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चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल पर दिल्ली से दुबई तक 5 हजार करोड़ का सट्टा, कई गिरफ्तार, अंडरवर्ल्ड कनेक्शन भी आया सामने

Champions Trophy 2025 Final: भारत इन इंटरनेशनल सट्टेबाज़ों की पसंदीदा टीम है. बताया गया कि दुनियाभर के बड़े सट्टेबाज़ हर बड़े मैच के दौरान दुबई में इकट्ठा होते हैं.

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Bets Linked To Underworld Placed On India-New Zealand Final
सूत्रों के मुताबिक़, इस सट्टेबाज़ी में दाऊद इब्राहिम का गैंग 'डी कंपनी' भी शामिल है. (फ़ोटो - PTI)
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हरीश
9 मार्च 2025 (Published: 10:31 AM IST)
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चैंपियंस ट्रॉफ़ी का फ़ाइनल (Champions Trophy Final) मैच आज, 9 मार्च को खेला जाना है. भारत और न्यूज़ीलैंड (India vs NZ) के बीच ये मैच होगा. मुक़ाबला फ़ाइनल का है, ऐसे में सट्टेबाज़ी का बाज़ार भी गर्म है. भारत ही नहीं, दुबई में भी. ख़बर है कि इस मैच पर 5,000 करोड़ रुपये तक का सट्टा लगाया गया है . सट्टा लगाने वाले इन ग्रुप्स में दाऊद इब्राहिम का गैंग ‘डी कंपनी’ भी शामिल है (Dawood Ibrahim D Company).

NDTV ने सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है. सूत्रों ने बताया है कि भारत इन इंटरनेशनल सट्टेबाज़ों की पसंदीदा टीम है. कई सट्टेबाज़ अंडरवर्ल्ड से जुड़े हुए हैं. ये भी बताया गया कि दुनियाभर के बड़े सट्टेबाज़ हर बड़े मैच के दौरान दुबई में इकट्ठा होते हैं.

5 सट्टेबाज़ गिरफ़्तार

रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने चैंपियंस ट्रॉफ़ी के दौरान कम से कम पांच बड़े सट्टेबाज़ों को गिरफ्तार किया है. इन्होंने सेमीफाइनल पर सट्टा लगाया था. उनसे पूछताछ के बाद ये जांच दुबई तक पहुंच गई है. एक मामले में, परवीन कोचर और संजय कुमार नाम के दो सट्टेबाज़ों को गिरफ़्तार किया गया. इन पर भारत-ऑस्ट्रेलिया चैंपियंस ट्रॉफ़ी सेमीफाइनल मैच पर सट्टा लगाने का आरोप है.

दोनों को लैपटॉप और मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करके लाइव सट्टा लगाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया. पुलिस ने सट्टेबाजी में इस्तेमाल होने वाले कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज और सामान बरामद किए हैं. NDTV की ख़बर बताती है कि परवीन कोचर ने lucky.com नाम की एक सट्टेबाज़ी वेबसाइट से एक मास्टर आईडी खरीदी. उसका इस्तेमाल सट्टेबाज़ी ID बनाने में किया. फिर उन्हें सट्टेबाज़ों को बेच दिया.

इस सिंडिकेट ने हर लेनदेन पर 3 परसेंट का कमीशन लिया. ऑफलाइन सट्टेबाजी के लिए आरोपी फ़ोन कॉल का इस्तेमाल करते थे. फिर सट्टेबाजी की दरों के आधार पर नोटपैड में एंट्री करते थे. सूत्रों के अनुसार, परवीन कोचर पिछले दो सालों से सट्टे का धंधा चला रहा था. इसके लिए उसने 35,000 रुपये महीने पर एक घर किराए पर लिया हुआ था. हर मैच के दिन उसे 40,000 रुपये का मुनाफा होता था. 

पूछताछ में परवीन ने बताया कि इस पूरे नेटवर्क को दुबई से कंट्रोल किया जाता है. दिल्ली से गिरफ़्तार किए गए पांच लोगों में से तीन मनीष साहनी, योगेश कुकेजा और सूरज हैं. इनका संबंध दुबई से है. पुलिस ने उनके पास से 22 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं. 

पूछताछ के दौरान इन्होंने बताया कि 'सट्टा' नाम का सट्टेबाज़ी ऐप भारत के बाहर डेवलप किया गया था. मन्नू मटका, अक्षय गहलोत, निशु, रिंकू और अमन राजपूत नाम के लोगों ने ऐप बनाया था. मनीष साहनी इस गैंग का मेन ऑपरेटर था. वो सट्टे में भाग लेने वाले लोगों की आवाज़ रिकॉर्ड करता था. बैंक खातों या नकदी के ज़रिए लेन-देन का प्रबंधन करता था.

और कौन हैं शामिल?

छोटू बंसल भी इनके गैंग से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है. पश्चिमी दिल्ली के रहने वाले छोटू ने कनाडा में एक सट्टेबाजी ऐप बनाया. अब वो दुबई में रह रहा है. दूसरों ने उसका ऐप किराए पर ले लिया और उस पर सट्टा लगाना शुरू कर दिया.

विनय: ये दिल्ली के मोती नगर के रहने वाला है. ये भी दुबई में हैं. वो क्रिकेट ग्राउंड से सीधे फीडबैक देते थे.

इस गैंग में शामिल दिल्ली के अन्य लोगों की पहचान बॉबी, गोलू, नितिन जैन और जीतू के रूप में हुई है.

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