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दिल एक कुत्ता है, गया है बागों में, पड़े जो पत्थर फिर, गली को लौटेगा

एक कविता रोज़ में आज पढ़िए पुनीत शर्मा की कविता 'लौटेगा'

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26 मई 2016 (अपडेटेड: 26 मई 2016, 12:08 PM IST)
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एक कविता रोज़ में आज पढ़िए पुनीत शर्मा की कविता 'लौटेगा'. पुनीत  इंदौर के रहने वाले हैं.  हाल मुकाम मुंबई. पढ़ाई की बायोटेक की. मगर नौकरी की इश्तेहार लिखने की. गाने भी लिखते हैं. औरंगजेब और रिवॉल्वर रानी के नगमे रचे. हर वक्त सिनेमा की पिनक में रहते हैं. नशा यूं ही तारी रहे. पढ़िए कविता.
 

घटा बन के पानी, ज़मीं को लौटेगा, उसे भी जाने दो, यहीं को लौटेगा

इकाई ये किसकी, दहाई ये किसकी, हिसाब हम सभी का, बही को लौटेगा

दरख़्त बरगद का, जड़ें बढ़ा के फिर, जहां से उपजा था, वहीं को लौटेगा

जो रोज़ दरिया में, डुबाता था नेकी, किसको पता था वो, बदी को लौटेगा

दिल एक कुत्ता है, गया है बागों में, पड़े जो पत्थर फिर, गली को लौटेगा

जो रूह लौटी तो, वो गंगा लौटा है, गले का मोती भी, नदी को लौटेगा


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