'मां पर नहीं लिख सकता कविता' कहते हुए ये आदमी दुनिया भर में मां पर लिखी गईंकविताओं में से सबसे सुंदर कविता लिख गया. आज हम इनकी एक और कविता 'चीते को जुकामहोने से' पढ़ा रहे हैं.--------------------------------------------------------------------------------चीते को जुकाम होने से- बच्ची पूछती है पापा चीते को जुकाम हो जाएगा तो वह कहां जाएगा क्या मांगेगा किससेक्या ऐसा हो सकता है पापा? मैं कहता कुछ नहीं हूं सोचता हूं इस्पात के बीहड़ सपनोंको देखते देखते कितनी थक गईं हैं आंखें ईंट के भत्तों के पास बैठे बैठे तप गए हैंकितने दिन अब बच्ची कि सोच में यह जो जुकाम से पीड़ित है चीता सचमुच होगा दयनीय बेहदशायद अधिक खाने से हुआ हो ऐसा. वह अब पूछती है क्या चीता खांसता-छींकता है? मैंकहता हूं- हां-मैदान कांपते हैं खोह झन्ना जाती है वन संकट में पड़ा हुआ शायददावाग्नि की चपेट में आ जाए सब कुछ. वह हंसती है पूछते हुए क्या चीता माफ़ी नहींमांग सकता? उसके उपाय से चकित हो उठता हूं मैं हां यही ठीक है तो काठ कि चिड़ियाओंमिट्टी के वन्य पशुओं देखो आज खुद चीता माफ़ी मांगता है बच्ची हंसती है मजे में उड़तीचिड़िया जैसी कहती है जाओ माफ़ किया चीते को अब जुकाम ठीक हुआ उसका मैं उसकी ख़ुशी सेस्तब्ध सोचता हूं अब इसे कैसे समझाऊं कि गद्दी नशीन होते ही भयावह ढंग से हिंसक होजाते हैं जब गिड़गिड़ाते हुए मेमने तो यह तो चीता है कितना भूखा हो जाएग जुकाम ठीक होजाने के बाद ***