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वो महिला फुटबॉलर जो खेल छोड़ फूड डिलीवरी करने के लिए मजबूर है!

AIFF की गलती नहीं है

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13 जनवरी 2023 (अपडेटेड: 13 जनवरी 2023, 12:31 PM IST)
Poulami Adhikari Women footballer
पोलामी अधिकारी (फोटो - सोशल मीडिया, इंडिया टुडे)
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फुटबॉल. वही गेम जो इंडिया में इतना ग्लैमराइज्ड नहीं है. इसलिए इस गेम के खिलाड़ियों को अपना जीवन काटने के लिए और भी नौकरियां खोजनी पड़ती है. और कोलकाता से ऐसी ही एक कहानी हाल में सामने आई. पोलामी अधिकारी की. पोलामी ने साल 2012 में वर्ल्ड टूर्नामेंट में इंडियन फुटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व किया था. लेकिन अब उनको अपना जीवनयापन के लिए जोमैटो के लिए काम करना पड़ रहा है. 

आपको बताएं, पोलामी ये कहानी सोशल वर्कर अतींद्र चक्रवर्ती (Atindra Chakraborty) ने शेयर की है. जिसके बाद इंडिया टुडे से उन्होंने बात की. इस वीडियो का ज़िक्र करते हुए पोलामी बोली, 

‘मैं एक डिलीवरी करने गई थी. अतींद्र नाम के एक व्यक्ति ने मेरी वीडियो बना दी और वो वायरल हो गई. मुझे पता चला कि वो एक सोशल वर्कर है. जिसके बाद, ये वीडियो वायरल हो गई.’

पोलामी ने साथ में अपने फुटबॉल के दिनों और नौकरी के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा, 

‘साल 2012 में मैंने अंडर 16 विमिंस टीम के लिए खेला था. देखो, मैं ये कभी नहीं चाहती थी कि मेरा फुटबॉल करियर खत्म हो. लेकिन वित्तीय स्थिति को देखते हुए, मुझे ये डिलीवरी बिज़नेस करना पड़ा. 500 रुपये के जूते खरीदने के लिए, मुझे अपने पापा से कहना पड़ता था. वो बिल्कुल इसके लिए पैसों का जुगाड़ कर देंगे. 

लेकिन मुझे पता है कि उन्हें ये बहुत महंगा पड़ेगा. उन्होंने वो सब किया जो वो कर सकते थे. लेकिन अपनी फैमिली की मदद करने के लिए और फुटबॉल में अपने करियर के लिए, मैंने डिलीवरी एजेंट बनने का फैसला किया.’ 

अपने फ्यूचर फुटबॉल करियर के बारे में बताते हुए पोलामी बोली, 

‘कुछ दिन, मैं 150 से 200 रुपये कमा लेती हूं. और कुछ दिन, कुछ भी नहीं अगर मुझे ऑर्डर नहीं मिलते तो. इस वित्तीय स्थिति में अपनी ट्रेनिंग के खर्चे कैसे पूरे करुंगी? एथलीट की डाइट भी सस्ती नहीं होती. मैं वो सारी चीज़ें इस सैलरी से पूरी नहीं कर सकती. जोमैटो एजेंट बनने के लिए की जाने वाली रजिस्ट्रेशन के 500 रुपये भी अपने आंटी से लिए थे. जो कि मैंने उनको कमाने के बाद लौटा दिए.’

इसके साथ महिला फुटबॉलर होने पर भी उन्होंने बात की. पोलामी ने बताया, 

‘इस मौहल्ले में बचपन में फुटबॉल खेलने वाली इकलौती लड़की थी. कुछ महिलाओं ने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि एक लड़की हॉफ पैंट में फुटबॉल खेल रही है लेकिन एक कोच ने मुझसे खेलते रहने के लिए कहा था.’

बताते चलें, पोलामी की वीडियो वायरल होने के बाद एक AIFF (ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन) ने भी उनसे कॉटेक्ट किया. इसके बारे में भी पोलामी ने बताया. उन्होंने कहा, 

‘एक आम प्लेयर होने के नाते, मुझे लगता है फेडरेशन ने मुझे नहीं सुना होगा. लेकिन मैं उनको दोष नहीं दे सकती क्योंकि मैं भी उन तक नहीं पहुंच पाई. जब वीडियो वायरल हुई, तब मुझे फेडरेशन से कॉल आया.’ 

उम्मीद करते हैं कि पोलामी का सपना अधूरा ना रहे. 

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