एक कविता रोज: 'क्या गलत है जो मैं दीवाना हुआ?'
मजरूह सुल्तानपुरी की पुण्यतिथि पर पढ़िए उनकी एक ग़ज़ल.
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फोटो - thelallantop
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'विविध भारती' वाले दिनों में, एक ही दिन में पचासों बार मजरूह सुल्तानपुरी का नाम सुनने को मिल जाता. बॉलीवुड के सबसे बड़े गीतकारों में से एक जो रहे हैं. हालांकि इनकी पहचान पहले एक उर्दू शायर के रूप में है, बाद में एक गीतकार की तरह. आजादी के बाद सिनेमाई संगीत के लगभग 25 साल तक मजरूह बॉलीवुड लिरिक्स पर राज करते रहे. आज ही के दिन सन 2000 में इनकी मौत हो गई. इनकी पुण्यतिथि पर पढ़िए इनकी एक ग़ज़ल.
(वाणी प्रकाशन से साभार)
पहले सौ बार इधर और उधर देखा है
मजरूह सुल्तानपुरी - पहले सौ बार इधर और उधर देखा है तब कहीं डर के तुम्हें एक नज़र देखा है हम पे हंसती है जो दुनिया उसे देखा ही नहीं हम ने उस शोख को ऐ दीदा-ए-तर देखा है आज इस एक नज़र पर मुझे मर जाने दो उस ने लोगों बड़ी मुश्किल से इधर देखा है क्या ग़लत है जो मैं दीवाना हुआ, सच कहना मेरे महबूब को तुम ने भी अगर देखा है ***
(वाणी प्रकाशन से साभार)
