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लद्दाख के आसमान में दिखी खून जैसी लाल रोशनी, वैज्ञानिक बोले ये खूबसूरती नहीं खतरे का सिग्नल है

Ladakh Aurora Lights science: लद्दाख में ऑरोरा लाइट्स देखी गईं. नजारा खूबसूरत था, लेकिन पीछे की साइंस खतरनाक. और जब इससे होने वाले नुकसान के बारे में जानेंगे तो पता लगेगा कि यह तो बहुत बुरा संकेत है.

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ladakh red aurora lights solar storm danger for india explained
लद्दाख में 19-20 जनवरी की रात आसमान लाल हो गया था. (Photo: X/@snorl)
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सचिन कुमार पांडे
29 जनवरी 2026 (अपडेटेड: 29 जनवरी 2026, 02:22 PM IST)
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दुनिया भर से लोग ऑरोरा लाइट्स देखने के लिए नॉर्वे, आइसलैंड या फिनलैंड जैसी जगहों पर जाते हैं. धरती से देखने पर यह बहुत खूबसूरत लगती हैं और यह नजारा अद्भुत होता है. हाल ही में भारत में भी ऐसी लाइट्स देखने को मिलीं. ऐसे में आपको लग सकता है कि यह तो कितनी अच्छी बात है, क्या शानदार नजारा रहा होगा. लेकिन कहानी कुछ और है.

असल में खूबसूरत लगने वाली यह लाइटें बहुत बड़े खतरे का संकेत दे रही हैं. और भारत में इन्हें देखे जाने का मतलब है, भारत को भी इसके खतरे से सावधान रहना चाहिए. दरअसल 19 और 20 जनवरी की रात लद्दाख के हानले गांव के पास आसमान में तेज लाल रोशनी निकलती दिखाई दी. आमतौर पर यहां गहरा नीला आकाश, तारे और गैलेक्सी का नजारा दिखता है. लेकिन उन दो दिनों में यहां खून जैसी लाल रोशनी थी.

खतरनाक है पीछे की साइंस

यह उत्तरी ध्रुव में दिखने वालीं ऑरोरा लाइट्स जैसी थीं, बस इनका रंग लाल था. बेशक नजारा खूबसूरत था, लेकिन इसके पीछे की वजह खतरनाक. दरअसल यह लाइट्स सूरज से निकले एक खतरनाक तूफान (Solar Storm) की वजह से पैदा हुई थीं. हुआ ये कि 18 जनवरी को सूरज से एक X‑class solar flare फूटा था. अब आप पूछेंगे कि यह क्या बला है. तो बता दें कि Solar Flare सूरज में होने वाला विस्फोट है. इससे भारी मात्रा में सूरज से एनर्जी, रोशनी और हाई स्पीड पार्टिकल्स निकलते हैं.

इन फ्लेयर को उनकी ताकत के हिसाब से अलग-अलग कैटेगिरी में रखा जाता है. इसमें X-Class सबसे शक्तिशाली धमाका होता है. जब यह X‑class solar flare फूटा, तो इसके साथ ही सूरज ने एक Coronal Mass Ejection (CME) धरती की तरफ फेंका. यह सूरज की गैस और मैग्नेटिक एनर्जी का एक बहुत बड़ा बादल होता है. यह बादल बहुत ही तेज स्पीड से धरती की तरफ आया था. धरती पर आकर यह इसके मैग्नेटिक फील्ड से टकराया. इस टकराव की वजह से G4 लेवल का एक Geomagnetic Storm बन गया. यह एक खतरनाक तूफान होता है.

red aurora over Hanle
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोनॉमी ने ये तस्वीर जारी की जिसमें सोलर स्टॉर्म से बनने वाला ऑरोरा दिख रहा है. (Photo: IIA)

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक जब ये सूरज के हाई स्पीड पार्टिकल्स धरती के ऑक्सीजन एटम्स से टकराए तो इसकी वजह से तेज लाल रोशनी निकली. इसी लाल चमक को Aurora कहते हैं. अब नॉर्वे जैसी जगहों पर यह लाइट हरी दिखती हैं, क्योंकि उत्तरी ध्रुव के पास है. वहां से हम इसकी नीचे की लेयर देखते हैं, जो कि हरी दिखाई देती है. वहीं भारत का लद्दाख क्षेत्र, जो वहां से काफी दूर है और लो लैटिट्यूड पर स्थित है. इसकी वजह से हम इसके ऊपरी हिस्से का लाल रंग देख रहे होते हैं.

सूरज के तूफान से धरती पर नुकसान

अब सवाल है कि यह खतरनाक क्यों है. दरअसल सूरज से निकले यह तेज तूफान धरती में बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं. यह हमारे टेक्नोलॉजी सिस्टम से लेकर, पॉवर ग्रिड और सैटेलाइट्स तक को नुकसान पहुंचा सकते हैं. सोलर तूफान से करंट के झटके पैदा हो सकते हैं, जिससे बिजली के ट्रांसफॉर्मर खराब हो सकते हैं और बड़े‑बड़े ब्लैकआउट हो सकते हैं.

इसके अलावा तूफानों से पृथ्वी का मैग्नेटिक फील्ड सिकुड़ जाता है. इससे सैटेलाइट्स अपने ऑर्बिट से बाहर निकल सकते हैं. भारत के Aditya-L1 मिशन (ISRO) ने दिखाया है कि जियोस्टेशनरी सैटेलाइट्स पर भी सूरज की हानिकारक हवाएं लग सकती हैं. इसके अलावा इन तूफानों से GPS सिग्नल बिगड़ सकते हैं. बैंकिंग/नेविगेशन प्रभावित हो सकता है. अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के एस्ट्रोनॉट्स को रेडिएशन से बचने के लिए शेल्टर लेना पड़ता है.

red aurora over Hanle
ये है लद्दाख में स्थित हानले ऑब्जरवेटरी, जहां आमतौर पर आसमान ऐसे दिखता है. (Photo: Dorje Angchuk)

यह भी पढ़ें- न तारे, न चमक, फिर भी गैलेक्सी, NASA की खोज से खुलेगा ब्रह्मांड का ‘डार्क सच’

कुल मिलाकर सूरज से निकलने वाले यह तूफान धरती पर बड़ी तबाही मचा सकते हैं. ऐसे में इनसे बचने के लिए कुछ तैयारियां भी की जा रही हैं. भारत ने Aditya-L1 मिशन के तहत जो उपकरण भेजे हैं, वह ऐसे तूफान आने से 1-2 दिन पहले ही इनकी जानकारी दे सकते हैं. इससे सैटेलाइट्स को सेफ मोड में डाला जा सकता है. पावर ग्रिड को सुरक्षित किया जा सकता है. हाल ही में आया तेज तूफान बताता है कि सूरज ज्यादा एक्टिव और खतरनाक हो रहा है. आने वाले महीने/सालों में ऐसे तूफ़ान और बढ़ सकते हैं. इससे हमारी टेक-इकोनॉमी और सैटेलाइट नेटवर्क पर भारी दबाव बनेगा.

वीडियो: PSLV C62 मिशन फेल, ISRO ने क्या बताया?

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