लोगों ने अपना ज़मीर शैतान को बेच दिया है: दयानिधि मारन
खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे, हार गए तो अब जयललिता की पार्टी को कोस रहे हैं.
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फ़ोटो क्रेडिट: रायटर्स
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तमिलनाडु में अम्मा जीत गयीं. इस खबर को पूरे 24 घंटे बीत चुके हैं. अब तक लोगों ने भी ये बात पचा ली है.
लेकिन कल मतलब 19 मई 2016 की सुबह. वोटों की काउंटिंग शुरू होने से पहले तक DMK का हर स्पीकर मान कर बैठा था कि पूरा राज्य AIADMK के खिलाफ है. राज्य के लिए यह बहुत बड़ी बात है. क्योंकि हिस्ट्री में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. बस इसी सोच के चलते DMK के कार्यकर्ता बहुत कॉन्फिडेंट थे. DMK की जीत सौ प्रतिशत पक्की थी. इसीलिए 19 मई की सुबह जब वोटों की काउंटिंग होनी थी,लोग DMK पार्टी के मुख्यालय, अन्ना अरिवालायम में इकट्ठे होने लगे थे. चार दिनों की तेज़ बारिश के बाद सुबह मौसम भी कुछ साफ़ हो गया था. इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोग भी आ रहे थे.
DMK के एक बहुत उत्साही समर्थक हैं करप्पू. कल अपने गले में लाल और काले रंग का मफलर डाले बहत खुश थे. मुस्कुरा कर सबसे बातें कर रहे थे. बोल रहे थे, "अब तो सूरज भी खिल गया है, हम लोग ज़रूर जीतेंगे, कलाईनार (करुणानिधि) ही हमारे मुख्यमंत्री बनेंगे" वहां पर मौजूद हर कोई यही सोच रहा था. क्योंकि सारे प्रेडिक्शन यही कह रहे थे.
इलेक्शन से कुछ दिन पहले ही करूणानिधि ने प्रदेश का एक हाई स्पीड दौरा भी किया था. उस दौरान लोगों की तरफ से उनको बहुत प्यार मिला. ऐसा सपोर्ट देख कर वो गदगद से हो गए थे. अपने कार्यकर्ताओं से उन्होंने यहां तक कह दिया था कि वो लोग तैयार रहें. लोगों का इतना भरोसा उनके साथ है. इसलिए अगर पार्टी की जीत के लिए किसी भी तरह की कुर्बानी देनी पड़े तो पीछे ना हटें. DMK से जुड़े हर शख्स को पूरा यकीन था कि जीत उनकी ही होगी.
सुबह 9.30 बजे: वोटो की काउंटिंग थी DMK - 8 AIADMK - 6, DMK - 10 AIADMK - 7, DMK - 12 AIADMK - 8.
समर्थक और कार्यकर्ता बाजों-गाजों के साथ तैयार थे. इंतेज़ार में थे कि फाइनल नतीजा निकले और जश्न की शुरुआत की जाए. पार्टी के ऑफिस में अन्ना की मूर्ति को फूलों की माला भी पहना दी गयी थी. सब कुछ बिलकुल वैसा ही चल रहा था जैसा प्लान किया गया था.
करुणानिधि के घर पर भी खूब तैयारियां चल रही थीं. रिजल्ट आने के पहले वाली घबराहट सबके चेहरे पर दिख रही थी. कार्यकर्ताओं को साफ़-साफ़ ये कहा गया था कि फ़िलहाल किसी भी तरह का कोई जश्न ना मनाया जाये. कई बार जीत से पहले अतिउत्साही हो जाने से बनता हुआ काम भी बिगड़ जाता है. इसलिए सभी को आखिरी नतीजे आने का इंतज़ार करने को कहा जा रहा था. करुणानिधि की बेटी कनिमोझी भी अपने पिता के साथ थीं. वो भी नतीजों को ले कर बेचैन हो रही थीं. उनके साथ वहां पर स्टालिन और दयानिधि मारन भी आये थे.

credit: gifey
करीब 10.30 बजे: खेल पलट गया. जीत बस आते-आते रह गयी. DMK हारने लगी. AIADMK ने धीरे-धीरे बढ़त बनानी शुरू कर दी.
11.30 बजे: AIADMK पार्टी लगभग हर चुनाव क्षेत्र में आगे थी.
करूणानिधि के घर, गोपालापुरम में एकदम सन्नाटा हो गया था. समर्थक भी अब छटने लग गए. जो अब तक इतना जश्न मनाने के मूड में थे, सबके मुंह में दही जम गया. जो पटाखे, मिठाइयां और शॉल वगैरह सब लाये गए थे सब धीरे-धीरे से हटाये जाने लगे. सबके चेहरे लटक गए थे. बहुत सारा गुस्सा था. अफ़सोस था. दुःख था. किसी को इस हार का यकीन ही नहीं हो रहा था.
करूणानिधि का गार्ड भी बहुत गुस्से में था. गुस्से में बोल रहा था, 'हम लोगों को कांग्रेस को 41 सीटें देनी ही नहीं चाहिए थीं. उन्हीं की वजह से सब गड़बड़ हो गया. बहत आलसी लोग हैं वो लोग. कोई मेहनत नहीं की. कुछ काम नहीं किया. हम लोगों को अकेले ही चुनाव में लड़ना चाहिए था'.
लोग चिल्ला कर अपने नेता का हौसला भी बढ़ा रहे थे.
दयानिधि मारन ही एक ऐसे शख्स थे जिन्होंने DMK का बचाव किया. उन्होंने इसे AIADMK की बेईमानी बताया. बोले,
लेकिन कल मतलब 19 मई 2016 की सुबह. वोटों की काउंटिंग शुरू होने से पहले तक DMK का हर स्पीकर मान कर बैठा था कि पूरा राज्य AIADMK के खिलाफ है. राज्य के लिए यह बहुत बड़ी बात है. क्योंकि हिस्ट्री में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. बस इसी सोच के चलते DMK के कार्यकर्ता बहुत कॉन्फिडेंट थे. DMK की जीत सौ प्रतिशत पक्की थी. इसीलिए 19 मई की सुबह जब वोटों की काउंटिंग होनी थी,लोग DMK पार्टी के मुख्यालय, अन्ना अरिवालायम में इकट्ठे होने लगे थे. चार दिनों की तेज़ बारिश के बाद सुबह मौसम भी कुछ साफ़ हो गया था. इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोग भी आ रहे थे.
DMK के एक बहुत उत्साही समर्थक हैं करप्पू. कल अपने गले में लाल और काले रंग का मफलर डाले बहत खुश थे. मुस्कुरा कर सबसे बातें कर रहे थे. बोल रहे थे, "अब तो सूरज भी खिल गया है, हम लोग ज़रूर जीतेंगे, कलाईनार (करुणानिधि) ही हमारे मुख्यमंत्री बनेंगे" वहां पर मौजूद हर कोई यही सोच रहा था. क्योंकि सारे प्रेडिक्शन यही कह रहे थे.
पार्टी के घोषणापत्र में राज्य के विकास के लिए बहुत सारे प्लान थे. करुणानिधि में बेटे स्टालिन का मानना था कि उनका 'नामाकु नामे' दौरा पूरी तरह से सफल रहा. उसका फायदा उनको वोटिंग में मिला.प्री पोल, एग्जिट पोल, सारे विश्लेषकों की बातें, उनके एनालिसिस, सब के हिसाब से DMK का जीतना तय था.
इलेक्शन से कुछ दिन पहले ही करूणानिधि ने प्रदेश का एक हाई स्पीड दौरा भी किया था. उस दौरान लोगों की तरफ से उनको बहुत प्यार मिला. ऐसा सपोर्ट देख कर वो गदगद से हो गए थे. अपने कार्यकर्ताओं से उन्होंने यहां तक कह दिया था कि वो लोग तैयार रहें. लोगों का इतना भरोसा उनके साथ है. इसलिए अगर पार्टी की जीत के लिए किसी भी तरह की कुर्बानी देनी पड़े तो पीछे ना हटें. DMK से जुड़े हर शख्स को पूरा यकीन था कि जीत उनकी ही होगी.
कब क्या हुआ
सुबह 8.30 बजे : DMK के ऑफिस में बहत उत्साह और शोर-गुल का माहौल था. लोग ख़ुशी में झूम रहे थे. लाल, काले झंडे फहराए जा रहे थे. DMK पोस्टल वोट काउंट में आगे चल रही थी.सुबह 9.30 बजे: वोटो की काउंटिंग थी DMK - 8 AIADMK - 6, DMK - 10 AIADMK - 7, DMK - 12 AIADMK - 8.
समर्थक और कार्यकर्ता बाजों-गाजों के साथ तैयार थे. इंतेज़ार में थे कि फाइनल नतीजा निकले और जश्न की शुरुआत की जाए. पार्टी के ऑफिस में अन्ना की मूर्ति को फूलों की माला भी पहना दी गयी थी. सब कुछ बिलकुल वैसा ही चल रहा था जैसा प्लान किया गया था.
करुणानिधि के घर पर भी खूब तैयारियां चल रही थीं. रिजल्ट आने के पहले वाली घबराहट सबके चेहरे पर दिख रही थी. कार्यकर्ताओं को साफ़-साफ़ ये कहा गया था कि फ़िलहाल किसी भी तरह का कोई जश्न ना मनाया जाये. कई बार जीत से पहले अतिउत्साही हो जाने से बनता हुआ काम भी बिगड़ जाता है. इसलिए सभी को आखिरी नतीजे आने का इंतज़ार करने को कहा जा रहा था. करुणानिधि की बेटी कनिमोझी भी अपने पिता के साथ थीं. वो भी नतीजों को ले कर बेचैन हो रही थीं. उनके साथ वहां पर स्टालिन और दयानिधि मारन भी आये थे.
हाथ को आया मुंह ना लगा

credit: gifey
करीब 10.30 बजे: खेल पलट गया. जीत बस आते-आते रह गयी. DMK हारने लगी. AIADMK ने धीरे-धीरे बढ़त बनानी शुरू कर दी.
11.30 बजे: AIADMK पार्टी लगभग हर चुनाव क्षेत्र में आगे थी.
करूणानिधि के घर, गोपालापुरम में एकदम सन्नाटा हो गया था. समर्थक भी अब छटने लग गए. जो अब तक इतना जश्न मनाने के मूड में थे, सबके मुंह में दही जम गया. जो पटाखे, मिठाइयां और शॉल वगैरह सब लाये गए थे सब धीरे-धीरे से हटाये जाने लगे. सबके चेहरे लटक गए थे. बहुत सारा गुस्सा था. अफ़सोस था. दुःख था. किसी को इस हार का यकीन ही नहीं हो रहा था.
करूणानिधि का गार्ड भी बहुत गुस्से में था. गुस्से में बोल रहा था, 'हम लोगों को कांग्रेस को 41 सीटें देनी ही नहीं चाहिए थीं. उन्हीं की वजह से सब गड़बड़ हो गया. बहत आलसी लोग हैं वो लोग. कोई मेहनत नहीं की. कुछ काम नहीं किया. हम लोगों को अकेले ही चुनाव में लड़ना चाहिए था'.
लोग चिल्ला कर अपने नेता का हौसला भी बढ़ा रहे थे.
दोपहर 2.30 बजते बजते बचे-कुचे लोग भी अपना बिस्तर बांधने लगे. धीरे-धीरे कलाईनार का घर खाली होने लगा. बेटे स्टालिन और बेटी कनिमोजी भी मीडिया से बच कर निकलने लगे. मीडिया वाले जब उनको पकड़ने लगे, कनिमोझी फाइनल नतीजों का इंतज़ार करने की बात करते हुए निकल गयीं."थलाइवा (बॉस), हमारे लिए आप ही जीते हो. अगर पार्टी हारी है तो नुकसान लोगों का हुआ है. हम आपके साथ हैं. "
दयानिधि मारन ही एक ऐसे शख्स थे जिन्होंने DMK का बचाव किया. उन्होंने इसे AIADMK की बेईमानी बताया. बोले,
'तमिलनाडु के लोग असल में DMK की ही सरकार चाहते थे. लेकिन जयललिता की पार्टी ने करोड़ों रुपये उड़ाए और वोट खरीद लिए. एग्जिट पोल में DMK ही आगे थी. हर कोई DMK की ही जीत की बात कर रहा था. जयललिता की पार्टी वाले घबरा गए. इसीलिए आखिरी समय में इतने पैसे उड़ाए. इन लोगों ने अपना ज़मीर शैतान को बेच दिया.'बस एक मलाल सबके मन में रह गया. इस दौरान करुणानिधि किसी को कहीं दिखाई नहीं पड़े.

