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एक कविता रोज: क्या आपने मनमोहन की कविताएं पढ़ी हैं?

पढ़िए उस कवि की कविताएं जिसे आप जानते नहीं हैं.

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प्रतीक्षा पीपी
21 मार्च 2016 (अपडेटेड: 21 मार्च 2018, 07:39 AM IST)
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मनमोहन की कुछ पंक्तियां हैं जिन्हें लिखकर मैंने अपने ऑफिस के डेस्क पर लगा रखा है. लोग आते हैं, पढ़ते हैं. एक ऐसी मुस्कान जिसे 'आह' और 'वाह' के ठीक बीच रखा जा सकता है, वो उनके चेहरों पर आ जाती है.
इन्हें ज्यादा लोग जानते नहीं हैं. या यूं कहिए, कि ये चाहते नहीं कि इन्हें ज्यादा लोग जानें. पढ़िए उस मनमोहन की कविता जो न अवॉर्ड लेते न लौटाते हैं, न फेसबुक पर लिखते हैं, न किसी लिटरेचर फेस्टिवल में जाते हैं.


 
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