आज पढ़िए सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता 'खाली समय में'. और सुनिए इसे केतन कीआवाज में.--------------------------------------------------------------------------------https://www.youtube.com/watch?v=aY02qr4JdQs&feature=youtu.be खाली समय में, बैठकर ब्लेड से नाखून काटें, बढ़ी हुई दाढ़ी में बालों के बीच की खाली जगह छांटें, सरखुजलाएं, जम्हुआएं, कभी धूप में आएं, कभी छांह में जाएं, इधर-उधर लेटें, हाथ-पैरफैलाएं, करवटें बदलें दाएं-बाएं, खाली कागज पर कलम से भोंडी नाक, गोल आंख, टेढ़ेमुंह की तस्वीरें खींचें बार-बार आंखें खोलें बार-बार मींचें, खांसें, खंखारें,थोड़ा-बहुत गुनगुनाएं, भोंडी आवाज में, अखबार की खबरें गाएं, तरह-तरह की आवाज गले सेनिकालें, अपनी हथेली की रेखाएं देखें-भालें, गालियां दे-दे कर मक्खियां उड़ाएं, आंगनके कौओं को भाषण पिलाएं, कुत्ते के पिल्ले से हाल-चाल पूछें, चित्रों में लड़कियोंकी बनाएं मूंछें धूप पर राय दें, हवा की वकालत करें, दुमड़-दुमड़ तकिए की जो कहिएहालत करें, खाली समय में भी बहुत से काम हैं किस्मत में भला कहां लिखा आराम है! ***