प्लास्टिक के बैट से खेलने वाले लड़के ने भारत को वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचा दिया
भारत के उभरते सितारे एरॉन जॉर्ज (Aaron George) ने अंडर-19 मेन्स क्रिकेट वर्ल्ड कप में कमाल कर दिया. उन्होंने सेमीफाइनल में अफगानिस्तान के खिलाफ धुआंधार बैटिंग करते हुए 115 रन बनाए. उनकी इस पारी के चलते भारत फाइनल में पहुंच गया.

अंडर-19 मेन्स क्रिकेट वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल मैच में भारतीय टीम ने कमाल कर दिया. टूर्नामेंट का दूसरा सेमीफाइनल भारत और अफगानिस्तान के बीच हरारे में खेला गया. टीम इंडिया को मैच जीतने के लिए 311 रनों काटारगेट मिला. इस दौरान वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) और कप्तान आयुष म्हात्रे (Ayush Mhatre) ने जोरदार बैटिंग की. सूर्यवंशी ने 33 गेंदों पर 68 रन बनाए. वहीं, म्हात्रे ने 59 गेंदों पर 62 रन की पारी खेली. लेकिन, भारतीय टीम की जीत के हीरो रहे एरॉन जॉर्ज (Aaron George). उन्होंने धुआंधार बैटिंग करते हुए 104 गेंदों पर 115 रन बनाए. उन्होंने 15 चौके और 2 छक्के जड़े. उनकी इस इनिंग्स के चलते भारत 10वीं बार अंडर-19 मेन्स क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंच गया. इस आर्टिकल में बताते हैं कि एरॉन जॉर्ज कौन हैं, और उनके क्रिकेट के सफर की शुरुआत कैसे हुई?
कौन हैं एरॉन जॉर्ज?भारत की मौजूदा अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप टीम में शामिल, एरॉन जॉर्ज का जन्म 1 अक्तूबर 2006 को केरल के कोट्टायम में हुआ. वह राइट हैंड बैटर के अलावा मीडियम पेसर बॉलर हैं. केरल में जन्में एरॉन हैदराबाद में पले बढ़े. उनकी स्कूलिंग यहीं हुई. वह डोमेस्टिक क्रिकेट में हैदराबाद के लिए खेलते हैं. साल 2022-23 में उन्हेंने विजय मर्चेंट ट्रॉफी में अपनी टीम की कप्तानी की. इस दौरान उन्होंने बिहार के खिलाफ 303 रन बनाए. वहीं, वीनू मांकड़ ट्रॉफी के पिछले दो सीजन की बात करें, तो एरॉन जॉर्ज के बल्ले से 341 और 373 रन निकले.
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प्लास्टिक के बैट से शुरू हुआ सफरइंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एरॉन जॉर्ज के 4 चौथे बर्थडे पर उनको किसी ने प्लास्टिक का क्रिकेट बैट गिफ्ट किया. जिसके बाद उन्होंने खेलना शुरू किया. सभी लोग यह देखकर हैरान थे कि वह अपनी उम्र के बच्चों की तरह इधर-उधर बैट नहीं चलाते थे. उनका बैट सीधा रहता था. वह घर के ड्राइंग रूम में बैट और छोटी सी गेंद से खेलते थे. यहीं से उनके क्रिकेटर बनने की कहानी शुरू हुई.
संजू सैमसन से होती है तुलनासोशल मीडिया पर अक्सर लोग उनकी तुलना संजू सैमसन से करते हैं. एरॉन, सूर्यवंशी या म्हात्रे की तरह अटैकिंग बैटिंग नहीं करते हैं. वह अपनी टाइमिंग पर ज्यादा डिपेंड रहते हैं. वह ग्राउंड के हर एरिया में गैप खोजने में माहिर हैं. वह संजू की तरह गेंद को बिना स्लॉग किए टाइम करते हैं. वह अनुशासित बैटिंग करने में यकीन रखते हैं.
उन्होंने एक ऐसी ही कॉन्फिडेंस से भरी पारी एसीसी एशिया कप अंडर-19 मैच में पाकिस्तान के खिलाफ खेली थी. दुबई के आईसीसी एकेडमी पर हुए इस मुकाबले में तब उन्होंने 88 गेंद पर 85 रन बनाए थे.
एरॉन जॉर्ज को क्रिकेटर बनाने में पिता का पूरा सहयोग रहा. उनके पिता ईसो वर्गीस खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे. लेकिन, उन्हें सपोर्ट नहीं मिला. वह लोकल लेवल पर क्रिकेट खेलते थे. ईसो पहले पुलिस में थे बाद में कॉर्पोरेट सेक्टर में चले गए. ऐसा उन्होंने इसलिए किया कि वह अपने बेटे पर फोकस कर सकें. बाद में, उनकी मेहनत रंग लाई. अंडर-19 मेन्स क्रिकेट वर्ल्ड कप में अफगानिस्तान के खिलाफ सेंचुरी जड़ने वाले एरॉन जॉर्ज सुर्खियों में हैं. एक गेंद पर दो तरह के शॉट लगाने की क्षमता रखने वाले एरॉन, साउथ अफ्रीका के पूर्व बैटर एबी डिवीलियर्स को अपना आइडियल मानते हैं.
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