जून की 23 तारीख को साल 1975 में पैदा हुए नीलोत्पल मध्य प्रदेशीय हैं. कालिदास कीनगरी उज्जैन के वासी हैं. 'अनाज पकने का समय' और 'पृथ्वी को हमने जड़ें दीं' जैसेकविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. आज एक कविता रोज़ में पेश है नीलोत्पल की एककविता... पूरी रात बारिश गिरती रही मैं छू नहीं पाया तुम्हारे छोड़े गए पत्रों में समुद्रीलहरों का तेज बहाव और दूर तक हिलते मस्तूल जिनका पीछा मैं जिद्दी पतंगे-सा करता हूंकोई मौसम समय का रेहन नहीं सिर्फ बारिश जानती है समय का उधार मैं पीछा करता हूंलकड़ी के बुझ रहे अंतिम कोयले तक कितना असंयमित है अनेकों बार लहर से गिरना यहधैर्य तुममें है तुम जीती हो उन शब्दों को जो मेरे नहीं प्रेम की प्रतिज्ञाएं अधूरीरहती हैं तुम्हारे शब्द एक रास्ता हैं गिरती बारिश में गुम हो जाने का मैं उनप्रतिज्ञाओं से होकर आता हूं उन गुम रास्तों से लौटता हूं दूर... गिरती हुई बारिशकितनी अच्छी लगती है वह कोना भी भीग गया जहां पड़े-पड़े मेरी इच्छाएं मृत होने सेबच गई हैं तुम्हारे प्रेम की अंतहीन बारिश मिट्टी का अंतर आलाप है