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भारत को FIFA ने दिया बहुत बड़ा झटका, भारतीय खिलाड़ी कोई टूर्नामेंट नहीं खेल पाएंगे!

अंदरूनी पॉलिटिक्स की वजह से अंडर-17 महिला वर्ल्ड कप की मेजबानी छिन गई!

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FIFA & AIFF
भारतीय फुटबॉल टीम ( Twitter/ IndianFootball)
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रविराज भारद्वाज
16 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 16 अगस्त 2022, 12:57 PM IST)
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भारतीय फुटबॉल टीम को फेडरेशन के भीतर की पॉलिटिक्स का खामियाज़ा भुगतना पड़ा है. फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था FIFA ने भारतीय फुटबॉल को चलाने वाली संस्था ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) की तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. FIFA द्वारा ये कदम भारतीय फुटबॉल फेडरेशन में लंबे समय से चल रहे विवाद और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के दखल के चलते उठाया है.

FIFA के इस कदम के बाद भारतीय फुटबॉल को बड़ा झटका लगा है. बैन के चलते भारतीय मेंस और विमेंस फुटबॉल टीम किसी भी टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले पाएगी. इससे भी ज्यादा बुरी खबर ये है कि ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) के बैन होने की वजह से भारत को इसी साल होने वाली अंडर-17 महिला वर्ल्ड कप की मेजबानी से भी हाथ धोना पड़ा है.

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#FIFA ने क्या कहा?

FIFA ने बयान जारी कर कहा कि थर्ड पार्टीज के बहुत ज्यादा दखल की वजह से ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) को बैन करने का फैसला किया गया है. फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था ने जारी बयान में कहा,

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साथ ही FIFA की तरफ से ये भी कहा गया कि ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन से सस्पेंशन तभी हटेगा जब वो साथ मिलकर काम करना शुरू करेंगे. FIFA के मुताबिक, 

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गौरतलब है कि AIFF में फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स ( CoA) का दखल है और उनकी तरफ से ही भारतीय फुटबॉल का देखभाल की जा रही है.

#AIFF पर क्यों लगा बैन?

भारतीय फुटबॉल में विवाद की मुख्य वजह प्रफुल्ल पटेल हैं. पटेल 2009 में ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) के अध्यक्ष बने थे. इसके बाद से वो लगातार इस पद पर कायम थे. एक अध्यक्ष के तौर पर प्रफुल्ल पटेल का तीसरा कार्यकाल दिसंबर 2020 में खत्म हो गया था. जिसके बाद चुनाव के जरिए नया अध्यक्ष चुना जाना था. लेकिन प्रफुल्ल पटेल ने कुर्सी नहीं छोड़ी. वह बिना चुनाव के ही अध्यक्ष पद पर बने रहे.

इसको लेकर कोर्ट में शिकायत की गई थी. जिसके बाद मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रफुल्ल पटेल के पूरे बोर्ड को हटा दिया. साथ ही नया संविधान बनाने और चुनाव कराने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स (COA) का गठन किया था. जिसका काम अगले अध्यक्ष की नियुक्ति तक भारतीय फुटबॉल की देखभाल के साथ चुनाव कराना है. इस कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज AR दवे, पूर्व चीफ इलेक्शन कमिश्नर SY कुरैशी और भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान भास्कर गांगुली शामिल हैं. AIFF के 85 सालों के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि ये संस्था बिना किसी प्रेसिडेंट के चल रही है.

कुछ समय पहले ही भारतीय फुटबॉल में चल रहे विवाद को खत्म करने के लिए FIFA ने समय सीमा तय की थी. FIFA ने AIFF के संविधान को मंजूरी देने के लिये 31 जुलाई और चुनाव कराने के लिये 15 सितंबर तक का समय दिया था. लेकिन इस दिशा में उठाए गए कदमों से FIFA असंतुष्ट थी, जिस वजह से AIFF को बैन कर दिया गया.

#Indian football को क्या होगा नुकसान?

बैन के चलते भारतीय मेंस और विमेंस फुटबॉल टीम किसी भी टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले पाएगी. साथ ही भारत से अंडर-17 विमेंस वर्ल्ड कप की मेजबानी भी छिन गई है. जिसका आयोजन 11 अक्टूबर से शुरू होकर 30 अक्टूबर तक किया जाने वाला था. इसके साथ ही बैन लगने से भारतीय टीम अगले साल होने वाले AFC ASIAN CUP में भी भारतीय टीम हिस्सा लेने से चूक सकती है. हाल ही में भारत ने इस टूर्नामेंट के लिए क्वॉलिफाई किया था.

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