2003 क्रिकेट वर्ल्ड कप. साउथ अफ्रीका. अलीम दार अम्पायरिंग में खड़े हुए थे. दूरदेश में बैठी उनकी पत्नी नोशाबा बानो उनसे कुछ छुपाने की भरपूर कोशिश कर रही थीं.वो नहीं चाहती थीं कि बीच वर्ल्ड कप अलीम दार परेशान हों. वो अपनी सबसे बड़ी ड्यूटीपूरी कर रहे थे. और अम्पायरिंग करने के लिए ये बेहद ज़रूरी होता है कि इंसान अपनेपूरे दिमाग के साथ वहां खड़ा हो. वो खबर शायद अलीम दार के जीवन की सबसे दुखद खबर थी.उनकी छह महीने की बच्ची जावेरिया की मौत हो चुकी थी. वो जन्म से ही बीमार थी.डॉक्टर्स पहले ही बता चुके थे कि वो ज़्यादा दिनों तक ज़िन्दा नहीं रहेगी. अलीमअम्पायरिंग कर रहे थे. इस बात से बेखबर कि उनकी बेटी इस दुनिया में नहीं थी. उन्हेंये बात बताई ही नहीं गयी थी. अलीम दार को इस बात के बारे में मालूम चला मैच खतमहोने के बाद. वो भी किसी दूसरे सोर्स से. उनकी बीवी शायद उन्हें वर्ल्ड कप के दौरानये बात बताना ही नहीं चाहती थीं. मगर किसी तरह ये बात उन तक लीक होकर पहुंच गयी.अलीम दार. अपने क्रिकेट खेलने के दिन में वो मिडल ऑर्डर बैट्समैन थे लेग स्पिनर थे.लेकिन उनका करियर कभी उस मुकाम तक नहीं पहुंच सका जहां तक उनकी अम्पायरिंग पहुंची.लाइव मैचों को देखना मैंने बहुत देर में शुरू किया. और इसी वजह से अलीम दार कोमैंने पहली बार नोटिस किया था इंडिया वर्सेज़ साउथ अफ्रीका के बीच हुए मैच में. ज़हीरखान की स्विंग होती हुई गेंद डिविलियर्स को छोडती हुई जा रही थी. मगर स्विंग इतनीलेट थी कि गेंद ठीक डिविलियर्स के सामने से निकली. उनका बल्ला रुक नहीं पाया औरगेंद से जा लगा. गेंद को स्लिप में खड़े सचिन ने अपने लेफ़्ट साइड में गिरते हुए कैचकिया. ज़हीर खान कूदते हुए बैटिंग क्रीज़ तक पहुंच गए. मगर जब अम्पायर का मुंह देखागया तो वो गर्दन हिला रहे थे. साफ़ आउट को अम्पायर अलीम दार ने नॉट आउट दे दिया था.मुझे अलीम दार से नफ़रत जैसा कुछ हो गया. साथ में कुछ पाकिस्तानी फैक्टर भीअप्लाई हो रहा था. https://www.youtube.com/watch?v=eqNJLQddOp4--------------------------------------------------------------------------------ये एक ग़लत फ़ैसला था जो अलीम दार ने दिया था. बाद में मालूम चला कि ऐसे मौके बहुत हीकम आते हैं जब अलीम दार के दिए फ़ैसले ग़लत साबित हों. मैंने देखा है जब एलबीडब्लूडिसीज़न में गेंद की ट्रैजेक्ट्री से मालूम चलता है कि गेंद का 50% से ज़्यादा हिसाऑफ स्टम्प के बाहर पड़ा था और इसी वजह से अलीम दार ने नॉट आउट दिया था. ये सब कुछनंगी आंखों से देखा जाना नामुमकिन है. लेकिन अलीम दार इंसान नहीं मशीन है. 2003वर्ल्ड कप के दौरान अफवाह सुनी थी कि सचिन ने अपनी आंखों में वो लेंस लगवाया हुआ हैजिससे गेंद बड़ी होकर दिखती है. वो मात्र अफवाह थी मगर मैं अलीम दार की आंखों में एकऐसे ही लेंस की मौजूदगी को सच मानता हूं. --------------------------------------------------------------------------------अलीम के ग़लत फ़ैसलों के बारे में एक किस्सा है. किस्सा असल में ग़लत फ़ैसलों के बारेमें नहीं बल्कि उनके उस हाथ के बारे में है जो गलती से ग़लत फैसले दे देता है. अलीमदार राइट हैन्डेड हैं. यानी वो अपने सभी काम दायें हाथ से करते हैं. लेकिन जबअम्पायरिंग के दौरान डिसीज़न देने का वक़्त आता है तो वो अपना बायां हाथ इस्तेमालकरते हैं. इसके बारे में जब उनसे पूछा गया तो वो बताते हैं कि वो इस्लाम धर्म मेंऔर धर्म की सिखाई हुई चीज़ों में काफी विश्वास रखते हैं. वो खुद एक धार्मिक व्यक्तिहैं और उनके धर्म में दायें हाथ की पहली उंगली का शहादत की उंगली कहलाती है. इस्लाममें जब नमाज़ अता की जाती है तब अल्लाह का नाम आने पर नमाज़ी अपने दायें हाथ की पहलीउंगली उठाता है. इसलिए वो उंगली पाक, उंगली कहलाती है. और अलीम दार कतई नहीं चाहतेकि उनकी उस उंगली से कोई भी ग़लत फ़ैसला दिया जाए. इसलिए वो इस बात का ख़ास ख्याल रखतेहैं कि कोई भी डिसीज़न देते वक़्त वो दायें हाथ से न दें. और गलती से ही सही, उसपवित्र उंगली से कोई ग़लत फ़ैसला दे दिया जाए. लाहौर के सिविल लाइंस में इस्लामियाकॉलेज से पढ़ाई करने वाले अलीम सरवर दार अब 322 इंटरनेशनल मैचों में खड़े हो चुकेहैं. और ये एक रिकॉर्ड है. उनसे ज़्यादा मैचों में कोई भी अम्पायर खड़ा नहीं हुआ है.अलीम दार पहली बार पाकिस्तान और श्री लंका के बीच जिन्ना स्टेडियम में 16 फरवरी2000 को खड़े हुए थे. 2 साल बाद आईसीसी के इंटरनेशनल पैनल ऑफ़ अम्पायर में उनका नामलिख दिया गया. इसके बाद उन्हें सबसे बड़ी सफ़लता मिली 2003 में जब उन्हें वर्ल्ड कपमें अम्पायरिंग के लिए चुना गया. एक क्रिकेटर की तरह अम्पायरों के लिए भी वर्ल्ड कपमैच में खड़े होना मायने रखता है. इसके बाद 2004 में अप्रैल माह में उन्हें आईसीसीने एलीट अम्पायर्स पैनल में रख लिया. 2005 और 2006 में उन्हें लगातार अम्पायर ऑफ़ दइयर के लिए नॉमिनेट किया गया. दोनों की मौकों पर उन्हें ऑस्ट्रेलिया से आने वालेअम्पायर साइमन टॉफ़ल ने पीछे किया. अपने करियर के मात्र 7 सालों में वो 100 मैचोंमें अम्पायरिंग कर चुके थे. ये भी एक रिकॉर्ड था. 2011 क्रिकेट वर्ल्ड कप. वोवर्ल्ड कप जिसकी ट्रॉफी धोनी और बाद में हर इंडियन क्रिकेट प्लेयर ने उठाई. उसवर्ल्ड कप में सिर्फ इंडियन टीम ही नहीं जीती थी. उसमें अलीम दार भी जीते थे. ये वोवर्ल्ड कप था जिसमें अंपायरिंग डिसीज़न रिव्यू सिस्टम लागू था. इसमें कोई भी प्लेयरअम्पायर के डिसीज़न को भी चैलेन्ज करते हुए उसका रिव्यू करवा सकता था. पूरे वर्ल्डकप में 15 बार अलीम दार के फ़ैसलों को चैलेन्ज किया गया. और थर्ड अम्पायर के रिव्यूके बाद हर मौके पर ये मालूम चला कि जो अलीम दार ने कहा था वो सही था. और यही अलीमदार का सबसे मारक पॉइंट है. अलीम दार माने खरापन.