The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Science
  • NASA releases details on a 'never-before-seen' type of celestial object Cloud-9

न तारे, न चमक, फिर भी गैलेक्सी, NASA की खोज से खुलेगा ब्रह्मांड का 'डार्क सच'

Cloud-9 एक 'फेल्ड गैलेक्सी' है. मतलब, इसमें गैस तो इकट्ठा हुई लेकिन तारे बनने की प्रक्रिया रुक गई. इसमें करीब एक मिलियन सोलर मास (सूर्य के Mass के बराबर) की न्यूट्रल हाइड्रोजन गैस है, जो पांच बिलियन सोलर मास के डार्क मैटर हालो में कैद है.

Advertisement
NASA releases details on a 'never-before-seen' type of celestial object
क्लाउड-9 को सबसे पहले तीन साल पहले स्पॉट किया गया था. - फोटो (J DePasquale/STScI)
pic
प्रशांत सिंह
12 जनवरी 2026 (पब्लिश्ड: 01:56 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

NASA ने हाल ही में एक ऐसी खगोलीय (astronomical) वस्तु के बारे में रिपोर्ट जारी की है, जो पहले कभी नहीं देखी गई. इसे 'क्लाउड-9' नाम दिया गया है, और ये एक तरह की 'फेल्ड गैलेक्सी' है. मतलब, एक ऐसी गैलेक्सी जो बनने की कोशिश में थी लेकिन कभी तारा नहीं बना सकी. इसे एक बात काफी खास बनाती है कि इसमें तारों की रोशनी बिल्कुल भी नहीं है. ये पूरी तरह से न्यूट्रल हाइड्रोजन गैस भरी हुई है, जो एक डार्क मैटर हालो में घिरी हुई है. इस फेल्ड गैलेक्सी की खोज हमें ब्रह्मांड के शुरुआती दिनों की झलक देती है और बताती है कि कैसे कुछ गैलेक्सी बनाने वाले ब्लॉक्स बिना बदले ही बच गए. ये स्टोरी न केवल एस्ट्रोनॉमी की दुनिया में हलचल मचा रही है, बल्कि डार्क मैटर और गैलेक्सी फॉर्मेशन की थ्योरी को भी चैलेंज कर रही है. आइए, वैज्ञानिक बैकग्राउंड से लेकर इम्प्लिकेशन्स तक, इसके बारे में डिटेल में बात करते हैं.

सबसे पहले समझते हैं कि गैलेक्सी फॉर्मेशन कैसे होता है, इसके बेसिक क्या हैं?

ब्रह्मांड में गैलेक्सी ‘गैस क्लाउड्स’ से शुरू होती हैं. ये क्लाउड्स गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के कारण सिकुड़ते हैं. और जब पर्याप्त घनत्व (Density) हो जाता है, तो तारे बनने लगते हैं. तारे जलने से रोशनी निकलती है, और इसी से हम गैलेक्सी को देख पाते हैं. माने, तारे गैलेक्सी की विजिबिलिटी का एक जरिया हैं.

Image embed
क्लाउड-9 का मामला अलग है. ये एक 'फेल्ड गैलेक्सी' है. मतलब, गैस तो इकट्ठा हुई, लेकिन तारे बनने की प्रक्रिया रुक गई.

लेकिन क्लाउड-9 का मामला अलग है. ये एक 'फेल्ड गैलेक्सी' है. मतलब, गैस तो इकट्ठा हुई, लेकिन तारे बनने की प्रक्रिया रुक गई. इसमें करीब एक मिलियन सोलर मास (सूर्य के Mass के बराबर) की न्यूट्रल हाइड्रोजन गैस है, जो पांच बिलियन सोलर मास के डार्क मैटर हालो में कैद है. पर ये डार्क मैटर क्या बला है? डार्क मैटर वो अदृश्य मैटर है जो रोशनी नहीं देता, लेकिन ग्रैविटी से चीजों को बांधे रखता है.

अब आते है क्लाउड-9 पर. ये क्लाउड ब्रह्मांड के शुरुआती दौर से बचा हुआ एक Relic (प्राचीन अवशेष) है. शुरुआती ब्रह्मांड में री-आयोनाइजेशन नाम की प्रक्रिया हुई थी, जहां पहले तारों से निकली अल्ट्रावायलेट लाइट्स ने गैस को आयोनाइज (Charge) कर दिया. लेकिन क्लाउड-9 जैसे ऑब्जेक्ट्स इस प्रक्रिया से बच गए, क्योंकि उनका मास और एनवायरनमेंट ऐसा था कि स्टार फॉर्मेशन नहीं हो सका. वैज्ञानिक इसे रीआयोनाइजेशन-लिमिटेड HI क्लाउड्स (RELHICs) कहते हैं. ये शुरुआती ब्रह्मांड के वो ब्लॉक्स हैं जो न्यूट्रल रह गए और तारे नहीं बना सके.

क्लाउड-9 की डिस्कवरी कैसे हुई?

earth.com की रिपोर्ट के मुताबिक क्लाउड-9 को सबसे पहले तीन साल पहले स्पॉट किया गया था. चीन के फाइव-हंड्रेड-मीटर अपर्चर स्फेरिकल टेलीस्कोप (FAST) ने रेडियो सर्वे के दौरान इसके हाइड्रोजन गैस के सिग्नल्स पकड़े. ये सिग्नल्स न्यूट्रल हाइड्रोजन (H I) से आते हैं, जो रेडियो वेव्स एमिट करता है. फिर, ग्रीन बैंक टेलीस्कोप और वेरी लार्ज ऐरे (VLA) ने इसकी कन्फर्मेशन की. VLA के डेटा से क्लाउड को मैजेंटा कलर में विजुअलाइज किया गया, जो दिखाता है कि ये गैस क्लाउड कहां है.

Image embed
क्लाउड-9 को सबसे पहले तीन साल पहले स्पॉट किया गया था.

लेकिन असली टेस्ट था ये पता लगाना कि क्या इसमें तारे हैं? ग्राउंड-बेस्ड टेलीस्कोप से ये पता नहीं चल पाया था. क्योंकि ऐसा अनुमान था कि बेहद फेंट स्टार्स रहे हों. यहां NASA के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने कमाल किया. हबल की एडवांस्ड कैमरा फॉर सर्वेज (ACS) ने डीप ऑब्जर्वेशंस किए, जो इतने सेंसिटिव थे कि अगर कोई स्टार होता तो दिख जाता. लेकिन कुछ नहीं मिला! स्टडी के लीड ऑथर स्पेस टेलीस्कोप साइंस इंस्टीट्यूट के गगनदीप आनंद बताते हैं,

Image embed

रिपोर्ट के मुताबिक क्लाउड-9 पृथ्वी से 14 मिलियन लाइट-ईयर्स दूर है, और ये स्पाइरल गैलेक्सी Messier 94 के पास मौजूद है. दोनों के बीच गैस में थोड़ी डिस्टॉर्शन है, जो बताती है कि वो इंटरैक्ट कर रही हैं. इसका नाम इसलिए क्लाउड-9 रखा गया, क्योंकि ये मेसियर 94 के आउटस्कर्ट्स में मिला नौवां गैस क्लाउड है. इसका कोर करीब 4,900 लाइट-ईयर्स फैला है, और ये ग्रैविटी से स्टेबल है. न तो गैस स्ट्रिप हो रही है, न ही आयोनाइज.

क्या बनाता है क्लाउड-9 को यूनिक?

सामान्य गैलेक्सी में लाइट जरूरी है, क्योंकि तारे ही सब कुछ होते हैं. लेकिन क्लाउड-9 बिना लाइट के है, जो हमें बताता है कि ब्रह्मांड में डार्क मैटर कितना डॉमिनेंट है. स्टडी के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर मिलानो-बिकोका यूनिवर्सिटी के अलेजैंड्रो बेनिटेज लैंबे कहते हैं,

Image embed

हालांकि, ये ड्वार्फ गैलेक्सी से अलग है क्योंकि ड्वार्फ में कुछ तारे तो होते हैं. क्लाउड-9 पूरी तरह स्टारलेस है, जो इसे RELHICs का पहला कन्फर्म्ड उदाहरण बनाता है. एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटीज फॉर रिसर्च इन एस्ट्रोनॉमी से जुड़े टीम मेंबर एंड्र्यू फॉक्स कहते हैं,

Image embed

ये चैलेंज करता है कि हम गैलेक्सी को सिर्फ लाइट से ही स्टडी करते हैं. यहां बिना स्टेलर इंटरफेरेंस के डार्क मैटर को स्टडी करने का मौका है. STScI की राचेल बीटन कहती हैं,

Image embed

Image embed
क्लाउड-9 पूरी तरह स्टारलेस है, जो इसे RELHICs का पहला कन्फर्म्ड एग्जांपल बनाता है.
साइंटिफिक इम्प्लिकेशन्स और फ्यूचर

ये डिस्कवरी एक और बड़ी बात की ओर इशारा करती है. बताती है कि ब्रह्मांड में ऐसे और भी ऑब्जेक्ट्स हो सकते हैं, जो लाइट-बेस्ड सर्वेज में मिस हो जाते हैं. माने, उन्हें हमारी टूल्स पकड़ नहीं पाते. फ्यूचर रेडियो टेलीस्कोप्स या डीप-स्पेस ऑब्जर्वेशंस से इन्हें ढूंढा जा सकता है. ये गैलेक्सी फॉर्मेशन मॉडल्स को रिफाइन करेगा, क्यों कुछ क्लाउड्स स्टार्स बनाते हैं और कुछ नहीं? डार्क मैटर के रोल को बेहतर समझने में भी मदद मिलेगी. क्योंकि क्लाउड-9 में डार्क मैटर ही सब कुछ कंट्रोल कर रहा है.

और तो और, ये शुरुआती यूनिवर्स की थ्योरी से मैच करता है. जैसे मिल्की वे के सेंटर में प्राइमॉर्डियल ब्लॉक्स हैं, लेकिन क्लाउड-9 जैसे बच गए. कंपेयर करें तो, ये एक 'एबैंडन्ड हाउस' जैसा है, जहां बिल्डिंग शुरू हुई लेकिन कभी कंप्लीट नहीं हो पाई. ये हमें बताता है कि ब्रह्मांड में विजिबल मैटर से ज्यादा डार्क मैटर है, और साइलेंस में भी बहुत कुछ हो रहा है.

क्लाउड-9 की ये स्टडी एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में पब्लिश हुई है, और इसमें शामिल टेलीस्कोप्स FAST, ग्रीन बैंक, VLA और हबल हैं. इमेज में क्लाउड-9 की लोकेशन दिखाई गई है, जहां मैजेंटा रेडियो डेटा गैस को हाइलाइट करता है. और डैश्ड सर्कल रेडियो एमिशन के पीक को मार्क करता है.

ब्रह्मांड की नई समझ

क्लाउड-9 की स्टोरी हमें याद दिलाती है कि ब्रह्मांड कितना मिस्टीरियस है. जहां हम लाइट से सब कुछ मापते थे, वहां अब डार्क, स्टारलेस ऑब्जेक्ट्स हमें नए इनसाइट्स दे रहे हैं. ये फेलियर हमें सक्सेस की तरफ ले जाता है. गैलेक्सी क्यों फेल होती हैं. डार्क मैटर कैसे काम करता है. और शुरुआती ब्रह्मांड कैसा था. फ्यूचर मिशन्स जैसे जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से ऐसे और रेलिक्स मिल सकते हैं. कुल मिलाकर, क्लाउड-9 एक रिमाइंडर है कि ब्रह्मांड में 'नो लाइट, नो प्रॉब्लम' जैसी थ्योरी की डार्कनेस में भी सीक्रेट्स छिपे हैं.

वीडियो: NASA ने 8 महीने बाद ढूंढ निकाले स्पेस में खोए लाल टमाटर, अब ऐसे दिखते हैं

Advertisement

Advertisement

()