वो 5 मैच, जिनमें आख़िरी बॉल पर सिक्स मारकर मैच जीता गया
और छठा मैच वो जिसके चलते हमने ये स्टोरी की. जिसमें दिनेश कार्तिक ने पहली और एकमात्र बार फाइनल में ऐसा कारनामा किया.
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ये दिन कौन भूल सकता है?
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18 मार्च, 2018 का दिन पूरे भारत के क्रिकेटप्रेमियों को हमेशा-हमेशा याद रहेगा. कोलंबो में निदाहस ट्रॉफी के फाइनल में जो कुछ हुआ, उसके विजुअल्स सबकी आंखों में रच-बस गए. दिनेश कार्तिक नाम की एक आंधी ने जो उत्पात मचाया उसे बरसों याद रखा जाएगा. आठ बॉल में 29 रन ठोक दिए. आख़िरी गेंद पर छक्का मारकर पूरे स्टेडियम में विस्फोट सा कर दिया. वैसे ऐसे 5 और मैच हमें याद हैं जहां ऐसा ही कुछ हुआ था. आइए जानें -

जावेद मियांदाद.

लांस क्लूजनर.


चमारा कपुगेदरा.


राजेश चौहान.
इसके अलावा सबको महेंद्र सिंह धोनी का वर्ल्ड कप फाइनल वाला सिक्स तो याद ही होगा. वो न तो आख़िरी गेंद पर था, न आखिरी ओवर में. न ही मैच फंसा हुआ था. फिर भी वानखेड़े स्टेडियम पर लगाए गए उस छक्के की बात ही अलग है. इसके साथ ही ये पक्का हुआ था कि इंडिया में दूसरी बार वर्ल्ड कप आ रहा है.
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#1. जावेद मियांदाद का दिया ज़ख्म
इसे कौन भूल सकता है? कई बरस तक मियांदाद का वो सिक्सर तमाम भारतीयों के सीने में शूल सा चुभता रहा है. चेतन शर्मा का नाम लोगों को उनके 11 साल लंबे क्रिकेट करियर के लिए नहीं बल्कि इस मैच में वो घातक गेंद डालने के लिए याद है. 18 अप्रैल 1986 को ऑस्ट्रल-एशिया कप के फाइनल में हुआ था ये. शारजाह में. भारत के 245 रन का पीछा कर रही पाकिस्तान को आख़िरी गेंद पर चार रन चाहिए थे. चेतन शर्मा ने एक लो फुल टॉस फेंकी, जिसे मियांदाद ने बाउंड्री से पार पहुंचा दिया. क्रिकेट में जानी दुश्मन पाकिस्तान के खिलाफ ऐसी करारी शिकस्त भारत को बरसों सालती रही.
जावेद मियांदाद.
#2. लांस क्लूजनर का प्रहार
1999 की बात है. साउथ अफ्रीका न्यूज़ीलैण्ड के दौरे पर थी. छठे वन डे मैच में न्यूज़ीलैण्ड के 191 रनों के जवाब में साउथ अफ्रीका स्ट्रगल कर रही थी. नियमित अंतराल पर उनके विकेट्स गिर रहे थे. बस लांस क्लूजनर जमे हुए थे. ऐसे जमे कि मैच जितवा कर ही लौटे. आख़िरी बॉल पर चार रन चाहिए थे. क्लूजनर ने डियोन नैश की गेंद को आसमानी रास्ते से मैदान के बाहर भेजा.
लांस क्लूजनर.
#3. अशोक डिंडा का सबसे बुरा सपना
2012 का इंग्लैंड का भारत दौरा. मुंबई में दूसरा टी-20 मैच. तारीख 22 दिसंबर. इंग्लैंड को जीतने के लिए 178 रन बनाने थे. मॉर्गन बढ़िया खेल रहे थे. आख़िरी गेंद पर इंग्लैंड को तीन रन चाहिए थे. दो से मैच टाई होता. लेकिन आए छह. यॉर्कर के चक्कर में अशोक डिंडा ने हाफ वॉली दे दी. मॉर्गन ने उनके सर के ऊपर से गेंद को स्टैंड्स में पहुंचा दिया.
#4. जब नेहरा जी रिसीविंग एंड पर थे
2010 का वर्ल्ड टी-20 टूर्नामेंट. मई की 11 तारीख. भारत ने बनाए 163 रन कभी श्रीलंका के लिए समस्या बनते नज़र नहीं आए. आखिरी ओवर में 13 रन चाहिए थे. पहली ही बॉल पर मैथ्यूज़ ने छक्का मारा और टार्गेट काबू में ले आए. लास्ट बॉल पर तीन रन चाहिए थे. कपुगेदरा ने छक्का जड़ दिया. स्वीपर कवर से ऊपर से. आशीष नेहरा बेबसी से देखते रहे.
चमारा कपुगेदरा.
#5. बांग्लादेश ने पहले भी एक बार खाया है छक्का
ये बांग्लादेश का तबका मैच है जब उनका खस्ताहाली का दौर था. हालांकि जिस टीम से उन्होंने ज़ख्म खाया, वो भी कोई बहुत बड़ी टीम नहीं थी. ज़िम्बाब्वे ने बांग्लादेश के 237 के टार्गेट का पीछा करते हुए 49.5 ओवर में 232 रन बना लिए थे. यहां भी एक बॉल पर पांच रन ही चाहिए थे. ब्रेंडन टेलर ने मशरफे मोर्तज़ा की बॉल को मिडविकेट के ऊपर से छह रन के लिए भेज दिया.
# अब एक किस्सा इंडिया का
राजेश चौहान उस शख्स का नाम है जिसने जावेद मियांदाद के दिए ज़ख्म की कुछ हद तक भरपाई कर दी थी. आख़िरी बॉल पर तो नहीं लेकिन आख़िरी ओवर में सिक्स मारकर मैच जिताया था. सामने पाकिस्तान था. तारीख थी 30 सितंबर 1997. इंडिया, पाकिस्तान के 265 रनों को चेस करने के करीब पहुंच गया था. चार गेंदों में छह रन चाहिए थे. बोलिंग पर थे मास्टर स्पिनर सकलेन मुश्ताक़. मामला फंस भी सकता था. लेकिन राजेश चौहान मैच लंबा खींचने के मूड में नहीं थे. उन्होंने सकलेन की तीसरी गेंद को उठाकर दर्शकों में पहुंचा दिया. 11 साल बाद बदला पूरा हो गया था.
राजेश चौहान.
इसके अलावा सबको महेंद्र सिंह धोनी का वर्ल्ड कप फाइनल वाला सिक्स तो याद ही होगा. वो न तो आख़िरी गेंद पर था, न आखिरी ओवर में. न ही मैच फंसा हुआ था. फिर भी वानखेड़े स्टेडियम पर लगाए गए उस छक्के की बात ही अलग है. इसके साथ ही ये पक्का हुआ था कि इंडिया में दूसरी बार वर्ल्ड कप आ रहा है.
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