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'जिसने शोषण को तोड़ा शासन मोड़ा है, नहीं मरेगा'

केदारनाथ अग्रवाल की पुण्यतिथि पर उन्हें पढ़िए 'एक कविता रोज़' में.

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प्रतीक्षा पीपी
22 जून 2016 (अपडेटेड: 22 जून 2016, 09:25 AM IST)
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जन्म बांदा में हुआ. पढ़ाई इलाहाबाद में. मार्क्सवादी फलसफे में यकीन रखने वाले केदारनाथ अग्रवाल अपनी कविता 'हवा हूं हवा मैं बसंती हवा हूं' से स्कूल के  लोगों की जबान पर चढ़े. सीधे-सादे शब्दों में कविता लिखने वाले केदारनाथ अग्रवाल हमेशा लोगों के प्रिय रहे. 
 

जो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ है

जो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ है तूफ़ानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ है जिसने सोने को खोदा, लोहा मोड़ा है जो रवि के रथ का घोड़ा है वह जन मारे नहीं मरेगा नहीं मरेगा जो जीवन की आग जला कर आग बना है फौलादी पंजे फैलाए नाग बना है जिसने शोषण को तोड़ा शासन मोड़ा है जो युग के रथ का घोड़ा है वह जन मारे नहीं मरेगा नहीं मरेगा *** अगर आप भी कविता/कहानी लिखते हैं, और चाहते हैं हम उसे छापें, तो अपनी कविता/कहानी टाइप करिए, और फटाफट भेज दीजिए lallantopmail@gmail.com पर. हमें पसंद आई, तो छापेंगे. और हां, और कविताएं पढ़ने के लिए नीचे बने ‘एक कविता रोज़’ टैग पर क्लिक करिए.

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