कहते हैं कि कोई देश जब अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा होता है, उस समय वहां सबसेज्यादा साहित्य रचा जा रहा होता है. ऐसे ही मुश्किल समय में लिखने वाले एक कवि हैं,माखनलाल चतुर्वेदी. देशभक्त और ओजपूर्ण. इनकी कलम ही इसका हथियार थी. अंग्रेजों केखिलाफ खूब लिखते थे.1921 के असहयोग आंदोलन में देश के लिए जेल भी गए. आज इनकी बरसीहै. इस मौके पर हम लाए हैं इनकी सबसे पॉपुलर कविता, सीधे आपके बचपन से.-------------------------------------------------------------------------------- पुष्प की अभिलाषा- चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ, चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंधप्यारी को ललचाऊँ, चाह नहीं सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ, चाह नहीं देवों केसिर पर चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ, मुझे तोड़ लेना बनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक!मातृ-भूमि पर शीश- चढ़ाने, जिस पथ पर जावें वीर अनेक! ***