जब इवेंट के बाद पाकिस्तानी वेटलिफ्टर के साथ पार्टी करने चला गया ब्रॉन्ज़ मेडलिस्ट भारतीय!
सिद्धू मूसेवाला के जबरा फैन हैं दोनों दोस्त.

वेटलिफ्टिंग की +109kg कैटेगरी में गुरुवार, 4 अगस्त को भारत के गुरदीप सिंह ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता. इस कैटेगरी का गोल्ड पाकिस्तान के वेटलिफ्टर मुहम्मद नूह दस्तगीर बट के खाते में गया. नूह ने इस मुकाबले में कुल 405 किलोग्राम वज़न उठाकर गोल्ड जीता. लेकिन इस मुकाबले की सबसे खास बात ये नहीं रही. इस मुकाबले की खास बात रही इसके बाद का सेलिब्रेशन. इवेंट के बाद भारत और पाकिस्तान के रेसलर्स ने एक साथ जश्न मनाया, और सिद्धू मूसेवाला के गाने पर एक साथ डांस भी किया.
इन दोनों ही एथलीट्स के बीच मैच के बाद एक शानदार बॉन्डिंग देखने को मिली. क्योंकि भले ही सरहदें बंटी हुई हों. लेकिन दोनों का कल्चर, मातृभाषा बिल्कुल एक है. और दोनों ही सरहद के दोनों तरफ के पंजाब से आते हैं. गोल्ड मेडलिस्ट नूह पाकिस्तान के गुजरांवाला से आते हैं. वहीं भारत के गुरदीप खन्ना डिस्ट्रिक्ट के रसुलरा गांव से आते हैं. दोनों के घरों के बीच की दूरी भी महज़ 250km है. यानी जितना दिल्ली से जयपुर है, बस उतना ही.
Gurdeep Singh को कैसे जानते हैं Nooh Dastgir Buttये दोनों ही रेसलर्स अपने जूनियर्स के दिनों से ही एक दूसरे को जानते हैं. और दोनों के बीच ऐसी ही अच्छी दोस्ती शुरुआत से है. मेडल जीतने के बाद इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर नितिन शर्मा से खास बात करते हुए नूह ने कहा,
'गुरदीप और मैं बहुत अच्छे दोस्त हैं. गोल्ड जीतने के बाद मैंने सबसे पहले गुरदीप को बधाई और बाद में हमने साथ में मिलकर इसका जश्न भी मनाया. जहां हमने मूसेवाला के गानों पर डांस किया.'
CWG 2022 में भारत के ब्रॉन्ज़ मेडलिस्ट गुरदीप ने इस बारे में कहा,
'नूह और मैं छह साल पहले जूनियर चैम्पियनशिप में पहली बार मिले थे और अपनी डाइट के बारे में एक-दूसरे के साथ टिप्स भी शेयर की थी. पंजाबी में बातचीत ने हमारी दोस्ती को और गहरा कर दिया.'
इस बातचीत में नूह ने ये भी बताया कि दोनों खिलाड़ियों की दोस्ती ऐसी है, कि जब वो दोनों कोई मुकाबला नहीं भी खेल रहे होते. तो भी एक-दूसरे के टच में बने रहते हैं. जैसे कि इसी साल मई के महीने में नूह ने गुरदीप को फोन कर मूसेवाला की मौत के बारे में ख़बर जानी. उन्होंने बताया,
‘जब मैंने सिद्धू मूसेवाला की मौत की खबर सुनी, तो गुरदीप से इस ख़बर को कन्फर्म करने के लिए मैसेज किया. क्योंकि मैं जब भी अपने घर के जिम में ट्रेन करता हूं तो अक्सर जट्ट दा मुकाबला और हाल में रिलीज़ हुआ गाना ’295' सुनता हूं.'
नूह के पिता 16 बार के पाकिस्तान नेशनल चैंपियन रह चुके हैं. और उन्होंने भी इस इंटरव्यू में कहा कि भारत में उन्हें हमेशा प्यार मिला है. यहां उनके कई दोस्त हैं. जिनके सुबह के मैसेज पढ़कर ही उनके दिन की शुरुआत होती है.
सिल्वर मेडल जीतने वाली सुशीला देवी की कहानी:

