से पूछा गया कि अगर उन्हें ऑफर आए, तो क्या वो चीफ़ सेलेक्टर बनेंगे? इसपर भज्जी ने कहा कि ये नेशनल टीम के कोच के साथ वेतन की समानता पर निर्भर करता है. 
 

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