आग्नेय हिंदी के चर्चित कवि हैं. 'अपने ही खिलाफ', 'मेरे बाद मेरा घर', 'लौटता हूंउस तक' और 'सिरहाने मीर के' जैसे कविता-संग्रहों के कवि आग्नेय भोपाल में रहते हैंऔर विश्व कविता की पत्रिका 'सदानीरा' के संपादक हैं. एक उम्र से वाकिफ वरिष्ठ कविआग्नेय का कल जन्मदिन था. आज उन्हें शुभकामनाएं देते हुए पेश है एक कविता रोज़ मेंउनकी एक कविता... स्त्रियों के समूह में मैं सुखी नहीं होता हूं स्त्रियों के इस समूह से मैं एक हीस्त्री को चुनता हूं और उसे ही दिन-रात प्यार करता हूं एक ही स्त्री का सामीप्यमुझे तृप्ति देता है कार्यों के आधिक्य से थककर सामाजिक व्यस्तता से ऊबकर औरयौन-व्याधियों से डरकर मेरा प्रेम उसके अग्नि-वक्ष में रचनाशील होता है उसके शरीरमें रूप नहीं है उसके हृदय में प्रेम नहीं है उसके नेत्रों में वसंत नहीं है फिर भीस्त्रियों के समूह से एक ही स्त्री को चुनकर एक काव्य-संसार की रचना करता हूं उसकेअतिरिक्त मेरे प्रेम की भाषा समझने के लिए सारे संसार में किसी भी स्त्री के पासहृदय नहीं है