सर्बानंद सोनोवाल: फुटबॉल-बैडमिंटन का खिलाड़ी और असम का भावी CM
सोनोवाल की अगुवाई में BJP को असम में ऐतिहासिक जनादेश मिला. सोनोवाल के बारे में जानिए सब कुछ.
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फोटो - thelallantop
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केंद्र में खेल और युवा मामलों के मंत्री सर्बानंद सोनोवाल दिल्ली से विदा लेकर अब दिसपुर में बैठेंगे. नॉर्थ ईस्ट में पहली बार बीजेपी अपने दम पर सरकार बनाने में कामयाब होती दिख रही है. गरीबी, बेरोजगारी और हिंसक संघर्षों से बुरी तरह प्रभावित असम की कमान अब सर्बानंद संभालेंगे. आइए उनके बारे में आपको जरा डिटेल में बताते हैं.
1. सर्बानंद सोनोवाल असम के डिब्रूगढ़ शहर से आते हैं. डिब्रूगढ़ और गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है. वकालत की पढ़ाई भी की है. असम में लोकप्रिय चेहरा हैं. बीजेपी को लगा कि 'ही इज द राइट मैन'. और उन्हें सीएम कैंडिडेट बना दिया.
2. 25 की उम्र में इन्होंने स्टूडेंट पॉलिटिक्स शुरू की. 30 की उम्र में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष बने. और अगले 7 सालों तक AASU के अध्यक्ष रहे. मतलब ये कि छात्रों ने इन्हें काफी पसंद किया.
3. AASU की सक्रिय पॉलिटिक्स ने इन्हें असम गण परिषद (AGP) में एंट्री दिलाई. तब इनकी उम्र रही होगी कुछ 39-40 साल. और पार्टी में घुसते ही ये मोरन से विधायक चुन लिए गए.
4. 2004 में, यानी AGP जॉइन करने के ठीक 3 साल बाद, 43 की उम्र में ये डिब्रूगढ़ से सांसद चुने गए.
5. लेकिन 2011 में सोनोवाल ने असम गण परिषद को छोड़ दिया. कारण था इल्लीगल माइग्रेंट्स (डिटरमिनिशन बाई ट्रिब्यूनल) IMDT एक्ट. ये एक्ट इंदिरा गांधी सरकार ने असम में 1983 में लागू किया था. जिसके मुताबिक़ असम में घुसे गैरकानूनी माइग्रेंट्स को राज्य से बाहर निकालने का प्रोसेस कठिन हो गया था. इंदिरा सरकार का कहना था कि माइग्रेंट्स के निर्वासन में असम की माइनॉरिटी को हैरेस किया जा रहा था. ये वही दौर था जब इंदिरा गांधी ने 40 लाख बंगलादेशी इमीग्रेंट्स को वोट डालने का हक दे दिया था. और असम में दंगे भड़क उठे थे.
6. लेकिन सोनोवाल ने 28 साल पुराने इस क़ानून को चुनौती दी. नतीजतन, उन्होंने AGP छोड़ BJP जॉइन कर ली. इस एक्ट को सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में ख़त्म कर दिया.
7. अगले ही साल इन्हें BJP के असम यूनिट का चीफ चुन लिया गया.
8. लेकिन इमीग्रेंट्स का मुद्दा खिंचता रहा. जुलाई 2012 में, यानी सोनोवाल के बीजेपी जॉइन करने के एक साल बाद असम के बोडो समुदाय और बंगाली-मुसलमान इमीग्रेंट्स के बीच दंगे हो गए. अगस्त में आई रिपोर्ट के मुताबिक़ 77 लोगों की मौत हुई और 4 लाख लोगों को रिलीफ कैंपों में शरण लेनी पड़ी. लगभग 400 गांव खाली करा लिए गए. दंगों का जिम्मेदार असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई को ठहराया गया. और तरुण गोगोई ने दोष मढ़ा UPA की केंद्र सरकार पर. उनके मुताबिक केंद्र ने दंगे रोकने के लिए समय पर सेना नहीं भेजी. तब से असम में कॉन्ग्रेस की पकड़ ढीली पड़ने लगी.
9. 2014 लोकसभा चुनाव में जब नरेंद्र मोदी सरकार बनी, इन्हें केंद्र में स्पोर्ट्स एंड यूथ अफेयर्स मिनिस्ट्री का स्वतंत्र प्रभार दे दिया गया. सोनोवाल फुटबॉल और बैडमिंटन के बढ़िया खिलाड़ी रहे हैं. खेलप्रेमी हैं, इसलिए खेल मंत्रालय के लिए फटाक से चुन लिए गए.
10. फिर 2016 असेंबली इलेक्शन, यानी इस बार बने बीजेपी के लिए असम के CM कैंडिडेट. असम में सोनोवाल की पर्सनालिटी जाबड़ है. लोग इन्हें 'जातीय नायक' भी कहते हैं. फेसबुक, ट्विटर पर ये एक्टिव हैं. और यूथ के बीच खूब पसंद किए जाते हैं.
1. सर्बानंद सोनोवाल असम के डिब्रूगढ़ शहर से आते हैं. डिब्रूगढ़ और गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है. वकालत की पढ़ाई भी की है. असम में लोकप्रिय चेहरा हैं. बीजेपी को लगा कि 'ही इज द राइट मैन'. और उन्हें सीएम कैंडिडेट बना दिया.
2. 25 की उम्र में इन्होंने स्टूडेंट पॉलिटिक्स शुरू की. 30 की उम्र में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष बने. और अगले 7 सालों तक AASU के अध्यक्ष रहे. मतलब ये कि छात्रों ने इन्हें काफी पसंद किया.
3. AASU की सक्रिय पॉलिटिक्स ने इन्हें असम गण परिषद (AGP) में एंट्री दिलाई. तब इनकी उम्र रही होगी कुछ 39-40 साल. और पार्टी में घुसते ही ये मोरन से विधायक चुन लिए गए.
4. 2004 में, यानी AGP जॉइन करने के ठीक 3 साल बाद, 43 की उम्र में ये डिब्रूगढ़ से सांसद चुने गए.
5. लेकिन 2011 में सोनोवाल ने असम गण परिषद को छोड़ दिया. कारण था इल्लीगल माइग्रेंट्स (डिटरमिनिशन बाई ट्रिब्यूनल) IMDT एक्ट. ये एक्ट इंदिरा गांधी सरकार ने असम में 1983 में लागू किया था. जिसके मुताबिक़ असम में घुसे गैरकानूनी माइग्रेंट्स को राज्य से बाहर निकालने का प्रोसेस कठिन हो गया था. इंदिरा सरकार का कहना था कि माइग्रेंट्स के निर्वासन में असम की माइनॉरिटी को हैरेस किया जा रहा था. ये वही दौर था जब इंदिरा गांधी ने 40 लाख बंगलादेशी इमीग्रेंट्स को वोट डालने का हक दे दिया था. और असम में दंगे भड़क उठे थे.
6. लेकिन सोनोवाल ने 28 साल पुराने इस क़ानून को चुनौती दी. नतीजतन, उन्होंने AGP छोड़ BJP जॉइन कर ली. इस एक्ट को सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में ख़त्म कर दिया.
7. अगले ही साल इन्हें BJP के असम यूनिट का चीफ चुन लिया गया.
8. लेकिन इमीग्रेंट्स का मुद्दा खिंचता रहा. जुलाई 2012 में, यानी सोनोवाल के बीजेपी जॉइन करने के एक साल बाद असम के बोडो समुदाय और बंगाली-मुसलमान इमीग्रेंट्स के बीच दंगे हो गए. अगस्त में आई रिपोर्ट के मुताबिक़ 77 लोगों की मौत हुई और 4 लाख लोगों को रिलीफ कैंपों में शरण लेनी पड़ी. लगभग 400 गांव खाली करा लिए गए. दंगों का जिम्मेदार असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई को ठहराया गया. और तरुण गोगोई ने दोष मढ़ा UPA की केंद्र सरकार पर. उनके मुताबिक केंद्र ने दंगे रोकने के लिए समय पर सेना नहीं भेजी. तब से असम में कॉन्ग्रेस की पकड़ ढीली पड़ने लगी.
9. 2014 लोकसभा चुनाव में जब नरेंद्र मोदी सरकार बनी, इन्हें केंद्र में स्पोर्ट्स एंड यूथ अफेयर्स मिनिस्ट्री का स्वतंत्र प्रभार दे दिया गया. सोनोवाल फुटबॉल और बैडमिंटन के बढ़िया खिलाड़ी रहे हैं. खेलप्रेमी हैं, इसलिए खेल मंत्रालय के लिए फटाक से चुन लिए गए.
10. फिर 2016 असेंबली इलेक्शन, यानी इस बार बने बीजेपी के लिए असम के CM कैंडिडेट. असम में सोनोवाल की पर्सनालिटी जाबड़ है. लोग इन्हें 'जातीय नायक' भी कहते हैं. फेसबुक, ट्विटर पर ये एक्टिव हैं. और यूथ के बीच खूब पसंद किए जाते हैं.

