अविनाश
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एक दिल्ली जो हम सब अपने साथ गांव से लाए खाली कमरे के कोने में पड़ी हांफ रही हैखुरदरे फर्श पर एक काला रेडियो बोल रहा हैचंद काग़ज़ सादेजिन पर हम लंबी कहानियां लिखेंगेपीले बेरोज़गार दिनों के धब्बे बटोर रहे हैंएक विचार तो ये भी है कि पहाड़ पर एक घर होऔर दिमाग़ में लंबी खामोशीये भी कुछ वैसा ही हैजैसे एक अच्छी नौकरी, ऊंचा ओहदाउन लोगों के फार्म हाउस जैसा जिनका दिल्ली में भी अपना घर होता है!गांव में चार कट्ठा ज़मीन हैएक टूटता हुआ पुराना घरसंदूक में रखे कुछ सुनहरे बर्तन सदियों की धूल में सनेसब कुछ जैसे एक भरोसा कि जेब भरी हुई हैलेकिन अच्छी खामखयाली गुलज़ार कहें तभी ठीक हैउनके पास हिंदी फिल्में हैं, एक बड़ा प्रकाशक है और डूबी हुई आवाज़ हैहम किरायेदार हैं दीवारों से झड़ती हैं परतेंसुबह पानी के खाली गिलास सी प्यासी, जलते कंठों की कूक में लिपटी हुईअभी पूरा दिन पड़ा हैदेह थकी सदियों सी बेजानकुछ लोग कभी कोई काम नहीं कर पातेहाथों की उन लकीरों की तरह जो बेजान होकर भी ज़िंदा दिखते हैंउन कुछ लोगों के पीछे हम बहुत सारे रोज़ खड़े हो जाते हैंऔर दिल्ली है एक छोटा सा दफ्तरजहां सिफारिशें हैं, रिश्वत है, देह व्यापार है, दलाली हैहम सिर्फ कवि नहीं हो सकतेहम भी हो सकते हैं बेईमानलेकिन वे बड़े बेईमान हमारी ख्वाहिशों से भी बहुत बड़े हैंनाम अमर सिंह, हुनर चतुराई, धंधा राजकाजखूब चमक रहा है सब कुछबेडौल खरबूज-सी देह पर सज रहे हैं चमकीले सूटजीभ पर लपलपाते हुए शेर मीडिया की वाहवाही लूटते हैंकमरे में बहुत पुरानी चादर मुड़ी-मुड़ी सीलकड़ी की एक पुरानी कुर्सीबरसों पुराना अंधेरा जाना पहचाना किसी उजास से नफ़रत करताचाहतों के पंख होते हैंप्रतिभा की दलील होती हैएक अच्छा सिनेमा उतनी ही बड़ी हसरत है जैसे मीना कुमारीएक अच्छी कविता उतनी ही बड़ी हसरत है जैसे मुक्तिबोधएक अच्छी कहानी उतनी ही बड़ी हसरत है जैसे प्रेमचंदएक अच्छी राजनीति उतनी ही बड़ी हसरत है जैसे भगत सिंहएक अच्छे देश को और अच्छा बनाने की हसरत अभी बाक़ी हैअभी तो ये दलालों के जबड़े में है!