वो तस्वीर मेरी नहीं विराट कोहली की वजह से फेमस है
आशीष नेहरा. हैदराबाद सनराइज़र्स की ओर से खेलते हुए चोटिल हो गए. लंडन में घुटने का ऑपरेशन करवाया. और की बातचीत एक अख़बार से.
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फोटो - thelallantop
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आशीष नेहरा. इंडियन फ़ास्ट बॉलर. 'दूसरा जन्म' लेकर खेल रहे हैं. आईपीएल में हैदराबाद से खेलते हुए चोटिल हुए तो आईपीएल के आखिरी स्टेज पर टूर्नामेंट से बाहर हो गए. लंडन में उनके घुटने का ऑपरेशन हुआ. हैदराबाद सनराइज़र्स को प्ले ऑफ तक पहुंचाने में आशीष नेहरा का एक अहम रोल रहा है.
नेहरा ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत की. लंडन से ही. जानते हैं क्या बतकही हुई:
फ़ास्ट बॉलर्स की नयी खेप के बारे में:
अच्छी बात है कि नए बॉलर्स की बड़ाई की जा रही हैं. उन्हें अब ज़्यादा मैन-ऑफ़-द-मैच अवॉर्ड्स मिलने लगे हैं. कई बार ऐसा होता है कि कोई बॉलर 4 ओवर में 20 रन देता है और 1 विकेट लेता है लेकिन उसे मैन-ऑफ़-द-मैच अवॉर्ड नहीं मिलता है. वहीँ कोई बैट्समैन 30 गेंद पे 40 रन मार देता है तो उसे अवॉर्ड डे दिया जाता है. इस बार या तो आप कुछ ज़्यादा ही ध्यान से देख रहे हैं या फिर आईपीएल में बॉलर्स को कुछ ज़्यादा ही बड़ाई मिल रही है. टीमों को समझ में आने लगा है कि सिर्फ बैटिंग ही अच्छी नहीं होनी चाहिए. बॉलिंग से भी बहुत फ़र्क पड़ता है.
बॉलर्स की सफ़लता को उनके लिए गए विकेट से मापने के बारे में: ये ठीक नहीं है बॉलर्स के लिए. लेकिन इसे ऐसा बनाता कौन है? मीडिया. क्रिकेटर के तौर पर मैं तब तक खुश हूं जब तक कप्तान और और टीम मैनेजमेंट को ये लगता है कि मैं अपना दिया काम बखूबी कर रहा हूं. अगर आप मैच-दर-मैच दो या तीन विकेट ले रहे हैं तो आप नोटिस में रहते हैं. फिर होता ये है कि आईपीएल ख़तम होने पर आपके बैग में 18 से 20 विकेट होते हैं. कुछ लोगों का ऐसा हो जाता है कि टूर्नामेंट में 20 विकेट लेने वाला अच्छी बॉलिंग नहीं कर रहा होता है. उसे सारे विकेट लॉन्ग-ऑन पर मिल रहे थे. वहीं कोई बॉलर होता है जो बैट्समैन को जकड़ के रखता है. लेकिन विकेट नहीं मिल पाते. उसे आप नोटिस नहीं करते हैं. इसलिए मीडिया को ज़रूरी है कि आप एक सही पिक्चर प्रस्तुत करें. उनके बारे में बात करें जो अच्छा खेल रहा है न कि उसे कितने विकेट मिल रहे हैं.
इंडिया की फ़ास्ट बॉलर्स की कभी न खत्म होने वाली तलाश के बारे में: अगर आप तेज़ गेंद फेंकते हैं तो किसी भी हालत में आपको इंजर्ड होना तय है. टीवी पर देखने में बाउंसर और यॉर्कर फेंकना बहुत आसन लगता है. लेकिन असल में ये शरीर से बहुत कुछ खींच लेता है. लेकिन बदकिस्मती से जब कोई पेस बॉलर इंजर्ड हो जाता है तो मीडिया उसके बुरे साइड के बारे में ही दिखाता है. इंडिया एकमात्र ऐसी टीम नहीं है जिसके पेस बॉलर्स इंजर्ड होते हैं. ब्रेट ली, मिशेल जॉनसन और डेल स्टेन भी इंजर्ड होते रहे हैं. ये इसलिए क्यूंकि फ़ास्ट बॉलिंग अपने आप में ही आसान काम नहीं है. आप टीम के सेलेक्टर्स से बात कीजिये. पिछले 3-4 साल में जब मैंने वन-डे और टी-20 मैच नहीं खेले हैं, इंडिया ने कुछ 20-25 फ़ास्ट बॉलर्स इस्तेमाल किये हैं. तो बजाय उन 20-25 बॉलर्स को ट्राई करने के, आप ये करें कि 6 बॉलर्स उठाएं, उनपर काम करें. अगर कोई ठीक से काम नहीं करता है, आप उन्हें चेंज कर दें. हमारे पास टैलेंट की कोई कमी नहीं है, बस आपको अपने तरीके बदलने होंगे. प्लेयर्स को मैनेज करना सीखना होगा.
मीडिया से खुन्नस के बारे में: मैं मीडिया से बहुत ही कम बात करता हूं. मुझे ऐसा लगता है कि मीडिया को 'ज़िम्मेदारी' जैसे शब्द याद नहीं रह गए हैं. मुझे मालूम है कि हर बॉलर अलग होता है, हर बैट्समैन अलग होता है, हर इंसान अलग होता है. मैं टीवी नहीं देखता हूं इसलिए मुझे कुछ खास फ़र्क नहीं पड़ता है. लेकिन जो टीवी देखते हैं उन्हें मीडिया सही पिचर पहुंचाए तो अच्छा रहेगा. मुझे ऐसा लगता है कि मीडिया गड़बड़ करता है. अभी आशीष नेहरा अच्छा कर रहा है. वो 37 साल का है. टी-20 फ़ास्ट गेम है फिर भी वो अच्छा कर हा है. जिस दिन नेहरा इंजर्ड हुआ उस दिन कहने लगेंगे आशीष तो हमेशा इंजर्ड ही रहता है. मुझे मालूम है कि मुझे इंजरी हुई है. मैं इंजर्ड होता रहता हूं. ऐसा नहीं है कि आशीष नेहरा जितनी भी बार मैदान पर जाता है, चार कैच छोड़ता है, बाउंड्री छोड़ता है. ये एक समझ बनायी गयी है. और ये समझ कौन बनाता है? लोग इम्प्रूव करते हैं. किसी भी तरह का ठप्पा नहीं लग्न चाहिए कि फलाना बॉलर अच्छा करता है और फलाना बेकार है. जैसे ऋषभ पन्त है. अभी वो यंग है और बहुत ही अच्छा कर रहा है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि 100 टेस्ट खेलेगा. लेकिन ये भी हो सकता है कि 150 टेस्ट खेल जाए. लोग आज बात कर रहे हैं आशीष नेहरा के बारे में. लेकिन एक वक़्त ये भी था जब इंडिया 25 बॉलर्स को ट्राई कर रहा था लेकिन आशीष नेहरा को नहीं खिला रहा था. उस वक़्त कोई आशीष नेहरा के बारे में बाद नहीं कर रहा था. ये पहली बार नहीं है जब मैं अच्छा कर रहा हूं.
छोटे विराट कोहली के साथ वायरल हुई तस्वीर के बारे में:
मैं सोशल मीडिया पर नहीं हूं लेकिन वो पिक्चर अब पॉपुलर हुई है विराट के आज उस मुकाम पर पहुंच जाने की वजह से. वरना ये एक आम पिक्चर थी जो कहीं दीवाल पर टंगी होती. और कोई उसे इतना ख़ास नहीं कहता. आज वो तस्वीर विराट कोहली की है. उनके लिए है. उनके लिए ही जानी जाती है. कुछ 13 साल पहले ली गयी थी. जब मैं 2009 से 2011 के बीच में खेल रहा था, तब विराट भी खेल रहे थे. उस वक़्त इसके बारे में किसी ने बात नहीं की. ये सब कुछ सोशल मीडिया का कमाल है.
अपने आगे के प्लान्स के बारे में: देखता हूं मेरा शरीर मेरा कैसा साथ देता है. और उसके हिसाब से मैं कोई फ़ैसला लूंगा. मैं बहुत दूर की नहीं सोचता हूं. मैं सिर्फ अगले तीन महीनों का प्लान बनाता हूं, अगले तीन साल का नहीं.
बॉलर्स की सफ़लता को उनके लिए गए विकेट से मापने के बारे में: ये ठीक नहीं है बॉलर्स के लिए. लेकिन इसे ऐसा बनाता कौन है? मीडिया. क्रिकेटर के तौर पर मैं तब तक खुश हूं जब तक कप्तान और और टीम मैनेजमेंट को ये लगता है कि मैं अपना दिया काम बखूबी कर रहा हूं. अगर आप मैच-दर-मैच दो या तीन विकेट ले रहे हैं तो आप नोटिस में रहते हैं. फिर होता ये है कि आईपीएल ख़तम होने पर आपके बैग में 18 से 20 विकेट होते हैं. कुछ लोगों का ऐसा हो जाता है कि टूर्नामेंट में 20 विकेट लेने वाला अच्छी बॉलिंग नहीं कर रहा होता है. उसे सारे विकेट लॉन्ग-ऑन पर मिल रहे थे. वहीं कोई बॉलर होता है जो बैट्समैन को जकड़ के रखता है. लेकिन विकेट नहीं मिल पाते. उसे आप नोटिस नहीं करते हैं. इसलिए मीडिया को ज़रूरी है कि आप एक सही पिक्चर प्रस्तुत करें. उनके बारे में बात करें जो अच्छा खेल रहा है न कि उसे कितने विकेट मिल रहे हैं.
इंडिया की फ़ास्ट बॉलर्स की कभी न खत्म होने वाली तलाश के बारे में: अगर आप तेज़ गेंद फेंकते हैं तो किसी भी हालत में आपको इंजर्ड होना तय है. टीवी पर देखने में बाउंसर और यॉर्कर फेंकना बहुत आसन लगता है. लेकिन असल में ये शरीर से बहुत कुछ खींच लेता है. लेकिन बदकिस्मती से जब कोई पेस बॉलर इंजर्ड हो जाता है तो मीडिया उसके बुरे साइड के बारे में ही दिखाता है. इंडिया एकमात्र ऐसी टीम नहीं है जिसके पेस बॉलर्स इंजर्ड होते हैं. ब्रेट ली, मिशेल जॉनसन और डेल स्टेन भी इंजर्ड होते रहे हैं. ये इसलिए क्यूंकि फ़ास्ट बॉलिंग अपने आप में ही आसान काम नहीं है. आप टीम के सेलेक्टर्स से बात कीजिये. पिछले 3-4 साल में जब मैंने वन-डे और टी-20 मैच नहीं खेले हैं, इंडिया ने कुछ 20-25 फ़ास्ट बॉलर्स इस्तेमाल किये हैं. तो बजाय उन 20-25 बॉलर्स को ट्राई करने के, आप ये करें कि 6 बॉलर्स उठाएं, उनपर काम करें. अगर कोई ठीक से काम नहीं करता है, आप उन्हें चेंज कर दें. हमारे पास टैलेंट की कोई कमी नहीं है, बस आपको अपने तरीके बदलने होंगे. प्लेयर्स को मैनेज करना सीखना होगा.
मीडिया से खुन्नस के बारे में: मैं मीडिया से बहुत ही कम बात करता हूं. मुझे ऐसा लगता है कि मीडिया को 'ज़िम्मेदारी' जैसे शब्द याद नहीं रह गए हैं. मुझे मालूम है कि हर बॉलर अलग होता है, हर बैट्समैन अलग होता है, हर इंसान अलग होता है. मैं टीवी नहीं देखता हूं इसलिए मुझे कुछ खास फ़र्क नहीं पड़ता है. लेकिन जो टीवी देखते हैं उन्हें मीडिया सही पिचर पहुंचाए तो अच्छा रहेगा. मुझे ऐसा लगता है कि मीडिया गड़बड़ करता है. अभी आशीष नेहरा अच्छा कर रहा है. वो 37 साल का है. टी-20 फ़ास्ट गेम है फिर भी वो अच्छा कर हा है. जिस दिन नेहरा इंजर्ड हुआ उस दिन कहने लगेंगे आशीष तो हमेशा इंजर्ड ही रहता है. मुझे मालूम है कि मुझे इंजरी हुई है. मैं इंजर्ड होता रहता हूं. ऐसा नहीं है कि आशीष नेहरा जितनी भी बार मैदान पर जाता है, चार कैच छोड़ता है, बाउंड्री छोड़ता है. ये एक समझ बनायी गयी है. और ये समझ कौन बनाता है? लोग इम्प्रूव करते हैं. किसी भी तरह का ठप्पा नहीं लग्न चाहिए कि फलाना बॉलर अच्छा करता है और फलाना बेकार है. जैसे ऋषभ पन्त है. अभी वो यंग है और बहुत ही अच्छा कर रहा है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि 100 टेस्ट खेलेगा. लेकिन ये भी हो सकता है कि 150 टेस्ट खेल जाए. लोग आज बात कर रहे हैं आशीष नेहरा के बारे में. लेकिन एक वक़्त ये भी था जब इंडिया 25 बॉलर्स को ट्राई कर रहा था लेकिन आशीष नेहरा को नहीं खिला रहा था. उस वक़्त कोई आशीष नेहरा के बारे में बाद नहीं कर रहा था. ये पहली बार नहीं है जब मैं अच्छा कर रहा हूं.
छोटे विराट कोहली के साथ वायरल हुई तस्वीर के बारे में:
मैं सोशल मीडिया पर नहीं हूं लेकिन वो पिक्चर अब पॉपुलर हुई है विराट के आज उस मुकाम पर पहुंच जाने की वजह से. वरना ये एक आम पिक्चर थी जो कहीं दीवाल पर टंगी होती. और कोई उसे इतना ख़ास नहीं कहता. आज वो तस्वीर विराट कोहली की है. उनके लिए है. उनके लिए ही जानी जाती है. कुछ 13 साल पहले ली गयी थी. जब मैं 2009 से 2011 के बीच में खेल रहा था, तब विराट भी खेल रहे थे. उस वक़्त इसके बारे में किसी ने बात नहीं की. ये सब कुछ सोशल मीडिया का कमाल है.
अपने आगे के प्लान्स के बारे में: देखता हूं मेरा शरीर मेरा कैसा साथ देता है. और उसके हिसाब से मैं कोई फ़ैसला लूंगा. मैं बहुत दूर की नहीं सोचता हूं. मैं सिर्फ अगले तीन महीनों का प्लान बनाता हूं, अगले तीन साल का नहीं.

