उस ज़माने में इंग्लैंड के खिलाड़ी भारत दौरे को दूसरी नज़रों से देखते थे. दुनियाकी नज़रों में भारत-पाकिस्तान की एक-सी छवि थी. असुरक्षित और गरीब देश. इंग्लैंड कीटीम जैसे अब आती है वैसे तब राज़ी-राज़ी नहीं आती थी. कभी असुरक्षा का कारण तो कभीपूस-माह के जाड़े में भी बुलाने पर इंग्लैंड वाले कहते थे – बहुत गर्मी है. आजज़माना बहुत बदल गया है. भारत विदेशी क्रिकेटरों के लिए पैसे की खदान है – नंबर वनकैरियर डेस्टिनेशन. लगभग हर रिटायर्ड क्रिकेटर की इच्छा होती है कि इंडिया का कोईचैनल या न्यूज़ संस्थान बुला ले. इन्हीं क्रिकेटरों में एक क्रिकेटर हैं इंग्लैंडके दाएं हाथ के स्टार बल्लेबाज़ रहे एलन लैंब.इस रिटायर्ड इंग्लिश क्रिकेटर ने एक नया ही रोज़गार खोज डाला है. अंग्रेज़ों कोभारत में टेस्ट मैच दिखाने और राजस्थान में ऊंटों की सवारी करवाने का व्यवसाय. इसेकहा जाता है क्रिकेट टूरिज्म. अपनी टीम को खेलते हुए भी देखो और भारत भी देखो. एलनलैंब इस बार 50 इंग्लिश क्रिकेट-पर्यटकों को भारत दिखाने ला रहे हैं. लैंब ने उसयुग में भारत दौरा किया था जब इंग्लिश क्रिकेटर भारत में 'सुविधाओं की कमी' औरभारत-भ्रमण पर पेट की गड़बड़ी की समस्या से टूर पर आने से डरते थे.एलन लैंब कहते हैं, ‘अब बहुत कुछ बदल गया है. मैं 1984 में पहली बार आया था. येशानदार देश है और मुझे यहां बार-बार आना पसंद है. '1984 का इंग्लैंड दौरा असामान्यथा. हम दिल्ली आए उसी दिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हो गई और हमें होटलसे बाहर न जाने के लिए कहा गया. हर कहीं पेट्रोल पंपों पर आग लगी हुई थी, धुआं उठरहा था.' वह साल 1984 पूरे भारत के लिए ही निर्णायक साल था - अंतरिक्ष में राकेशशर्मा का जाना, ऑपरेशन ब्लूस्टार, भोपाल गैस कांड और इंदिरा गांधी की हत्या. इंदिरागांधी की हत्या के बाद सिख-विरोधी दंगों के दौरान जैसे-तैसे इंग्लिश टीम को निकालागया.लैंब याद करते हैं, 'अगले 2 दिन तक हम फंसे रहे. आखिर में श्रीलंका के प्रधानमंत्रीके साथ उनके हवाई जहाज़ से हम कोलंबो पहुंचे. हमें 2 हफ्तों में वापिस लौटने के लिएकहा गया और हर कोई ऊहापोह में था.'वापस आने पर भी घटनाओं का सिलसिला ज़ारी था. 27 नबंवर को इंग्लैंड के उप-उच्चायुक्तपर्सी नॉरिस की हत्या कर दी गई. हत्या की ज़िम्मेदारी एक आतंकी संगठन ने ली किपर्सी नॉरिस स्कॉटलैंड यार्ड और सीआईए के साथ काम करता था. बकौल लैंब, 'टेस्ट मैचसे पहली रात हम उच्चायुक्त के घर गए और अगले ही दिन उप-उच्चायुक्त को गोली मार दीगई. हम क्रिकेट खेलने की हालत में नहीं थे. मुझे याद है हम पहले बैटिंग कर रहे थेऔर जब फॉअलर बैटिंग करने गए किसी ने पटाखा फोड़ दिया और वो ज़मीन पर जा पड़े,उन्हें लगा कि किसी ने उन गोली चला दी है.’लेकिन इस सबके बावजूद दौरा रद्द नहीं किया गया. वह दौरा एक दम शांति से संपन्न हुआ,बल्कि इंग्लैंड ने जीत भी लिया. लैंब बताते हैं,’हमारी सुरक्षा बड़ी ज़ोरदार थी औरदौरा एकदम आराम से चला. हमारी ये भी किस्मत ही थी कि उस वक्त सुनील गावस्कर और कपिलदेव में कुछ तनातनी थी और उनकी टीम थोड़ी बंटी बुई थी. हम जीतने में कामयाब रहे.’आजकल एलन लैंब मुंबई में जहां-जहां अंग्रेज़ टेस्ट-पर्यटक ठहरेंगे वहां व्यवस्थाचैक कर रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि मुंबई में चौथा टेस्ट आने तक भारत ये सीरीज़जीत जाएगा. ख़ासकर बांग्लादेश में ही इंग्लैंड स्पिन के खिलाफ नहीं टिक पाई तोभारतीय स्पिनर तो पहले ही सीरीज़ का बंडल बना देंगे. क्रिकेट के बारे में बात करनेपर लैंब एक चीज़ और बताते हैं कि भारतीय क्रिकेट कुंबले के सुरक्षित हाथों में हैऔर उन्हें भारत के कोच और नॉर्थेम्पटनशायर में साथी रहे अनिल कुंबले से मिलने कीउम्मीद भी है. कुंबले भी लैंब को कभी नहीं भूल सकते. कुंबले को अपने 619 विकेट शायदनहीं होंगे लेकिन हर खिलाड़ी को अपना पहला विकेट ज़रूर याद रहता है. ओल्ड ट्रैफर्डके ठंडे मौसम में 19 साल के जवान, चश्मा लगाए हुए कुंबले ने अपना पहला विकेट लियाथा. एलन लैंब कैच मांजरेकर बॉल कुंबले 38.