भारत-पाकिस्तान के बीच एक और क्रिकेट मैच! क्या आप तैयार हैं?
क्या आपने पटाखे खरीद लिए हैं? पिछली बार तोड़ा हुआ टीवी ठीक करवा लिया है?
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फोटो - thelallantop
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4 जून 2017.
18 जून 2017.
2 जुलाई 2017.
4 जून 2017 को चैंपियंस ट्रॉफी में भारत-पाकिस्तान का पहला मुकाबला हुआ. कुछ दिन पहले से ही हलचल शुरू हो गई थी. लोग बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे. मुद्दतों बाद दोनों टीमें खेल रही थी. मैच हुआ. भारत ने पाकिस्तान को आसानी से हरा दिया. सरहद के इस पार खूब जश्न हुआ. टीवी उधर टूटे.ये तीन तारीखें नहीं हैं बस. ये भारत-पाकिस्तान के खेलप्रेमियों के लिए त्यौहार के मौके हैं. दो तारीखें गुज़र चुकी हैं, एक आनी बाकी है.

पहले मैच में टीम इंडिया ने पाक को करारी शिकस्त दी.
18 जून 2017. दो हफ्ते बाद ही दोनों टीमें फिर आमने सामने थी. इस बार मुकाबला और बड़ा हो गया था. चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल था. दोनों तरफ की जनता और जनता से ज़्यादा मीडिया बावली हुई जा रही थी. विशेषणों के आगे ‘महा’ लगा-लगा कर उन्होंने दर्शकों को यकीन दिला दिया कि ये मैच किसी युद्ध से कम नहीं. मैच हुआ. इस बार रिजल्ट जुदा था. पाकिस्तान की कमज़ोर लगने वाली टीम ने इंडिया को बुरी तरह हराया. इस बार टीवी इधर के टूटे और जश्न उधर हुआ. खुन्नस में इधर के कुछ लोग जश्न मनाने के इल्ज़ाम में अंदर भी कर दिए गए. खैर.

दोनों टीमों के बीच हुए दूसरे मैच में पाकिस्तान ने कप उठा लिया.
अब 2 जुलाई को इन्हीं दो देशों की क्रिकेट टीम के बीच एक और मैच होने जा रहा है. लेकिन कहीं कोई हलचल नहीं. कोई इंतजार नहीं. कोई बेकरारी नहीं. इस ठंडे रिस्पॉन्स से ही पता चलता है कि मैच महिला टीम होगा. तो क्या हुआ कि ये मैच वर्ल्ड कप जैसे सबसे बड़े टूर्नामेंट में खेला जा रहा है! तो क्या हुआ कि भारत की महिला टीम लगातार अच्छा खेल रही है! तो क्या हुआ कि हमारा सबसे बड़ा क्रिकेटप्रेमी देश होने का हमारा दावा है!

कमाल है! इनकी जर्सी भी ऐन वैसी ही है जैसी कोहली एंड टीम पहनती है.
जब मेल टीम का मैच था तो कितना क्रेज़ दिखाई दे रहा था चारों तरफ. अब उससे बड़े स्टेज पर मैच हो रहा है तो भी कोई नोटिस नहीं कर रहा. कोई ट्वीट नहीं कर रहा. कोई फेसबुक पर नहीं लिख रहा. इस रवैये को देखता हूं तो लगता है कि महिला टीम की कैप्टन मिताली राज ने एक रिपोर्टर को ठीक ही हडकाया था. जब उस रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि आपका फेवरेट क्रिकेटर कौन है, तो उन्होंने उसे पलटकर करारा जवाब दिया था.
पूरी स्टोरी यहां पढ़ें: पलटकर पूछे गए एक सवाल से मैं सबसे ज्यादा सम्मान इस क्रिकेटर का करने लगा हूं
बात सही भी थी मिताली की. क्रिकेट के लिए जुनून की हद तक पागल इस देश में इस मुकाबले को लेकर कोई उत्साह नहीं है. इससे ज़्यादा हलचल तो तब होती है, जब पुरुषों की टीम केन्या, ज़िम्बाब्वे या अफगानिस्तान जैसी कमज़ोर टीमों के खिलाफ़ मैच खेल रही हो.
ये टीम भी उसी नीली जर्सी में खेलती है, जिससे सारे फैन इश्क करते हैं. ये टीम भी उतनी ही मेहनत करती है फील्ड पर, जितनी मेल टीम. उसी जोश से गेंद फेंकती है, बल्ला चलाती है, फील्डिंग करते वक़्त डाइव लगाती है. इनका भी उतना ही पसीना बहता है, जितना लड़कों का.मैच संडे को है. छुट्टी तो होगी ही. हौसला बढ़ाते हैं अपनी लड़कियों का. अच्छा कर रही हैं वो. कल सपोर्ट करते हैं उनको. हमारी टीम को. उस नीली जर्सी को. हां, कम से कम इस बार खेल को खेल की तरह ही लेते हैं. जीत जाएं तो मिठाई बाटेंगे. हार जाएं तो टीवी नहीं तोड़ेंगे. तैयार हैं न आप?

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