फुटबॉल की दुनिया में नया प्लान आया है, देखने से पहले पुराने वालों का हाल जानेंगे?
एक दशक में इतने वादे... कितने सच, कितने झूठ?
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2 सितंबर 2022. इंडियन फुटबॉल ने एक नई सुबह देखी. ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) को एक नया अध्यक्ष, नया सचिव और नई कार्यकारी समिति मिली थी. प्रफुल्ल पटेल के जाने के बाद देश भर के फुटबॉल फ़ैन्स ने इसे एक नई शुरुआत माना. और अब, लगभग चार महीने बाद कल्याण चौबे की अध्यक्षता में AIFF ने देश को एक नया रास्ता दिखाया है. शनिवार, 7 जनवरी को कल्याण और जनरल सेक्रेटरी डॉ. शाजी प्रभाकरन ने इंडियन फुटबॉल के लिए एक नया रोडमैप लॉन्च किया.
इस रोडमैप के मुताबिक टीम इंडिया 2047 तक फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में खेलेगी. इसके अलावा हमारी टीम एशिया की टॉप टीम्स में से एक बन जाएगी. इस रोडमैप में और भी बहुत से वादे किए गए हैं, लेकिन उन पर आने से पहले आपको थोड़ा पीछे ले चलते हैं.
AIFF ने अपना पहला रोडमैप 2013 में लॉन्च किया था. ये प्लान 2014 से लेकर 2017 तक का था. इसके बाद एक और रोडमैप आया, जिसे 2019 से 2022 तक लागू किया गया था. तो पहले, इन दोनों रोडमैप्स में किए गए वादों और उनके रिजल्ट्स देख लेते हैं.
# पहला रोडमैपइस रोडमैप में AIFF ने एक नेशनल प्लेयर रजिस्ट्रेशन सिस्टम की बात की थी, जिसे शुरू भी कर दिया गया था. हालांकि इसके बावजूद उम्र में धोखाधड़ी के कई केस हुए. इसी रोडमैप में ऐसा कहा गया था कि स्टेट असोसिएशन्स को मज़बूत किया जाएगा. पर ऐसा देखने को नहीं मिला. बल्कि स्टेट्स और फेडरेशन के झगड़ों को देखकर लगता है कि खाई और चौड़ी हो गई है.
फेडरेशन ने दावा किया था कि 2015 तक एक नेशनल विमिंस लीग शुरू कर दी जाएगी. वादा ये भी था कि 2017 तक हमारी टीम की रैंकिग 40 तक आ जाए, और टीम 2018 एशियन कप के लिए क्वॉलिफाई करेगी. यूं तो विमिंस लीग 2016 में शुरू हुई, पर बाकी वादे पूरे नहीं हुए. विमिंस टीम अभी भी टॉप-40 में शामिल नहीं हो पाई है. 2022 में इंडिया ने विमिंस एशिया कप में बतौर होस्ट हिस्सा लिया था. क्वॉलिफाई कर पाना अभी भी मुश्किल ही है.
उसी वक्त ISL भी शुरू हुआ था. आई-लीग तब इंडिया की टॉप लीग थी. सपने दिखाए गए कि 2017 तक कोई आई-लीग क्लब एशियन चैम्पियंस लीग के मेन राउंड के लिए क्वॉलिफाई करेगा, आई लीग क्लब AFC कप जीतेगा. और आई-लीग पूरे देश में फैल जाएगी. 2017 छोड़िए, 2022 तक ऐसा नहीं हो पाया है.
2016 में बेंगलुरू FC की टीम AFC कप के फाइनल तक पहुंची थी. पर उस क्लब की सफलता का क्रेडिट AIFF को नहीं मिलना चाहिए. वो क्लब प्रोफेशनली चलाया जाता है और उस दौर में ये टीम शानदार फुटबॉल खेल रही थी. अगर AIFF का प्लान सफल होता, तो साल-दर-साल कोई न कोई इंडियन क्लब एशियन लेवल पर अच्छा कर रहा होता. पर ऐसा है नहीं.
इस प्लान में ये भी कहा गया था कि हर एज ग्रुप के लिए कॉम्पटीशन्स चलाए जाएंगे और नेशनल कॉम्पटीशन्स मज़बूत किए जाएंगे. 2012 के बाद नेहरू कप बंद हो गया था. 2017 में इंटरकॉन्टिनेंटल कप के नाम से इसे फिर से शुरू किया गया, पर तीन साल बाद फिर वही हाल हो गया. 1941 से चल रही संतोष ट्रॉफी को भी 2018 में रोक दिया गया. ये टूर्नामेंट फिर 2021-22 में शुरू हुआ था. 2016 के बाद कलिंगा कप भी नहीं खेला गया है. यानी हाल आपके सामने है.
AIFF ने अपने प्लान में ये भी कहा था कि वो क्लब्स को और मज़बूत करेंगे. पर ऐसा हुआ नहीं. गोवा के कई बड़े क्लब्स - डेंपो, सालगांवकर और स्पोर्टिंग क्लब ने नेशनल लीग में हिस्सा लेना बंद कर दिया. इसी दौरान पुणे स्थित डीएसके शिवाजिएंस भी बंद हो गया.
अब नेशनल मेंस टीम की बात. 2019 एशियन कप के लिए क्वॉलिफाई करना. ये वादा पूरा हुआ. स्टीफन कॉन्सटनटीन की टीम ने ये काम कर दिखाया था. उस दौर में टीम इंडिया की रैंकिग में भी सुधार आया था. अब 2019-2022 की ओर चलते हैं.
# दूसरा रोडमैपइस रोडमैप में पहले AIFF ने अपनी पीठ थपथपाई. इसके साथ बड़े-बड़े दावे भी किए. एक बार फिर बड़े-बड़े सपने दिखाए गए. ऐसे भी कहा गया कि AIFF ने पहले रोडमैप का 80% टार्गेट पूरा कर लिया. लेकिन इसमें कितना सच है, आप जानते ही हैं.
दूसरे रोडमैप पर लौटते हैं. AIFF की कोशिश थी कि हर साल हर प्लेयर को कम-से-कम 40-50 कॉम्पटिटिव मैच खेलने का मौका मिले. ऐसा हुआ नहीं. प्लेयर्स अब भी साल में ज्यादा से ज्यादा 30-35 मैच ही खेल रहे हैं. देश के टॉप प्लेयर्स इंटरनेशनल और AFC के मैच मिलाकर शायद इतना खेल लेते होंगे, पर ज्यादातर प्लेयर्स अब भी 25-30 मैच के ही फंदे में फंसे हुए हैं.
बेबी लीग्स और जिलों में लीग्स की भी बात कही गई थी. बेबी लीग्स चल रही हैं, पर जिलों का क्या हाल है, ये बताने की जरूरत शायद नहीं है. बंगाल, गोवा, केरल या नॉर्थईस्ट छोड़ दें तो शायद ही कोई स्टेट होगा, जहां ये देखने को मिलता होगा. इस रोडमैप के हिसाब से भारत की अंडर-16 टीम को एशिया के टॉप फोर में आना था. जबकि अंडर-19 और अंडर-23 टीम को टॉप आठ में.
अंडर-16 टीम AFC टूर्नामेंट के लिए क्वॉलिफाई कर चुकी है. टूर्नामेंट अभी होना है. अंडर-19 टीम अपने ग्रेड के लिए क्वॉलिफाई नहीं कर पाई है. और अंडर-23 टीम भी 2022 में हुए टूर्नामेंट के लिए क्वॉलिफाई तक नहीं कर पाई थी. यानी यूथ लेवल पर किया गया हर वादा, झूठ था. अंडर-16 की टीम अच्छा कर रही है, पर उसका क्रेडिट कोच बिबिआनो फर्नांडेज़ को जाना चाहिए.
महिला फुटबॉल के लिए कई चीज़ें की जाने की कसमें खाई गई थी. लड़कियों के लिए जिले के स्तर पर यूथ लीग्स होनी थी. स्टेट लीग्स और मज़बूत की जानी थी. और 2022 तक इंडियन विमिंस लीग को 25 स्टेट्स तक पहुंचाना था. इनमें से कुछ भी नहीं हुआ. थोड़ा बहुत जो हुआ भी, वो नाकाफी ही है.
नेशनल सेंटर ऑफ एक्सिलेंस का वादा किया गया था, जो 2021 के आखिर तक पूरा हो जाना था. हम 2023 में खड़े हैं, और सेंटर ऑफ एक्सिलेंस अभी तक लगभग हवा में ही है. नए रोडमैप में इसे 2025-26 तक पूरा किए जाने की बात की गई है.
इन दोनों रोडमैप्स में कितना कुछ लिखा गया, और कितना कुछ किया गया, ये हमने आपको बता दिया. अब आगे बढ़ते हैं.
# नया रोडमैप (2022-2047)अबकी बार वादा हुआ है कि 2047 तक हमारे यूथ प्लेयर्स कम से कम 35 मैच खेलेंगे. हर एलीट यूथ लीग कैटेगरी में 100 टीम्स आ जाएंगी. 40 क्लब्स इंडियन फुटबॉल के टॉप स्ट्रक्चर में रहेंगे. 14-14 ISL और आई-लीग में, और 12 आई-लीग के दूसरे डिवीज़न में. ये क्लब स्ट्रक्चर बदलने का वादा 2026 तक है.
पुराने टूर्नामेंट्स जो बंद हो गए हैं, उन्हें फिर से शुरू किया जाएगा. एक सीनियर विमिंस नेशनल कप कॉम्पटिशन भी शुरू होगा. 2047 तक हमारी लीग्स एशिया की टॉप तीन लीग्स में शामिल हो जाएंगी. हमारे प्लेयर्स हर सीज़न 55 मैच खेलेंगे, जैसा यूरोप में होता है. हर स्टेट की अपनी लीग होगी.
2027 तक मेंस टीम एशिया के टॉप 10 में आ जाएगी और विमिंस टीम टॉप 6 में, ऐसा कहा गया है. 2047 तक दोनों टीम्स को एशिया के टॉप फोर में पहुंचना है. मीडिया, यानी हमें भी AIFF ने अपना पार्टनर बताया है. हम तो सहयोग करेंगे, पर क्या बाकी चीज़ें हो पाएंगी? नया मैनेजमेंट कितना कुछ कर पाता है, वक्त ही बताएगा!
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