9 सितंबर 1950 के दिन इस दुनिया में आए एक इंकलाबी पंजाबी कवि अवतार सिंह संधू उर्फ'पाश' को खालिस्तानी उग्रवादियों ने 23 मार्च के दिन गोली मार दी थी. पाश की कलम सेडरे लोगों ने उनकी जान ले ली. उनकी कविताएं बेहद तल्ख और सार्थक राजनीतिक वक्तव्यहैं. अपनी कविताओं में वह लोहा खाने और बीवी को बहन कहने की बात करते हैं,और पेड़ों की लंबाई से वक्त मापने वाले लोगों को देश मानते हैं पढ़िए उनकी सबसेमशहूर-मकबूल कविता.-------------------------------------------------------------------------------- सबसे खतरनाक होता है- अवतार सिंह संधू 'पाश'मेहनत की लूट सबसे खतरनाक नहीं होती पुलिस की मार सबसे खतरनाक नहीं होती गद्दारी औरलोभ की मुट्ठी सबसे खतरनाक नहीं होतीबैठे-बिठाए पकड़े जाना, बुरा तो है सहमी-सी चुप में जकड़े जाना, बुरा तो है पर सबसेखतरनाक नहीं होताकपट के शोर में सही होते हुए भी दब जाना, बुरा तो है जुगनुओं की लौ में पढ़ना, बुरातो है मुट्ठियां भींचकर बस वक्त निकाल लेना, बुरा तो है सबसे खतरनाक नहीं होतासबसे खतरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना तड़प का न होना सब सहन कर जाना घर सेनिकलना काम पर और काम से लौटकर घर जाना सबसे खतरनाक होता है हमारे सपनों का मर जानासबसे खतरनाक वो घड़ी होती है आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो आपकी नजर में रुकी होतीहै सबसे खतरनाक वो आंख होती है जो सबकुछ देखती हुई जमी बर्फ होती है जिसकी नजरदुनिया को मोहब्बत से चूमना भूल जाती है जो चीजों से उठती अंधेपन की भाप पर ढुलकजाती है जो रोजमर्रा के क्रम को पीती हुई एक लक्ष्यहीन दोहराव के उलटफेर में खोजाती हैसबसे खतरनाक वो चांद होता है जो हर क़त्ल, हर कांड के बाद वीरान हुए आंगन में चढ़ताहै लेकिन आपकी आंखों में मिर्चों की तरह नहीं गड़ता हैसबसे खतरनाक वो गीत होता है आपके कानों तक पहुंचने के लिए जो मरसिए पढ़ता है आतंकितलोगों के दरवाजों पर जो गुंडों की तरह अकड़ता है सबसे खतरनाक वह रात होती है जोज़िंदा रूह के आसमानों पर ढलती है जिसमें सिर्फ उल्लू बोलते और हुआं हुआं करतेगीदड़ हमेशा के अंधेरे बंद दरवाजों-चौखटों पर चिपक जाते हैंसबसे खतरनाक वो दिशा होती है जिसमें आत्मा का सूरज डूब जाए और जिसकी मुर्दा धूप काकोई टुकड़ा आपके जिस्म के पूरब में चुभ जाएमेहनत की लूट सबसे खतरनाक नहीं होती पुलिस की मार सबसे खतरनाक नहीं होती गद्दारी औरलोभ की मुट्ठी सबसे खतरनाक नहीं होतीसुनिए, कुलदीप सरदार की आवाज़ में यह कविता.https://www.youtube.com/watch?v=IhAGAQh36qI--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:गौरी लंकेश की मौत पर लिखी वरुण ग्रोवर की कविता एक कविता रोज: इरशाद कामिल जो कहतेहैं, 'तुम साथ हो या न हो, क्या फर्क है!' 'मैं रथ का टूटा हुआ पहिया हूं, लेकिनमुझे फेंको मत'