सहवाग एक चमत्कार हैं. एमबीए स्कूलों में पढ़ाने लायक एक केस स्टडी. लोग जिसेहाई-प्रेशर, हाई-इमोशन क्रिकेट कहते है, उसमें कोई कैसे इतना मज़ेदार रह सकता है?नजफगढ़ का ये पट्ठा सीधे-सीधे कहता था, 'मैं लोगों को मैच देखने का न्यौता नहींदेता, वो खुद मैच देखने आते हैं, मनोरंजन के लिए आते हैं तो क्या दबाव लेना!'क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद सहवाग और ज्यादा छा गए. जिस चैनल पर कमेंट्री करतेहैं, उसको नंबर वन बना दिया है.संन्यास के बाद एक साल में ट्विटर पर 'मज़ा ले-ले फॉलोअर्स' की संख्या लगभग डबल करडाली. सहवाग अपने क्रिकेट के दिनों में भी ऐसे ही मज़े लेते थे. क्रिकेट में बाकीटीमें सिर्फ बैटिंग-बॉलिंग-फील्डिंग करती हैं, पर ऑस्ट्रेलिया वाले स्लेजिंग भीकरते हैं. सहवाग ने उनका भी मज़ा काट लिया.सहवाग बताते हैं, 'क्लार्क नया-नया आया था. वो सचिन को बार छेड़ रहा था कि तुम्हारीउम्र हो गई है. मैंने क्लार्क को बुलाया पूछा तूने 25 मैच खेले हैं और सचिन ने 40शतक लगाए हैं. तू उससे बात कर रहा है. क्लार्क बोला – मुझे तुमसे बात नहीं करनी.मैंने भी कहा – मैं भी तुमसे बात नहीं करना चाहता. पर ये तो बता तुम्हारे टीम मेटतुम्हें ‘द पप’ बुलाते हैं. तुम किस ब्रीड के हो. हम भी अपने घर ले आएं.'बैटिंग करते हुए कोई नहीं जानता था कि सहवाग क्या कर दें. दुनिया में तीन प्लेयरहैं जो टेस्ट मैच में 99 के स्कोर पर स्टंप आउट हुए. वीरू उनमें से एक हैं. ट्रिपलसेंचुरी भी छक्के से पूरी करते हैं. इसी तरह कमेंट्री करते हुए भी उनका यकीन नहींकि कब क्या बोल दें.पेश है सहवाग-साहित्य के लल्लनटॉप नगीने, उनकी कमेंट्री-ट्वीट और बयानों से साभार:कमेंट्री में:1चाय में डूबा बिस्कुट, प्यार में पड़ा लड़का और प्रेशर में पड़ा बैट्समैन, किसी कामके नहीं होते.2पुजारा की बैटिंग दादी मां की कहानी की तरह है, कभी खत्म ही नहीं होती.3जो मज़ा सोने में है, वो किसी कोने में नहीं.4इंडिया में लोग एबीसीडी के पीछे रहते हैं. ए- एस्ट्रॉलोजी, बी-बॉलीवुड, सी –क्रिकेट, डी-डिवोशन.5कोहली एक रन मशीन हैं और आज ये मशीन सर्विस होकर आई है.6रहाणे को आते ही बैट का मिडल मिल गया और यहां लोगों को सेलॉटेप का एंड नहीं मिलता.7गंभीर की तरह सब प्लेयर अपने सरनेम को इतना सीरियसली लेते तो, पुजारा अगरबत्ती लेकरबैटिंग करते, विजय रथ पर सवार होकर आते, टेलर सिलाई मशीन लेकर आते, सैंटनर संतरे काजूस लेकर गेंदबाज़ी करते और शामी कबाब लेकर आते.8पुजारा पुजारी की तरह बैटिंग करते हैं, जिंदगी ना मिलेगी पुजारा (एक विवादित फैसलेमें पुजारा को आउट देने के बाद.9चिप्स का पैकेट और जड़ेजा का ओवर कब खत्म होता है मालूम ही नहीं पड़ता.10हमारे यहां टेलर को दर्जी कहते हैं और न्यूज़ीलैंड की बैटिंग का हाल फटा हुआ है औरदर्ज़ी को इसे सिलना पड़ेगा.--------------------------------------------------------------------------------ट्विटर पर:1आंखें बंद करने से नहीं, टेंशन फ्री होने से नहीं, थकने से भी नहीं, आज के ज़मानेमें तो वाई-फाई बंद करने से नींद आती है.2अगर आप पर कोई पत्थर फेंके तो उस पर फूल फेंको, लेकिन गमले के साथ (अंतरराष्ट्रीयशांति दिवस मनाने का तरीका सहवाग तरीका)3शोभा डे से सहवाग जी.4पीयर्स मॉर्गन घणा ना बोल--------------------------------------------------------------------------------सहवाग क्रिकेट पर:1सवाल: आप जिस बॉलर को पीटना तय कर लेते हैं फिर अपनी भी नहीं सुनते हैं सहवाग: बॉलका काम है बाउंड्री तक जाना और हम बैट्समैनों का काम है उसे बाउंड्री तक पहुंचाना.2सवाल: खेलने के दिनों में आपकी शोएब अख्तर से दोस्ती थी? सहवाग: पाकिस्तान केक्रिकेटरों को इंडिया में बिज़नेस चाहिए होता है. रिटायरमेंट के बाद उनका कोई भीबयान सुन लीजिए. इंडिया की तारीफों के पुलिंदे बांध देते हैं.3ऑस्ट्रेलिया वालों की स्लेजिंग पर : बॉलर बैट्समैन को गाली दे तो उसे हैंडल करनापड़ता है. बैट्समैन के लिए ये नेगिटिव हो जाता है. तो कोई स्लेजिंग करे तो क्यों नामैं ही उसको गाली दे दूं ?4शोएब: तू थर्ड मैन–पॉइंट पर ही चौका मार रहा है, सामने मार के दिखा. सहवाग: वोसामने बाप खड़ा है, उसे बाउंसर डाल के दिखा ? सचिन को बाउंसर और छक्का. सहवाग (शोएबसे): बेटा बेटा होता है. बाप बाप होता है.5सवाल: लोग कहते हैं आपका फुटवर्क खराब है ? सहवाग: मेरा फुटवर्क है ही नहीं. मैंबेसिक्स ठीक कर रहा हूं, मैं ये कर रहा हूं, मैं वो कर रहा हूं, ये सब हमें मीडियावालों के लिए बोलना पड़ता है.तो ऐसे लेते हैं लाइफ सहवाग, ऑलवेज़ लल्लनटॉप !--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी लल्लनटॉप के लिए हेमंत ने की है --------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:वो स्टाइलिश इंडियन क्रिकेटर, जिसका एक ख़राब शॉट उसका करियर खा गयावो इंडियन खिलाड़ी जिसने अरब सागर में छक्का मारा थावो बॉलर, जिसके फेंके एक ओवर ने भारतीय खिलाड़ियों के घरों पर पत्थर फिंकवाएवो क्रिकेटर नहीं, तूफ़ान था. आता था, तबाही मचाता था, चला जाता थावीडियो: इस आतंकी हमले में क्यों नहीं मांगा जा रहा है मुस्लिमों की मौत का हिसाब?