पापा सेना में हवलदार, मां ने सोने की चेन बेची.. ध्रुव जुरेल ने बताई टीम इंडिया तक पहुंचने की कहानी
टीम में नाम देखकर जुरेल इमोशनल हो गए थे. सुख के आंसू फूटे. कहा, ये सपने के सच होने जैसा है.

शुक्रवार, 12 जनवरी को जब भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) ने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेले जाने वाले टेस्ट के लिए टीम की घोषणा की, तो शमी और ईशान किशन का नाम न देखकर फ़ैन्स चौंके. पर इस टीम में उत्तर-प्रदेश से आने वाले 22 साल के एक लड़के को मौक़ा मिला है. नाम, ध्रुव चंद जुरेल. इंडिया की स्क्वॉड के नए-नवेले विकेटकीपर-बैटर. टीम में नाम देखकर जुरेल (Dhruv Jurel) इमोशनल हो गए थे. सुख के आंसू फूटे. कहा, ये सपने के सच होने जैसा है. अब उनका एक इंटरव्यू आया है, जहां उन्होंने अपनी पूरी जर्नी शेयर की है.
मां ने चेन बेच कर किट दिलाईदैनिक जागरण के अभिषेक त्रिपाठी को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनके पिता सेना में हवलदार थे. जब वो वरिष्ठ अफ़सरों को सैल्यूट मारते थे, तो जुरेल को अच्छा नहीं लगता था. तभी उन्होंने ठान ली, कुछ ऐसा बनेंगे कि किसी को सैल्यूट न मारना पड़े.
गली-मोहल्ले में क्रिकेट खेलते थे. लेकिन जब पिता से कहा कि क्रिकेट खेलना है, तो उन्होंने मना कर दिया. ये कहते हुए कि सरकारी नौकरी करो. घर की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं थी. बताते हैं,
“बाद में पापा मान गए. उन्होंने किसी से उधार लेकर मेरे लिए ₹800 का बल्ला ख़रीदा था. 2 हफ़्ते बाद कोई टूर्नामेंट था, तब मैंने पिताजी को बोला कि मुझे क्रिकेट किट चाहिए. पापा ने पूछा, 'कितने की आएगी?'. जब मैंने बताया 6000-7000 की, तो वो चौंक गए और उन्होंने मुझे क्रिकेट खेलने से ही मना कर दिया. ये रक़म हमारे लिए बहुत ज़्यादा थी. फिर मैंने मां से किट की ज़िद की. ख़ुद को बाथरूम में बंद तक कर लिया. मां तो मां होती है. उनके पास एक ही सोने की चेन थी और उन्होंने उसे बेचकर मेरी पहली क्रिकेट किट ख़रीदी.”
ध्रुव जुरेल ने विदर्भ के ख़िलाफ़ 2022 रणजी ट्रॉफी मैच में उत्तर प्रदेश के लिए डेब्यू किया. तब से फ़र्स्ट-क्लास क्रिकेट में जुरेल का करियर अच्छा रहा है. 15 मैचों में 46.47 की औसत और 56.63 की स्ट्राइक रेट से कुल 790 रन बनाए. इसमें एक शतक और पांच अर्धशतक जुड़े हुए हैं. दिसंबर, 2022 में नागालैंड के होम ग्राउंड में नागालैंड के ख़िलाफ़ इस युवा तुर्क ने 249 रन बनाए थे. अपना करियर बेस्ट.
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टीम में सेलेक्ट होने का पूरा श्रेय वो अपने माता-पिता को देते हैं. कहा,
"पहले मुझे नहीं एहसास नहीं हुआ, लेकिन बाद में लगा कि मेरी मां ने मेरे लिए कितना बड़ा त्याग दिया था. पापा ने भी मुझे हमेशा आगे बढ़ाया.
मैं अंडर-14 खेला, उसके बाद अंडर-16 खेला. UPCA ने मुझे सपोर्ट किया. राजीव शुक्ला सर ने बहुत मदद की. उसके बाद मैं अंडर-19 वर्ल्ड कप खेला. IPL में खेला. मैंने हमेशा ही कोशिश की है कि जब भी मुझे मौक़ा मिले, मैं अपना शत-प्रतिशत दूं.
..चयन के बारे में सोचा नहीं था. मैंने बस परफ़ॉर्मेंस पर फोकस किया. पापा को जब बताया, तो बहुत ख़ुश हुए और पूछा कि कौन सी भारतीय टीम में चयन हुआ है?"
ये दौर टी-20 का है. जुरेल 22 साल के हैं और टेस्ट के लिए चुने गए हैं. तो उनसे टी-20 के क्रेज़ के बारे में पूछा गया, तो दो-टूक बोले कि असली क्रिकेट तो टेस्ट क्रिकेट ही है. इसी में प्रतिभा की असली परख होती है.
अंत में ध्रुव ने बताया कि पूर्व-भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी उनके आदर्श हैं. ये बात वो पहले भी कह चुके हैं. बाक़ी जिन लोगों को अब तक टीवी पर देखा - राहुल द्रविड़, विराट कोहली, रोहित शर्मा - उनके साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करेंगे, इसके लिए उत्सुक हैं.

