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एक कविता रोज: उसकी कत्थई आंखों में हैं

'चाक़ू-वाक़ू, छुरियां-वुरियां, ख़ंजर-वंजर सब'

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प्रतीक्षा पीपी
19 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 6 मई 2016, 11:02 AM IST)
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आज हम आपको पढ़ा रहे हैं राहत इंदौरी कि सबसे ज्यादा पढ़ी, सुनी और रटी गई गजल. क्योंकि कभी-कभी इश्क कर लेना चाहिए.
  उसकी कत्थई आंखों में हैं जंतर-मंतर सब चाक़ू-वाक़ू, छुरियां-वुरियां, ख़ंजर-वंजर सब जिस दिन से तुम रूठीं मुझ से रूठे-रूठे हैं चादर-वादर, तकिया-वकिया, बिस्तर-विस्तर सब मुझसे बिछड़ कर वह भी कहां अब पहले जैसी है फीके पड़ गए कपड़े-वपड़े, ज़ेवर-वेवर सब आखिर मैं किस दिन डूबूंगा फ़िक्रें करते हैं कश्ती-वश्ती, दरिया-वरिया, लंगर-वंगर सब https://www.youtube.com/watch?v=l4QkMp_7fS4 ***

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