"आज लखनऊ में दो भाइयों का मिलन हो गया. दो नौजवान बेटे साथ आ गए. प्रगति कीसरस्वती के लिए गंगा और जमुना एक हो गए." ये सब हम नहीं लखनऊ में सपा-कांग्रेस कहरहे हैं. बाकी वहां हुआ क्या-क्या हम आपको यहां बता देते हैं. दोनों पहले गर्मजोशीसे गले मिले. दोनो ने लगभग एक जैसे कपड़े पहन रखे थे. सबसे पहले गाना बजा यूपी कीअब बात अलग है यूपी का अब ठाठ अलग है यूपी को ये साथ पसंद है. शुरुआत राहुल गांधीने की. अखिलेश यादव ने (हम नहीं कहेंगे कि डरते-डरते) राहुल को माइक दे दिया. मगरजब तक राहुल बोलते रहे अखिलेश यादव पेंसिल घुमाते रहे (वैसे इसे नर्वसाने का लक्षणमाना जाता है) राहुल ने कहा कि मोदी जी के शब्दों में ये PPP है prosperity, peace,progress (समृद्धि, शांति, तरक्की) इसमें अखिलेश ने आगे जोड़ा कि देश केप्रधानमंत्री यहीं से निकल जाते हैं. इन तीन P में चौथा P पीपल्स यानी जनता काजोड़ना चाहूंगा. सायकिल के साथ हाथ हो और हाथ के पास सायकिल हो तो रफ्तार कितनीज़्यादा होगी. हम दोनो रफ्तार के दो पहिए हैं. लाइन में खड़ा करने वालों को जवाबमिलेगा. लाइन में खड़े होकर लोग लाइन में लगने का जवाब देंगे. फिर राहुल ने कहा,मैने पहले ही कहा था अखिलेश अच्छा लड़का है अच्छा काम कर रहा है. बस उसे काम करनेनहीं दिया जा रहा है.अखिलेश और मेरा दोस्ती का रिश्ता है. हम नई तरीके की राजनीतिकरना चाहते हैं. फिर अखिलेश यादव मौज लेते दिखे और बोले. काम बोलता है और काम तोबोल ही रहा है. सर्दी देख ली, गर्मी देख ली बरसात देख ली, घोषणा पत्र भी देख लियापर अच्छे दिन नहीं दिखे. राहुल ने पहले गठबंधन न करने की बात पर कहा कि हिस्ट्रीबदलती रहती है उस समय गठबंधन गलत था अब सही है. मोदी जी और आरएसएस क्रोध की राजनीतिकरते हैं. उन्होंने ये भी कहा कि मैं व्यक्तिगत तौर पर मायावती की इज़़्ज़त करताहूं. मायवती पर भी अखिलेश ने हल्के फुल्के ढंग से टिप्पणी की. कहा अब मैं मायावतीको बुआ नहीं कहता. वैसे भी उनका चुनाव चिन्ह इतना बड़ा है कि उसके साथ साझा नहींकिया जा सकता. इसके बाद राहुल गांधी हर बात में गंगा और जमुना का रिफरेंस देते रहेऔर अखिलेश यादव बाउंसर टाइप सवालों को खुद पर झेलते रहे. अभी तो ये इस गठबंधन कीशुरुआत है. आगे देखना रोचक होगा कि प्रियंका गांधी और डिंपल यादव की भी ऐसी प्रेसकॉन्फ्रेंस होती है या नहीं.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें :मायावती किस मजबूरी मेें माफियाओें के साथ हाथ मिला रही हैंबागपत से ग्राउंड रिपोर्ट : यहां विधायक बनते हैं, सड़क नहीं बनती