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FIFA के भारत को बैन करने वाले कदम पर CoA ने जारी किया बयान

CoA ने फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था FIFA द्वारा अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) पर प्रतिबंध लगाने के बाद निराशा जताई है.

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16 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 16 अगस्त 2022, 08:57 PM IST)
Indian Football Team. Photo: Getty Images
इंडियन फुटबॉल टीम. फोटो: Getty Images
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फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था FIFA ने भारतीय फुटबॉल को चलाने वाली संस्था ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) की तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. FIFA द्वारा ये कदम भारतीय फुटबॉल फेडरेशन में लंबे समय से चल रहे विवाद और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के दखल के चलते उठाया है.

इस मामले पर अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (CoA) द्वारा भी बयान आया है. जस्टिस (रिटायर्ड) अनिल आर. दवे, डॉ एसवाई कुरैशी और भास्कर गांगुली के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त CoA ने फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था FIFA द्वारा अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) पर प्रतिबंध लगाने के बाद निराशा जताई है.

FIFA ने मंगलवार को बयान जारी कर कहा कि थर्ड पार्टीज के बहुत ज्यादा दखल की वजह से ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) को बैन करने का फैसला लिया गया है. 

CoA ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि CoA हैरान है कि फीफा का फैसला तब आया है जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार FIFA-AFC, AIFF, CoA और खेल मंत्रालय सहित सभी हितधारकों के बीच पिछले कुछ दिनों से व्यापक चर्चा चल रही थी. जबकि CoA 3 अगस्त, 2022 को पारित AIFF के चुनाव के संबंध में माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध था.

उन्होंने आगे ये भी कहा कि पिछले कुछ दिनों में FIFA-AFC, AIFF, CoA और खेल मंत्रालय के बीच हुई चर्चा में, यह सुझाव दिया गया था कि AIFF कार्यकारी समिति के वर्तमान चुनाव इलेक्टोरल कॉलेज के साथ आयोजित किए जा सकते हैं जिसमें 36 राज्य प्रतिनिधि शामिल हैं. COA ने कहा है कि फीफा ने खेल मंत्रालय के माध्यम से यह भी सुझाव दिया था कि चुनाव आयोग में छह प्रतिष्ठित खिलाड़ियों सहित 23 सदस्य हो सकते हैं.

इस मामले पर COA के अध्यक्ष जस्टिस (रिटायर्ड) अनिल दवे ने कहा,

'फीफा के ऐसे निर्देश को देखना दुर्भाग्यपूर्ण है. जब भारतीय फुटबॉल को सही रास्ते पर लाने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं. बताया जा रहा है कि इस स्थिति का सही समाधान खोजने के लिए फीफा सहित सभी हितधारकों के साथ हम लगातार बातचीत कर रहे हैं.'

उन्होंने आगे कहा,

'निलंबन का आदेश फीफा द्वारा पारित किया जाना वास्तव में निराशाजनक है कि लगभग पिछले दो वर्षों से, निकाय पूरी तरह से अलोकतांत्रिक और अवैध तरीके से जारी रहा. जबकि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश पारित किया तो इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. वहीं, CoA और खेल मंत्रालय माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के कार्यान्वयन के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रहे थे.'

अनिल दवे के अलावा COA के सदस्य डॉ एसवाई कुरैशी ने भी इस पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा.

'फीफा का हालिया निलंबन हम सभी के लिए आश्चर्य की बात है. खासतौर पर तब जब हमें पहले से ही पारस्परिक रूप से स्वीकृत शर्तें मिल गई हैं. इसके अलावा, एक सामान्य निकाय का चुनाव करने के लिए लोकतांत्रिक चुनाव कराने की तैयारी की जा रही है. हालांकि, हमें उम्मीद है कि जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल कर सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा.'

इन दोनों सदस्यों के अलावा भारत के पूर्व कप्तान और COA के तीसरे सदस्य भास्कर गांगुली ने भी अपनी बात रखी है. गांगुली ने इस मामले पर कहा,

'जब COA द्वारा राष्ट्रीय खेल की भावना के अनुसार, खेल में सही में रुचि रखने वाले खिलाड़ियों को उचित महत्व देने के लिए एक ईमानदार कोशिश की जा रहा थी, तब निलंबन का आदेश दिया गया है. ये बेहद निराशाजनक है.'

FIFA के आधिकारिक तौर पर AIFF पर बैन लगने के कारण भारत से फीफा अंडर-17 महिला विश्व कप 2022 की मेजबानी भी छीन ली गई. हालांकि FIFA के मुताबिक ऑफिशल्स के पूरी तरह से पावर में आने के साथ ही AIFF से बैन हटा लिया जाएगा.

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